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कारों से क्रैश गार्ड हटाने में लापरवाही
Updated Tue, 23 Jan 2018 12:57 AM IST
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क्रैश गार्ड नहीं खुलने देता है वाहनों में बैलून
मुजफ्फरनगर। लग्जरी कार के आगे क्रैश गार्ड लगाने के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके लिए है। यह जितना कार की शोभा, सुरक्षा बढ़ाने में कारगर है, उतना ही आपकी जान के लिए घातक भी है। दरअसल, कारों के आगे लगे क्रैश गार्ड अनहोनी को अधिक बढ़ा सकते हैं। यह दुर्घटनाग्रस्त वाहनों का बैलून नहीं खुलने देेते हैं। इससे कार को नुकसान होने के साथ जान हानि भी है। हालांकि आदेश मिलने के बाद भी एआरटीओ अफसर लापरवाह बने हैं।
ऑटो मोबाइल कंपनियां अत्याधुनिक तरीके से वाहनों का विकसित कर रही हैं, जिनमें चालक के साथ उसमें सवार होने वाले लोगों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। अधिकांश लग्जरी कारों में ड्राइविंग सीट के डेसबोर्ड में बैलून फिट है। यह बैलून इंजन के आगे लगे बंफर के सेंसर से ज्वाइंट होता है। ऐसे में कार के टकराने या उसमें टक्कर लगने पर तत्काल सेंसर एक्टिव होता है, जो सीधे रूप में अलगे हिस्से में फिट बैलून को खोल देता है। ऐसे में अनहोनी के समय काफी हद तक चालक और वाहन में सवार की जान बचाई जा सकती है। इसके चलते क्रैश गार्ड को केंद्र सरकार ने काफी नुकसानदायक माना है। इसके चलते राज्य सरकारों को अलर्ट किया है। प्रदेश सरकार ने एआरटीओ को इस बाबत कार्रवाई के आदेश दिए हैं। अब लापरवाही का नमूना देखिए एआरटीओ विभाग ने आदेश को फाइलों में दबाकर रख दिया है। इस पर कार्रवाई के बजाए वाहनों का आंकड़ा एकत्र किया जा रहा है।
अभियान चलाकर होगी जांच
मुजफ्फरनगर। एआरटीओ प्रशासन राजीव कुमार बंसल ने बताया कि क्रैश गार्ड को लेकर आदेश मिले हैं। इसके लिए जिले के प्रमुख चौराहों पर अभियान चलाकर क्रैश गार्ड लगी कारों, गाड़ियों का चालान किया जाएगा। साथ ही क्रैश गार्ड को अधिकारियों की मौजूदगी में ही कटर से कटवा कर निकलवाया जाएगा।
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जिले में बोलेरो-स्कॉर्पियों से अधिक
मुजफ्फरनगर। जिले में स्कॉर्पियों और बोलेरो की संख्या अधिक है। इनकी संख्या चार हजार से अधिक है। सबसे पहले विभाग इनकी ही जांच करेगा। क्योंकि इन्हीं वाहनों पर अधिकांश क्रैश गार्ड लगा देखा गया है।
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मुजफ्फरनगर। लग्जरी कार के आगे क्रैश गार्ड लगाने के शौकीन हैं, तो यह खबर आपके लिए है। यह जितना कार की शोभा, सुरक्षा बढ़ाने में कारगर है, उतना ही आपकी जान के लिए घातक भी है। दरअसल, कारों के आगे लगे क्रैश गार्ड अनहोनी को अधिक बढ़ा सकते हैं। यह दुर्घटनाग्रस्त वाहनों का बैलून नहीं खुलने देेते हैं। इससे कार को नुकसान होने के साथ जान हानि भी है। हालांकि आदेश मिलने के बाद भी एआरटीओ अफसर लापरवाह बने हैं।
ऑटो मोबाइल कंपनियां अत्याधुनिक तरीके से वाहनों का विकसित कर रही हैं, जिनमें चालक के साथ उसमें सवार होने वाले लोगों की सुरक्षा पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है। अधिकांश लग्जरी कारों में ड्राइविंग सीट के डेसबोर्ड में बैलून फिट है। यह बैलून इंजन के आगे लगे बंफर के सेंसर से ज्वाइंट होता है। ऐसे में कार के टकराने या उसमें टक्कर लगने पर तत्काल सेंसर एक्टिव होता है, जो सीधे रूप में अलगे हिस्से में फिट बैलून को खोल देता है। ऐसे में अनहोनी के समय काफी हद तक चालक और वाहन में सवार की जान बचाई जा सकती है। इसके चलते क्रैश गार्ड को केंद्र सरकार ने काफी नुकसानदायक माना है। इसके चलते राज्य सरकारों को अलर्ट किया है। प्रदेश सरकार ने एआरटीओ को इस बाबत कार्रवाई के आदेश दिए हैं। अब लापरवाही का नमूना देखिए एआरटीओ विभाग ने आदेश को फाइलों में दबाकर रख दिया है। इस पर कार्रवाई के बजाए वाहनों का आंकड़ा एकत्र किया जा रहा है।
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अभियान चलाकर होगी जांच
मुजफ्फरनगर। एआरटीओ प्रशासन राजीव कुमार बंसल ने बताया कि क्रैश गार्ड को लेकर आदेश मिले हैं। इसके लिए जिले के प्रमुख चौराहों पर अभियान चलाकर क्रैश गार्ड लगी कारों, गाड़ियों का चालान किया जाएगा। साथ ही क्रैश गार्ड को अधिकारियों की मौजूदगी में ही कटर से कटवा कर निकलवाया जाएगा।
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जिले में बोलेरो-स्कॉर्पियों से अधिक
मुजफ्फरनगर। जिले में स्कॉर्पियों और बोलेरो की संख्या अधिक है। इनकी संख्या चार हजार से अधिक है। सबसे पहले विभाग इनकी ही जांच करेगा। क्योंकि इन्हीं वाहनों पर अधिकांश क्रैश गार्ड लगा देखा गया है।