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सुखदेव जी 12 वर्ष मां के गर्भ में रहे
Updated Mon, 28 Aug 2017 12:44 AM IST
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प्रभु का स्मरण करते ही कष्ट हो जाएगा दूर
जानसठ (मुजफ्फरनगर)। श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक सत्यानंद महाराज ने कहा कि सुखदेव जी का जन्म भी एक रहस्य में है। उन्होंने कहा जब भगवान शिव ने पार्वती मां को अमर होने की कथा सुनाने लगे, तो पार्वती माता हुंकारे भरती हैं। कथावाचक ने कहा कि प्रभु का स्मरण करने से ही सभी कष्टों का निराकरण हो जाता है।
कथावाचक भगवान शिव ने देखा की एक तोता वहां बैठा है, जो हुंकारे भर रहा रहा था। भगवान शिव को क्रोध आ गया और बोले की तूने मेरी बिना आज्ञा के अमर कथा का पान किया है। मैं तुझे जीवित नहीं छोडूंगा। भगवान शिव त्रिशूल लेकर उसके पीछे दौड़े। शुक यानि तोता जान बचाने के लिए तीनों लोकों में भागता रहा। वह वेदव्यास जी के आश्रम पहुंचा। वहां पर वेदव्यास जी की पत्नी बाहर कपड़े सूखा रही थीं। उन्हें जभाई आ गई तो तोता सूक्ष्म बनकर उनकी पत्नी के मुख में घुस गया। वह उनके गर्भ में रह गया। भगवान शिव वहां आए और बोले कि मैं इस शुक को जीवित नहीं छोडूंगा। व्यास जी के पूछने पर सारी बात शिव ने बताई। व्यास जी बोले वह अब अमर हो चुका है आप उसे कैसे मार सकते हैं। आप दयावान हैं। आप उसे क्षमा कीजिए। व्यास जी के अनुरोध पर भगवान शिव का गुस्सा शांत हुआ। व्यास जी की पत्नी के गर्भ में शुकदेव जी को 12 वर्ष हो गए, लेकिन बाहर नहीं निकले। क्योंकि उन्हें डर था अगर मैं संसार में आया तो भगवान की माया के चपेट में आ जाऊंगा। कथा आयोजनकर्ताओं में ब्रजेश रस्तोगी, सुरेंद्र बंसल, मूलचंद सैनी, राकेश गोपाल सिंगल, गोपाल सैनी, पवन गुप्ता, राजा कर्णवाल, राजीव गुप्ता, राजपाल सैनी, प्रेम विजय सिंघल, महेश चंद शर्मा, सतीश खटीक, आदि शामिल रहे।
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सुशील
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जानसठ (मुजफ्फरनगर)। श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक सत्यानंद महाराज ने कहा कि सुखदेव जी का जन्म भी एक रहस्य में है। उन्होंने कहा जब भगवान शिव ने पार्वती मां को अमर होने की कथा सुनाने लगे, तो पार्वती माता हुंकारे भरती हैं। कथावाचक ने कहा कि प्रभु का स्मरण करने से ही सभी कष्टों का निराकरण हो जाता है।
कथावाचक भगवान शिव ने देखा की एक तोता वहां बैठा है, जो हुंकारे भर रहा रहा था। भगवान शिव को क्रोध आ गया और बोले की तूने मेरी बिना आज्ञा के अमर कथा का पान किया है। मैं तुझे जीवित नहीं छोडूंगा। भगवान शिव त्रिशूल लेकर उसके पीछे दौड़े। शुक यानि तोता जान बचाने के लिए तीनों लोकों में भागता रहा। वह वेदव्यास जी के आश्रम पहुंचा। वहां पर वेदव्यास जी की पत्नी बाहर कपड़े सूखा रही थीं। उन्हें जभाई आ गई तो तोता सूक्ष्म बनकर उनकी पत्नी के मुख में घुस गया। वह उनके गर्भ में रह गया। भगवान शिव वहां आए और बोले कि मैं इस शुक को जीवित नहीं छोडूंगा। व्यास जी के पूछने पर सारी बात शिव ने बताई। व्यास जी बोले वह अब अमर हो चुका है आप उसे कैसे मार सकते हैं। आप दयावान हैं। आप उसे क्षमा कीजिए। व्यास जी के अनुरोध पर भगवान शिव का गुस्सा शांत हुआ। व्यास जी की पत्नी के गर्भ में शुकदेव जी को 12 वर्ष हो गए, लेकिन बाहर नहीं निकले। क्योंकि उन्हें डर था अगर मैं संसार में आया तो भगवान की माया के चपेट में आ जाऊंगा। कथा आयोजनकर्ताओं में ब्रजेश रस्तोगी, सुरेंद्र बंसल, मूलचंद सैनी, राकेश गोपाल सिंगल, गोपाल सैनी, पवन गुप्ता, राजा कर्णवाल, राजीव गुप्ता, राजपाल सैनी, प्रेम विजय सिंघल, महेश चंद शर्मा, सतीश खटीक, आदि शामिल रहे।
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सुशील