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हमें कृषि समाज में जागरुकता लानी होगी-सोलंकी
Updated Thu, 29 Nov 2018 11:49 PM IST
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हमें कृषि समाज में जागरूकता लानी होगी : सोलंकी
मोरना। किसान सेवा सहकारी समिति ककरौली में आयोजित वार्षिक बैठक में पूर्व कृषि जिला अधिकारी वेद सिंह सोलंकी ने कहा कि खेती में अधिक पैदावार के लिए अत्यधिक पेस्टीसाइड डालने से बुखार, लकवा, हार्टअटैक और कैंसर जैसी घातक बीमारियों से हर वर्ष लाखों लोगों की मौत चुकी है, जिसको रोकने के लिए हमें कृषि समाज में जागरूकता लानी होगी। वरना आने वाले नस्लें हमें कभी माफ नहीं कर पाएगी। फसल चक्र अपनाकर खेती की जमीन को आराम दें, तो लागत कम होने से फसलों में अधिक मुनाफा होगा।
उन्होंने कहा कि 70 प्रतिशत खेती की जमीन में बीमारी छिपी हुई है, जिसको हम ऋतुकाल व ग्रीष्मकाल में खेतों की जुताई कर पाटा चलाएं, ताकि जमीन के अंदर छिपे बीमारी के कीड़े बाहर आकर समाप्त हो जाए। खरपतवार को खत्म करने के लिए गहरी जुताई करें। दलहन फसलों के साथ जड़ों वाली अधिक फसलों की बुआई करने से उर्वरा शक्ति में स्वत: ही बढ़ोतरी होती हैं। फल और फूलों की खेती को अपनाएं। हरित क्रांति से हमारा समाज का विकास हुआ, लेकिन जमीन की उपजाऊ ताकत घटी है। इस मौके पर समिति सचिव धीर सिंह पुंडीर ने बताया कि वर्ष 17-2018 को समिति के द्वारा 5 करोड़ 5 लाख 60 हजार का ऋण किसानों के बीच वितरित किया गया, जिसके द्वारा समिति को 6 लाख 71 हजार का शुद्ध लाभ हुआ। अध्यक्षता प्रहलाद सिंह और संचालन नवाब सिंह ने किया। चेयरमैन सुरेशना देवी, गोकल चंद, मंागेराम, रणबीर सिंह, जयचंद, सौरभ, सत्यपाल, रविंद्र बेनीवाल, प्रधान प्रकाशवीर सिंह, रविंद्र चौधरी, अजीत सिंह, बाबूराम प्रधान, गुड्डू, सतीश चेयरमैन आदि लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में श्यामलाल, अंकित, रामगोपाल, राजेश प्रबंधक, राम शिरोमणि, रवि बालियान आदि ने मुख्य भूमिका निभाई।
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मोरना। किसान सेवा सहकारी समिति ककरौली में आयोजित वार्षिक बैठक में पूर्व कृषि जिला अधिकारी वेद सिंह सोलंकी ने कहा कि खेती में अधिक पैदावार के लिए अत्यधिक पेस्टीसाइड डालने से बुखार, लकवा, हार्टअटैक और कैंसर जैसी घातक बीमारियों से हर वर्ष लाखों लोगों की मौत चुकी है, जिसको रोकने के लिए हमें कृषि समाज में जागरूकता लानी होगी। वरना आने वाले नस्लें हमें कभी माफ नहीं कर पाएगी। फसल चक्र अपनाकर खेती की जमीन को आराम दें, तो लागत कम होने से फसलों में अधिक मुनाफा होगा।
उन्होंने कहा कि 70 प्रतिशत खेती की जमीन में बीमारी छिपी हुई है, जिसको हम ऋतुकाल व ग्रीष्मकाल में खेतों की जुताई कर पाटा चलाएं, ताकि जमीन के अंदर छिपे बीमारी के कीड़े बाहर आकर समाप्त हो जाए। खरपतवार को खत्म करने के लिए गहरी जुताई करें। दलहन फसलों के साथ जड़ों वाली अधिक फसलों की बुआई करने से उर्वरा शक्ति में स्वत: ही बढ़ोतरी होती हैं। फल और फूलों की खेती को अपनाएं। हरित क्रांति से हमारा समाज का विकास हुआ, लेकिन जमीन की उपजाऊ ताकत घटी है। इस मौके पर समिति सचिव धीर सिंह पुंडीर ने बताया कि वर्ष 17-2018 को समिति के द्वारा 5 करोड़ 5 लाख 60 हजार का ऋण किसानों के बीच वितरित किया गया, जिसके द्वारा समिति को 6 लाख 71 हजार का शुद्ध लाभ हुआ। अध्यक्षता प्रहलाद सिंह और संचालन नवाब सिंह ने किया। चेयरमैन सुरेशना देवी, गोकल चंद, मंागेराम, रणबीर सिंह, जयचंद, सौरभ, सत्यपाल, रविंद्र बेनीवाल, प्रधान प्रकाशवीर सिंह, रविंद्र चौधरी, अजीत सिंह, बाबूराम प्रधान, गुड्डू, सतीश चेयरमैन आदि लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम के आयोजन में श्यामलाल, अंकित, रामगोपाल, राजेश प्रबंधक, राम शिरोमणि, रवि बालियान आदि ने मुख्य भूमिका निभाई।
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