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गुरुकुल शिक्षा से होगा भारत का नव निर्माण
Updated Mon, 15 Jan 2018 12:53 AM IST
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गुरुकुल शिक्षा से होगा देश का नवनिर्माण
चरथावल। गुरुकुल वैदिक साधना संस्कृत विद्या आश्रम के अधिष्ठाता आचार्य दयादेव ने कहा कि भारत के नवनिर्माण के लिए गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुन: स्थापित करना होगा। वेद विद्या, यज्ञ, योग, धनुर्वेद, आयुर्वेद एवं अष्टशास्त्र आदि ऋषियों का ज्ञान राष्ट्र की नव पीढ़ी को दिया जाना चाहिए।
रोहना रोड स्थित गुरुकुल में मकर संक्रांति पर आयोजित वेद गोष्ठी में आचार्य दयादेव का संस्कार चेतना अभियान के संयोजक गुरुदत्त आर्य ने अंगवस्त्र, सम्मान राशि भेंट कर अभिनंदन किया। गोष्ठी में आचार्य दयादेव ने कहा कि भारत की गरिमा, मूल्यों और सभ्यता की रक्षा को वैदिक संस्कृति की ओर लौटे। परमात्मा ने मानवीय दृष्टि से मनुष्यों के कल्याण के लिए वेदों का ज्ञान दिया। प्राचीन काल में वैदिक गुरुकुल विधा का मूल सोत्र थे। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक ज्ञान की उपेक्षा से ही समाज में अंधविश्वास, पाखंड, ढोंग बढ़ा है। युवाओं का चरित्र निर्माण गुरुकुलों में ही संभव है। शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को सदाचारी, चरित्रवान, संस्कारवान, ज्ञानवान, देशभक्त और गुणवान बनाना है। गुरुकुलों में ही योगीराज श्रीकृष्ण, श्रीराम, राजा मान्धाता, सीता माता, शकुंतला, गार्गी आदि ने ज्ञान प्राप्त किया। आरपी शर्मा , आचार्य सुरेंद्र, बह्मचारी अनुज, दीपक, वानप्रस्थी उसर बुद्ध, नरेश कुमार आर्य ने विचार व्यक्त किए।
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चरथावल। गुरुकुल वैदिक साधना संस्कृत विद्या आश्रम के अधिष्ठाता आचार्य दयादेव ने कहा कि भारत के नवनिर्माण के लिए गुरुकुल शिक्षा पद्धति को पुन: स्थापित करना होगा। वेद विद्या, यज्ञ, योग, धनुर्वेद, आयुर्वेद एवं अष्टशास्त्र आदि ऋषियों का ज्ञान राष्ट्र की नव पीढ़ी को दिया जाना चाहिए।
रोहना रोड स्थित गुरुकुल में मकर संक्रांति पर आयोजित वेद गोष्ठी में आचार्य दयादेव का संस्कार चेतना अभियान के संयोजक गुरुदत्त आर्य ने अंगवस्त्र, सम्मान राशि भेंट कर अभिनंदन किया। गोष्ठी में आचार्य दयादेव ने कहा कि भारत की गरिमा, मूल्यों और सभ्यता की रक्षा को वैदिक संस्कृति की ओर लौटे। परमात्मा ने मानवीय दृष्टि से मनुष्यों के कल्याण के लिए वेदों का ज्ञान दिया। प्राचीन काल में वैदिक गुरुकुल विधा का मूल सोत्र थे। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक ज्ञान की उपेक्षा से ही समाज में अंधविश्वास, पाखंड, ढोंग बढ़ा है। युवाओं का चरित्र निर्माण गुरुकुलों में ही संभव है। शिक्षा का उद्देश्य बच्चों को सदाचारी, चरित्रवान, संस्कारवान, ज्ञानवान, देशभक्त और गुणवान बनाना है। गुरुकुलों में ही योगीराज श्रीकृष्ण, श्रीराम, राजा मान्धाता, सीता माता, शकुंतला, गार्गी आदि ने ज्ञान प्राप्त किया। आरपी शर्मा , आचार्य सुरेंद्र, बह्मचारी अनुज, दीपक, वानप्रस्थी उसर बुद्ध, नरेश कुमार आर्य ने विचार व्यक्त किए।
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