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अहंकार मत करो, झुकना सीखो: आचार्य
Updated Mon, 28 Aug 2017 12:52 AM IST
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अहंकार मत करो, झुकना सीखो : आचार्य
मुजफ्फरनगर। आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में अहंकार मत करो, झुकना सीखो। कौन कब राजा बन जाए और कब रंक पता नहीं चलता। हमें कभी जवानी का अभिमान नहीं करना चाहिए।
श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र वहलना में मंगल प्रवचन में ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि उत्तम मार्दव धर्म सभी को झुकने की कला सिखा रहा है। महाराज श्री ने कहा कि हमें कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार कभी किसी का नहीं रहा। राजा को रंक और रंक को राजा बनते देर नहीं लगती। कौन सबल कब निर्बल हो जाए कुछ पता नहीं। जवानी पाकर मॉ-बाप को नहीं भूलना चाहिए। प्रभु और गुरु से दूर नहीं होना चाहिए। जवानी स्थिर नहीं रहती, जिस धन को पाकर हम अहंकार करते हैं, वह भी स्थिर नहीं रहता। जिस शरीर की सुंदरता पर इठलाते हो, यह शरीर नवमलों से युक्त है। रोगों का घर है। अभिमान जब भी करोगे उसका रिजल्ट अच्छा नहीं आएगा। रावण का अभिमान नहीं रहा। जैन समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में मंदिर में पूजा-अर्चना में भाग लिया।
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मुजफ्फरनगर। आचार्य ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि जीवन में अहंकार मत करो, झुकना सीखो। कौन कब राजा बन जाए और कब रंक पता नहीं चलता। हमें कभी जवानी का अभिमान नहीं करना चाहिए।
श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र वहलना में मंगल प्रवचन में ज्ञान सागर जी महाराज ने कहा कि उत्तम मार्दव धर्म सभी को झुकने की कला सिखा रहा है। महाराज श्री ने कहा कि हमें कभी भी अहंकार नहीं करना चाहिए। अहंकार कभी किसी का नहीं रहा। राजा को रंक और रंक को राजा बनते देर नहीं लगती। कौन सबल कब निर्बल हो जाए कुछ पता नहीं। जवानी पाकर मॉ-बाप को नहीं भूलना चाहिए। प्रभु और गुरु से दूर नहीं होना चाहिए। जवानी स्थिर नहीं रहती, जिस धन को पाकर हम अहंकार करते हैं, वह भी स्थिर नहीं रहता। जिस शरीर की सुंदरता पर इठलाते हो, यह शरीर नवमलों से युक्त है। रोगों का घर है। अभिमान जब भी करोगे उसका रिजल्ट अच्छा नहीं आएगा। रावण का अभिमान नहीं रहा। जैन समाज के लोगों ने बड़ी संख्या में मंदिर में पूजा-अर्चना में भाग लिया।
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