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सच्ची आराधना से आत्मिक,
Updated Tue, 23 Jan 2018 12:57 AM IST
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सच्ची आराधना से चेतना का संचार होता है : ओमानंद
मोरना। वसंत पंचमी पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में शुकदेव पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि मां सरस्वती की आराधना से मन, बुद्धि, हृदय, अंत:करण समस्त वातावरण पवित्र हो जाता है। सच्ची आराधना से आत्मिक चेतना का संचार और ज्ञान के दीप प्रज्वलित हो जाते हैं। इस मौके पर विद्यार्थियों ने घंटे घड़ियालों की मधुर आवाज के बीच उच्च स्वर में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा संपन्न कराई।
आस्था की नगरी शुक्रताल के शुकदेव आश्रम के शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय में वसंत पंचमी उत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी ओमानंद महाराज ने मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य ही नहीं देव, गंर्धव, किन्नर, सुर, असुर, ऋषि, मुनि, मां बांग देवी की आराधना कर मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। मां की आराधना कवच का मानव जीवन में बड़ा महत्व है। इसको करने से सिद्धि की प्राप्ति और ज्ञान का वरदान मिलता है। इस मौके पर आचार्य ज्ञानदास, आचार्य उत्तप्रती, आचार्य श्याम शास्त्री, अचल शास्त्री, युवराज शास्त्री, सुमन शास्त्री, आचार्य कृष्ण शास्त्री आदि ने मुख्य भुमिका निभाई। वहीं, विद्यालय के सौरभ, आकाश, विनय, देवराज, अर्जुन, रोहित, कार्तिक, विकास, प्रिंस, विशाल, नीश,ु अर्पित, काशीनाथ, जयदेव, सुरजीत लालमण्डी, ब्रजमोहन, हिमाशु, अमन, दीपांश, सुधांशु, शगुन, राजीव, विकास आदि विद्यर्थियों ने भाग लिया।
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मोरना। वसंत पंचमी पर्व पर आयोजित कार्यक्रम में शुकदेव पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि मां सरस्वती की आराधना से मन, बुद्धि, हृदय, अंत:करण समस्त वातावरण पवित्र हो जाता है। सच्ची आराधना से आत्मिक चेतना का संचार और ज्ञान के दीप प्रज्वलित हो जाते हैं। इस मौके पर विद्यार्थियों ने घंटे घड़ियालों की मधुर आवाज के बीच उच्च स्वर में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पूजा संपन्न कराई।
आस्था की नगरी शुक्रताल के शुकदेव आश्रम के शुकदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय में वसंत पंचमी उत्सव कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी ओमानंद महाराज ने मां सरस्वती की पूजा अर्चना कर किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य ही नहीं देव, गंर्धव, किन्नर, सुर, असुर, ऋषि, मुनि, मां बांग देवी की आराधना कर मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। मां की आराधना कवच का मानव जीवन में बड़ा महत्व है। इसको करने से सिद्धि की प्राप्ति और ज्ञान का वरदान मिलता है। इस मौके पर आचार्य ज्ञानदास, आचार्य उत्तप्रती, आचार्य श्याम शास्त्री, अचल शास्त्री, युवराज शास्त्री, सुमन शास्त्री, आचार्य कृष्ण शास्त्री आदि ने मुख्य भुमिका निभाई। वहीं, विद्यालय के सौरभ, आकाश, विनय, देवराज, अर्जुन, रोहित, कार्तिक, विकास, प्रिंस, विशाल, नीश,ु अर्पित, काशीनाथ, जयदेव, सुरजीत लालमण्डी, ब्रजमोहन, हिमाशु, अमन, दीपांश, सुधांशु, शगुन, राजीव, विकास आदि विद्यर्थियों ने भाग लिया।
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