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कैंसर से दो महिलाओं की मौत, गांव में हड़कंप
Updated Mon, 15 Jan 2018 01:09 AM IST
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सिखेड़ा (मुजफ्फरनगर)। गांव निराना में कैंसर से दो महिलाओं की मौत होने से हड़कंप मच गया। मृतक दोनों महिलाओं का गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। गांव में यह बीमारी दूषित पानी फैलने से बताई गई है। गांव में अभी भी एक दर्जन से अधिक लोग कैंसर से पीड़ित है। इसको लेकर ग्रामीणों में स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ आक्रोश है।
निराना गांव में कैंसर बीमारी ने पैर पसार लिए हैं। यह बीमारी कई साल से ग्रामीणों को घेरे हुए है। सोहनलाल की पत्नी कांति देवी कई वर्ष से बीमारी से जूझ रही थी। एक साल पहले जांच कराई तो डॉक्टरों ने कैंसर होना बताया, तब से दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में उपचार चल रहा था। कांति के पेट में कैंसर था। शनिवार देर रात को उनकी की मृत्यु हो गई। इसी गांव में महमूद की पत्नी छोटी भी कैंसर पीड़ित थी। छोटी को कई वर्ष से गले का कैंसर था, जो चंडीगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती थी। छोटी की भी शनिवार को मौत हो गई। गांव में दो महिलाओं की मौत होने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। दोनों मृतकों के परिवारों में शोक छा गया। दोनों महिलाओं का धार्मिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उधर, गांव में कैंसर की बीमारी फैलने से ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ आक्रोश प्रकट किया है। पानी से फैलने कैंसर की चपेट में लक्ष्मी, सलीम, वर्षा, पन्नू, अरविंद, मुमताज, रोहताश, प्रेमा, आकिल समेत एक दर्जन लोग पीड़ित है। मामले को लेकर गांव के प्राथमिक विद्यालय में पंचायत की गई, जिसमें कई गांवों के लोगों ने भाग लेकर गांव में फैल रही बीमारी को खत्म करने के लिए सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की मांग की रखी गई। इस मौके पर ग्रामीणों ने जिला पंचायत पुष्पांकर पाल, ग्राम प्रधान इश्तकार, मोहम्मद इकराम, प्रवेश पाल, इनाम, डॉ इकराम, मरगूब, अहबाब अहमद, धर्मेंद्र, मुशब्बिर आदि लोगों की संघर्ष कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी गांव की आवाज को देश-प्रदेश सरकार के साथ प्रशासन तक पहुंचाएगी। ताकि कैंसर जैसी बीमारियों से मुक्ति मिल सके।
पानी और लोगों की जांच की मांग
मुजफ्फरनगर। ग्रामीणों ने गांव में कैंप लगाकर जांच-पड़ताल कराए जाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जानसठ रोड की कुछ फैक्ट्रियों से गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी गांव के भू-गर्भ में मिल रहा है, जिसके चलते ग्रामीण बीमार पड़ रहे हैं। इन फैक्ट्रियों पर शिकंजा कसने के साथ पानी की जांच, पीड़ितों के लिए राहत कैंप लगाए जाने की प्रशासन से मांग की गई है। उधर, सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा का कहना है कि उनके संज्ञान में इसकी जानकारी नहीं है. जो गांव में टीम भेज कर जांच कराएंगे।
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निराना गांव में कैंसर बीमारी ने पैर पसार लिए हैं। यह बीमारी कई साल से ग्रामीणों को घेरे हुए है। सोहनलाल की पत्नी कांति देवी कई वर्ष से बीमारी से जूझ रही थी। एक साल पहले जांच कराई तो डॉक्टरों ने कैंसर होना बताया, तब से दिल्ली के जीटीबी अस्पताल में उपचार चल रहा था। कांति के पेट में कैंसर था। शनिवार देर रात को उनकी की मृत्यु हो गई। इसी गांव में महमूद की पत्नी छोटी भी कैंसर पीड़ित थी। छोटी को कई वर्ष से गले का कैंसर था, जो चंडीगढ़ के एक अस्पताल में भर्ती थी। छोटी की भी शनिवार को मौत हो गई। गांव में दो महिलाओं की मौत होने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। दोनों मृतकों के परिवारों में शोक छा गया। दोनों महिलाओं का धार्मिक रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उधर, गांव में कैंसर की बीमारी फैलने से ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के खिलाफ आक्रोश प्रकट किया है। पानी से फैलने कैंसर की चपेट में लक्ष्मी, सलीम, वर्षा, पन्नू, अरविंद, मुमताज, रोहताश, प्रेमा, आकिल समेत एक दर्जन लोग पीड़ित है। मामले को लेकर गांव के प्राथमिक विद्यालय में पंचायत की गई, जिसमें कई गांवों के लोगों ने भाग लेकर गांव में फैल रही बीमारी को खत्म करने के लिए सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने की मांग की रखी गई। इस मौके पर ग्रामीणों ने जिला पंचायत पुष्पांकर पाल, ग्राम प्रधान इश्तकार, मोहम्मद इकराम, प्रवेश पाल, इनाम, डॉ इकराम, मरगूब, अहबाब अहमद, धर्मेंद्र, मुशब्बिर आदि लोगों की संघर्ष कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी गांव की आवाज को देश-प्रदेश सरकार के साथ प्रशासन तक पहुंचाएगी। ताकि कैंसर जैसी बीमारियों से मुक्ति मिल सके।
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पानी और लोगों की जांच की मांग
मुजफ्फरनगर। ग्रामीणों ने गांव में कैंप लगाकर जांच-पड़ताल कराए जाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जानसठ रोड की कुछ फैक्ट्रियों से गंदा पानी छोड़ा जा रहा है। यह पानी गांव के भू-गर्भ में मिल रहा है, जिसके चलते ग्रामीण बीमार पड़ रहे हैं। इन फैक्ट्रियों पर शिकंजा कसने के साथ पानी की जांच, पीड़ितों के लिए राहत कैंप लगाए जाने की प्रशासन से मांग की गई है। उधर, सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा का कहना है कि उनके संज्ञान में इसकी जानकारी नहीं है. जो गांव में टीम भेज कर जांच कराएंगे।
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