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सिद्ध चक्र महामंडल विधान का आयोजन
Updated Fri, 03 Nov 2017 12:30 AM IST
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श्रीजी का अभिषेक किया
खतौली (मुजफ्फरनगर)।
शांतिनाथ जैन मंदिर में अष्टानिका के पावन अवसर पर परम पूज्य अंतसमती माता जी के पावन सानिध्य में सिद्ध चक्र महामंडल विधान का आयोजन किया गया। धार्मिक आयोजन में काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने बृहस्पतिवार की सुबह पीत वस्त्रों में श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा व पूजन किया।
धर्म सभा में पूज्य अंतसमती माता जी ने बताया कि मानव को अपने जीवन में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र को धारण करना चाहिए, जिससे उसे सदमार्ग की सहज उपलब्धि हो सके। सच्चे परमात्मा के प्रति दृढ़ आस्था ही सम्यक दर्शन है और सच्चे देव शास्त्र व गुरु पर श्रद्धा ही सम्यक दृष्टि की सच्ची उपलब्धि है। भव्यात्मा के भाव सर्व कल्याणकारी होते हैं। मानवता और नैतिकता ही सम्यक दर्शन का व्यावहारिक पक्ष है। इस अवसर पर सुरेंद्र, मनोज टोनी, बल्लू, प्रमोद, प्रवीण नयन, बोबी, अजय, आकांक्षा, तरुणा, गीता, राजरानी, संध्या, स्नेह, अलका, दिनेश, वंदना, सुधा, ममता, मीनू, उमा, सोनी, प्रज्ञा, सर्वेश, दिनेश, दीपाली, शिखा, सुनीता, सुषमा, सतीश, सुशील, श्रीपाल आदि उपस्थित रहे।
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खतौली (मुजफ्फरनगर)।
शांतिनाथ जैन मंदिर में अष्टानिका के पावन अवसर पर परम पूज्य अंतसमती माता जी के पावन सानिध्य में सिद्ध चक्र महामंडल विधान का आयोजन किया गया। धार्मिक आयोजन में काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने बृहस्पतिवार की सुबह पीत वस्त्रों में श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा व पूजन किया।
धर्म सभा में पूज्य अंतसमती माता जी ने बताया कि मानव को अपने जीवन में सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र को धारण करना चाहिए, जिससे उसे सदमार्ग की सहज उपलब्धि हो सके। सच्चे परमात्मा के प्रति दृढ़ आस्था ही सम्यक दर्शन है और सच्चे देव शास्त्र व गुरु पर श्रद्धा ही सम्यक दृष्टि की सच्ची उपलब्धि है। भव्यात्मा के भाव सर्व कल्याणकारी होते हैं। मानवता और नैतिकता ही सम्यक दर्शन का व्यावहारिक पक्ष है। इस अवसर पर सुरेंद्र, मनोज टोनी, बल्लू, प्रमोद, प्रवीण नयन, बोबी, अजय, आकांक्षा, तरुणा, गीता, राजरानी, संध्या, स्नेह, अलका, दिनेश, वंदना, सुधा, ममता, मीनू, उमा, सोनी, प्रज्ञा, सर्वेश, दिनेश, दीपाली, शिखा, सुनीता, सुषमा, सतीश, सुशील, श्रीपाल आदि उपस्थित रहे।
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