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जीवन में मार्दव धर्म ही महत्वपूर्ण है
Updated Sun, 16 Sep 2018 12:08 AM IST
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खतौली। जैन समाज की ओर से दशलक्षण पर्व के दूसरे उत्तम मार्दव धर्म के रुप में मनाया गया। इस अवसर पर सभी नौ जैन मंदिरों में सुबह धार्मिक मंत्रोच्चार के साथ पीत वस्त्रों में श्रद्धालुओं ने पवित्र मंत्रोच्चार के साथ अर्घ्य समर्पित करते हुए जिनेंद्र भगवान का अभिषेक, पूजन व शांतिधारा की गई। श्रद्धालुओं ने प्रभु भक्ति में भाव विभोर होकर नृत्य किए।
पीसनोपाड़ा जैन मंदिर में श्रद्धालुओं को एलाचार्य क्षमाभूषण महाराज ने कहा कि जीवन में मार्दव धर्म का अत्यंत महत्व है। वस्तु स्वरुप के बोध से ही आंखों में कोमलता आती है। मैं और मेरापन के भाव का विसर्जन ही मार्दव धर्म की सम्यक सीढ़ी है। समाज व देश में शांति की स्थापना के लिए इस धर्म का अमूल्य योगदान है। मान व यश की भावना से किए गए सामाजिक कार्य व व्रत नियम निरर्थक है। मार्दव गुणधारी की प्रवृत्ति कभी अन्याय युक्त नहीं होती। ऐसे निर्मल मार्दव धर्म को धारण कर सच्चे सुख का अनुभव करें। पीसनोपाड़ा मंदिर में वीतराग विज्ञान पाठशाला के बच्चों ने तथा भागीरथ मंदिर में निग्रंथ पाठशाला के बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुति की।
जैन मंडी व जक्की वाला मंदिर में धर्म शंका समाधान व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। भागीरथी मंदिर में नेमि राजुल व णमोकार महामंत्र की महिमा पर भव्य प्रस्तुति दी गई। जिनेंद्र प्रभु की संगीतमयी भक्ति सुश्रावकों ने की। मौके पर रवि, सुशील, सुनील टीकरी, योगेंद्र पेंट, संजय महलका, अनिल सराफ, सतीश प्रवक्ता, जुगमंदर, जनारधन, मुकेश अंबर, अरुण नंगली, मुकुल, प्रमोद, सुभाष सराफ, नरेश, प्रमोद बर्तन, पोथी सराफ, शशांक, हितेश, अंकित, कल्पेंद्र, अजय प्रवक्ता, नीरज जैन प्रवक्ता, सपना, रुपाली, आदेश, बाला आदि मौजूद रहे।
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पीसनोपाड़ा जैन मंदिर में श्रद्धालुओं को एलाचार्य क्षमाभूषण महाराज ने कहा कि जीवन में मार्दव धर्म का अत्यंत महत्व है। वस्तु स्वरुप के बोध से ही आंखों में कोमलता आती है। मैं और मेरापन के भाव का विसर्जन ही मार्दव धर्म की सम्यक सीढ़ी है। समाज व देश में शांति की स्थापना के लिए इस धर्म का अमूल्य योगदान है। मान व यश की भावना से किए गए सामाजिक कार्य व व्रत नियम निरर्थक है। मार्दव गुणधारी की प्रवृत्ति कभी अन्याय युक्त नहीं होती। ऐसे निर्मल मार्दव धर्म को धारण कर सच्चे सुख का अनुभव करें। पीसनोपाड़ा मंदिर में वीतराग विज्ञान पाठशाला के बच्चों ने तथा भागीरथ मंदिर में निग्रंथ पाठशाला के बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुति की।
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जैन मंडी व जक्की वाला मंदिर में धर्म शंका समाधान व सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। भागीरथी मंदिर में नेमि राजुल व णमोकार महामंत्र की महिमा पर भव्य प्रस्तुति दी गई। जिनेंद्र प्रभु की संगीतमयी भक्ति सुश्रावकों ने की। मौके पर रवि, सुशील, सुनील टीकरी, योगेंद्र पेंट, संजय महलका, अनिल सराफ, सतीश प्रवक्ता, जुगमंदर, जनारधन, मुकेश अंबर, अरुण नंगली, मुकुल, प्रमोद, सुभाष सराफ, नरेश, प्रमोद बर्तन, पोथी सराफ, शशांक, हितेश, अंकित, कल्पेंद्र, अजय प्रवक्ता, नीरज जैन प्रवक्ता, सपना, रुपाली, आदेश, बाला आदि मौजूद रहे।
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