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मन की शांति सबसे बड़ी संपदा:ओमानंद
Updated Sat, 02 Sep 2017 01:27 AM IST
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मन की शांति सबसे बड़ी संपदा : ओमानंद
मोरना (मुजफ्फरनगर)। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व का निर्माण होता हैं। भागवत ईश्वर प्राप्ति का माध्यम और जीवन ज्योति हैं।
श्री शुकदेव आश्रम में श्री मद भागवत की कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि मन की शांति सबसे बड़ी सम्पदा हैं, जबकि अशांति दरिद्रता हैं। जीवन में शांति स्वर्ग के समान हैं। यदि अशांति हैं, तो जीवन नरक समान । भागवत श्रवण से प्राणिमात्र के जीवन में शांति आएगी, मन की मलिनता दूर होगी। भागवत भारतीय चिंतन की अमूल्य निधि हैं। नैतिक मूल्यों को सदैव याद रखे ताकि पापकर्म से बचे रहे। प्रपंचों से मुक्त होकर सरल बनो, सात्विक बनो, आहार और व्यवहार पवित्र रखे। अहंकार प्रबल शत्रु है। जो वास्तविकता से दूर ले जाता हैं और अनैतिक आचरण से मनुष्य जीवन को व्यर्थ कर लेता है। स्वामी ने कहा कि मन, चित और बुद्धि का सकारात्मक प्रयोग किया जाये तो ये जीवन के प्रकाशक सिद्ध होते है। यदि इनमें दोष आ जाये तो नकारात्मक प्रभाव ऐसा फैलाते हैं कि अपना जीवन व्यर्थ करते ही हैं, जो इनके सम्पर्क में आ गया, उसका जीवन भी व्यर्थ समझे।नैतिक मूल्यों के बिना जीवन की हर उपलब्धि निरर्थक हैं।
कथा व्यास जुगल किशोर के सानिध्य में भक्तों ने कलश यात्रा निकाली। यज्ञमान सुरेश चंद गुप्ता भक्त मंडल ग्वालियर ने संतो का पूजन किया। सुमन शास्त्री, अंचल शास्त्री आदि मौजूद रहे। भागवत पीठ में अलग-अलग भाषाओं में छह भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में अनेक प्रांतों से श्रद्धालु शुकतीर्थ पहुंचे हैं।
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि नैतिक मूल्यों से व्यक्तित्व का निर्माण होता हैं। भागवत ईश्वर प्राप्ति का माध्यम और जीवन ज्योति हैं।
श्री शुकदेव आश्रम में श्री मद भागवत की कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि मन की शांति सबसे बड़ी सम्पदा हैं, जबकि अशांति दरिद्रता हैं। जीवन में शांति स्वर्ग के समान हैं। यदि अशांति हैं, तो जीवन नरक समान । भागवत श्रवण से प्राणिमात्र के जीवन में शांति आएगी, मन की मलिनता दूर होगी। भागवत भारतीय चिंतन की अमूल्य निधि हैं। नैतिक मूल्यों को सदैव याद रखे ताकि पापकर्म से बचे रहे। प्रपंचों से मुक्त होकर सरल बनो, सात्विक बनो, आहार और व्यवहार पवित्र रखे। अहंकार प्रबल शत्रु है। जो वास्तविकता से दूर ले जाता हैं और अनैतिक आचरण से मनुष्य जीवन को व्यर्थ कर लेता है। स्वामी ने कहा कि मन, चित और बुद्धि का सकारात्मक प्रयोग किया जाये तो ये जीवन के प्रकाशक सिद्ध होते है। यदि इनमें दोष आ जाये तो नकारात्मक प्रभाव ऐसा फैलाते हैं कि अपना जीवन व्यर्थ करते ही हैं, जो इनके सम्पर्क में आ गया, उसका जीवन भी व्यर्थ समझे।नैतिक मूल्यों के बिना जीवन की हर उपलब्धि निरर्थक हैं।
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कथा व्यास जुगल किशोर के सानिध्य में भक्तों ने कलश यात्रा निकाली। यज्ञमान सुरेश चंद गुप्ता भक्त मंडल ग्वालियर ने संतो का पूजन किया। सुमन शास्त्री, अंचल शास्त्री आदि मौजूद रहे। भागवत पीठ में अलग-अलग भाषाओं में छह भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में अनेक प्रांतों से श्रद्धालु शुकतीर्थ पहुंचे हैं।
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