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मूक बघिर बच्चों की जिंदगी को मिला हौसला
Updated Thu, 26 Jul 2018 01:04 AM IST
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आशादीप बाल प्रशिक्षण संस्थान की पहल लाई रंग
मुजफ्फरनगर। आशादीप बाल प्रशिक्षण संस्थान ने दिव्यांग बच्चों के जीवन में नई आशाएं जगा रखी है। ढाई दशक पहले रिटायर इंजीनियर मगनलाल गर्ग ने यह सार्थक पहल की थी। पांच बच्चों से प्रारंभ की गई संस्था में अब 83 दिव्यांग छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
जानसठ रोड स्थित विष्णु विहार में संचालित आशादीप बाल प्रशिक्षण संस्थान जिले की एक ऐसी संस्था है, जिसने दिव्यांग बच्चों की जिंदगी में उम्मीदों का हौसला भर दिया है। वर्ष 1994 में यह संस्था नई मंडी की बड़ी धर्मशाला के एक कमरे में शुरू की गई। सेवानिवृत्ति के बाद इंजीनियर मगनलाल गर्ग ने समाज की सेवा का मन बनाया। उनके दामाद डॉ अरुण गोयल ने उन्हें दिव्यांग बच्चों के लिए कार्य करने का सुझाव दिया। 11 सदस्यों की समिति बना कर यह कदम आगे बढ़ाया गया। नि:स्वार्थ भाव से किया गया प्रयास रंग लाया। लंबे समय तक यह संस्था सरकुलर पर एक भवन में संचालित की गई। समाजसेवी मूलचंद सराफ आदि के सहयोग से विष्णु विहार में करीब 1900 वर्ग गज में संस्थान का स्थायी भवन बनाया गया। फिलहाल संस्थान में दिव्यांग 83 छात्र-छात्राएं हैं। संस्था अध्यक्ष वेदप्रकाश सिंहल बताते हैं कि रिटायरमेंट के बाद समय के सदुपयोग के लिए यह पहल की गई थी, जिसका श्रेय स्वर्गीय मगनलाल गर्ग को है। प्रधानाचार्य ब्रजमोहन शर्मा कहते हैं कि एलकेजी से कक्षा पांच तक की शिक्षा दी जा रही है।
सेवा से मिलता है मन को शांति : सिंहल
मुजफ्फरनगर। संस्था अध्यक्ष वेदप्रकाश सिंहल बताते है कि रिटायरमेंट के बाद समय के सदुपयोग के लिए यह पहल की गई थी, जिसका श्रेय स्वर्गीय मगनलाल गर्ग को है। दिव्यांग बच्चों के जीवन में निखार आया है। दिव्यांग बच्चों को संभालने का हौसला आवश्यक है, ताकि उन्हें बेहतर जीवन जीने का मौका मिले। यह सार्थक प्रयास मन को शांति देता है।
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मुजफ्फरनगर। आशादीप बाल प्रशिक्षण संस्थान ने दिव्यांग बच्चों के जीवन में नई आशाएं जगा रखी है। ढाई दशक पहले रिटायर इंजीनियर मगनलाल गर्ग ने यह सार्थक पहल की थी। पांच बच्चों से प्रारंभ की गई संस्था में अब 83 दिव्यांग छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
जानसठ रोड स्थित विष्णु विहार में संचालित आशादीप बाल प्रशिक्षण संस्थान जिले की एक ऐसी संस्था है, जिसने दिव्यांग बच्चों की जिंदगी में उम्मीदों का हौसला भर दिया है। वर्ष 1994 में यह संस्था नई मंडी की बड़ी धर्मशाला के एक कमरे में शुरू की गई। सेवानिवृत्ति के बाद इंजीनियर मगनलाल गर्ग ने समाज की सेवा का मन बनाया। उनके दामाद डॉ अरुण गोयल ने उन्हें दिव्यांग बच्चों के लिए कार्य करने का सुझाव दिया। 11 सदस्यों की समिति बना कर यह कदम आगे बढ़ाया गया। नि:स्वार्थ भाव से किया गया प्रयास रंग लाया। लंबे समय तक यह संस्था सरकुलर पर एक भवन में संचालित की गई। समाजसेवी मूलचंद सराफ आदि के सहयोग से विष्णु विहार में करीब 1900 वर्ग गज में संस्थान का स्थायी भवन बनाया गया। फिलहाल संस्थान में दिव्यांग 83 छात्र-छात्राएं हैं। संस्था अध्यक्ष वेदप्रकाश सिंहल बताते हैं कि रिटायरमेंट के बाद समय के सदुपयोग के लिए यह पहल की गई थी, जिसका श्रेय स्वर्गीय मगनलाल गर्ग को है। प्रधानाचार्य ब्रजमोहन शर्मा कहते हैं कि एलकेजी से कक्षा पांच तक की शिक्षा दी जा रही है।
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सेवा से मिलता है मन को शांति : सिंहल
मुजफ्फरनगर। संस्था अध्यक्ष वेदप्रकाश सिंहल बताते है कि रिटायरमेंट के बाद समय के सदुपयोग के लिए यह पहल की गई थी, जिसका श्रेय स्वर्गीय मगनलाल गर्ग को है। दिव्यांग बच्चों के जीवन में निखार आया है। दिव्यांग बच्चों को संभालने का हौसला आवश्यक है, ताकि उन्हें बेहतर जीवन जीने का मौका मिले। यह सार्थक प्रयास मन को शांति देता है।
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