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मदनी का इस्तीफा जमीयत और मुस्लिमों के लिए नुकसानदेह : उलमा
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देवबंद (सहारनपुर)। जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी के इस्तीफे को लेकर देवबंदी उलमा ने भी हैरत जताई है। उलमा का कहना है कि वर्तमान समय में जिस तरह मुल्क के हालात बने हुए हैं और मुसलमानों पर अत्याचार हो रहे हैं ऐसे वक्त में मदनी का इस्तीफा दिया जाना किसी भी दशा में उचित नहीं है।
दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान कासमी का कहना है कि हमारी हमेशा से यह ख्वाहिश रही है कि दोनों जमीयत एक हो जाए, लेकिन कुछ मसले ऐसे हैं जिन्हें मिल बैठकर ही सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मौलाना महमूद मदनी ने पिछले कुछ सालों में जिस तेज गति से अपने राजनैतिक व्यक्तित्व को मजबूती प्रदान की है और अपने नेतृत्व से मुस्लिमों की नुमाईंदगी की है वो किसी से भी छुपी हुई नहीं है। इस्तीफा देने से बेहतर होता कि वो इस पर गौर करते। दारुल उलूम फारुकिया के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुका कासमी का कहना है कि मौलाना महमूद मदनी इस्तीफा दे सकते हैं यह कभी सोचा नहीं था। क्योंकि आज मुल्क के मुसलमानों और जमीयत को मौलाना मदनी की बेहद जरूरत है। उनके इस्तीफा देने से जहां मुसलमानों को नुकसान होगा वहीं जमीयत भी कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि हम इतने टुकड़ों में बंट चुके हैं कि अब वोट के नाम पर भी हमें कोई अहमियत नहीं देता। ऐसे हालात में मौलाना मदनी का इस्तीफा दिया जाना मुसलमानों के लिए नुकसान दायक साबित हो सकता है। उन्होंने मदनी से इस्तीफे पर पुनर्विचार करने की मांग की है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के सदस्य मौलवी तसव्वुर हुसैन ने कहा कि मौलाना मदनी के इस्तीफा देने से बड़ा झटका लगा है। उनके बगैर जमीयत उलमा का ख्याल करना भी बेमानी है। उन्होंने कहा कि आज जमीयत उलमा जिस मुकाम पर खड़ी हुई है उसमें महमूद मदनी का बहुत बड़ा हाथ है। मदनी की शख्सियत ऐसी है कि उन्हें हर धर्म के लोग पसंद करते हैं। पिछले दस सालों में उन्होंने मुल्क के मुसलमानों को सामाजी सतह पर मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निजी या संगठनात्मक तौर पर अलग अलग मैदानों में जो कोशिशें की हैं वो सराहनीय है।
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दारुल उलूम जकरिया के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती शरीफ खान कासमी का कहना है कि हमारी हमेशा से यह ख्वाहिश रही है कि दोनों जमीयत एक हो जाए, लेकिन कुछ मसले ऐसे हैं जिन्हें मिल बैठकर ही सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मौलाना महमूद मदनी ने पिछले कुछ सालों में जिस तेज गति से अपने राजनैतिक व्यक्तित्व को मजबूती प्रदान की है और अपने नेतृत्व से मुस्लिमों की नुमाईंदगी की है वो किसी से भी छुपी हुई नहीं है। इस्तीफा देने से बेहतर होता कि वो इस पर गौर करते। दारुल उलूम फारुकिया के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुका कासमी का कहना है कि मौलाना महमूद मदनी इस्तीफा दे सकते हैं यह कभी सोचा नहीं था। क्योंकि आज मुल्क के मुसलमानों और जमीयत को मौलाना मदनी की बेहद जरूरत है। उनके इस्तीफा देने से जहां मुसलमानों को नुकसान होगा वहीं जमीयत भी कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि हम इतने टुकड़ों में बंट चुके हैं कि अब वोट के नाम पर भी हमें कोई अहमियत नहीं देता। ऐसे हालात में मौलाना मदनी का इस्तीफा दिया जाना मुसलमानों के लिए नुकसान दायक साबित हो सकता है। उन्होंने मदनी से इस्तीफे पर पुनर्विचार करने की मांग की है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के सदस्य मौलवी तसव्वुर हुसैन ने कहा कि मौलाना मदनी के इस्तीफा देने से बड़ा झटका लगा है। उनके बगैर जमीयत उलमा का ख्याल करना भी बेमानी है। उन्होंने कहा कि आज जमीयत उलमा जिस मुकाम पर खड़ी हुई है उसमें महमूद मदनी का बहुत बड़ा हाथ है। मदनी की शख्सियत ऐसी है कि उन्हें हर धर्म के लोग पसंद करते हैं। पिछले दस सालों में उन्होंने मुल्क के मुसलमानों को सामाजी सतह पर मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निजी या संगठनात्मक तौर पर अलग अलग मैदानों में जो कोशिशें की हैं वो सराहनीय है।
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