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पेंट्री कार बोगी खाली होने पर मिली राहत
Updated Mon, 21 Aug 2017 01:08 AM IST
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पेंट्री कार बोगी खाली होने पर मिली राहत
खतौली (मुजफ्फरनगर)। क्षतिग्रस्त हो चुके रसोईयान में लोगों को 24 घंटे तक यही भ्रम बना रहा कि इसमें कई लाशें मिल सकती हैं। रेलवे कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद पावर वैगन से 24 घंटे बाद रसोईयान को उठाकर सीधा किया तो, उसमें एक भी शव नहीं मिल सका। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक रसोईयान की जांच पड़ताल करने पर उसमें मात्र दो रसोई गैस के सिलेंडर ही मिले। गनीमत यह रही कि हादसे के दौरान गैस सिलेंडर नहीं फटे।
शनिवार शाम 5.47 मिनट के करीब हुए उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में एक ही झटके में तीन-चार कोच रसोईयान पर चढ़ गए थे। जिससे रसोईयान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। हादसे के बाद से ही मौके पर सैकड़ों की संख्या में यात्रियों के बचाव कार्य में लगे लोगों में भ्रम पैदा हो गया था कि रसोईयान में मौजूद लोगों की जान नहीं बची होगी। यहां तक कि लोग रसोईयान तक में घुसने तक का रास्ता नहीं बना सके थे। इसलिए लोगों का भ्रम विश्वास में बदलने लगा था। रविवार को भी लोगों की भीड़ जस की तस मौके पर एकत्र थी। लगातार 24 घंटे तक लोग रसाईयान पर ही ध्यान लगाए हुए थे कि इसमें कितने शव मिलेंगे। रेलवे कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद 24 घंटे बाद क्रेन से पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके रसोईयान को उठाया तो उसमें एक भी शव नहीं मिल सका। शव न मिलने से अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली।
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। क्षतिग्रस्त हो चुके रसोईयान में लोगों को 24 घंटे तक यही भ्रम बना रहा कि इसमें कई लाशें मिल सकती हैं। रेलवे कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद पावर वैगन से 24 घंटे बाद रसोईयान को उठाकर सीधा किया तो, उसमें एक भी शव नहीं मिल सका। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक रसोईयान की जांच पड़ताल करने पर उसमें मात्र दो रसोई गैस के सिलेंडर ही मिले। गनीमत यह रही कि हादसे के दौरान गैस सिलेंडर नहीं फटे।
शनिवार शाम 5.47 मिनट के करीब हुए उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे में एक ही झटके में तीन-चार कोच रसोईयान पर चढ़ गए थे। जिससे रसोईयान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। हादसे के बाद से ही मौके पर सैकड़ों की संख्या में यात्रियों के बचाव कार्य में लगे लोगों में भ्रम पैदा हो गया था कि रसोईयान में मौजूद लोगों की जान नहीं बची होगी। यहां तक कि लोग रसोईयान तक में घुसने तक का रास्ता नहीं बना सके थे। इसलिए लोगों का भ्रम विश्वास में बदलने लगा था। रविवार को भी लोगों की भीड़ जस की तस मौके पर एकत्र थी। लगातार 24 घंटे तक लोग रसाईयान पर ही ध्यान लगाए हुए थे कि इसमें कितने शव मिलेंगे। रेलवे कर्मचारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद 24 घंटे बाद क्रेन से पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके रसोईयान को उठाया तो उसमें एक भी शव नहीं मिल सका। शव न मिलने से अधिकारियों ने भी राहत की सांस ली।
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