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वास्तुविद पंडित ज्ञानचंद का निधन
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मुजफ्फरनगर। विख्यात ज्योतिषाचार्य, वास्तुविद और अंकवेत्ता 84 वर्षीय पंडित ज्ञानचंद का निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार आज प्रात: दस बजे काली नदी घाट पर किया जाएगा।
विख्यात ज्योतिषज्ञ एवं वास्तुविद पंडित ज्ञानचंद गत एक माह से गंभीर रोगग्रस्त थे। फिलहाल दिल्ली में उपचार के बाद अपने रामपुरी आवास पर लौट आये थे। बुधवार शाम 5 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से घर पर शोक व्यक्त करने को अनुयायियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों का तांता लग गया। मेरठ जिले की तहसील सरधना के गांव सलावा में वर्ष 1935 में शेर सिंह धीमान के घर उनका जन्म हुआ। उन्हें वास्तु शास्त्र का ज्ञान अपने पिता से मिला। जिले के बड़सू गांव में पंडित नकली राम का दो साल मार्गदर्शन लिया और मन को गुरु एवं गाय की सेवा में अर्पित किया। 15 वर्ष की आयु तक वह ज्योतिष और वास्तु विधा पारंगत हो गए। शिक्षा ऋषि पद्म भूषण वीतराग स्वामी कल्याणदेव, हरिद्धार के स्वामी निजानंद और शुकतीर्थ शुकदेव आश्रम पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र संवर्धन को उन्हें सम्मानित किया। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य, श्री विश्वकर्मा धीमान सेवा संघ के अध्यक्ष निर्मल सिंह, नरेश विश्वकर्मा, सरदार बलविंद्र सिंह, ओम प्रकाश धीमान, पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य जगदीश पांचाल आदि ने उनके निधन पर शोक जताया है।
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विख्यात ज्योतिषज्ञ एवं वास्तुविद पंडित ज्ञानचंद गत एक माह से गंभीर रोगग्रस्त थे। फिलहाल दिल्ली में उपचार के बाद अपने रामपुरी आवास पर लौट आये थे। बुधवार शाम 5 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से घर पर शोक व्यक्त करने को अनुयायियों, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों का तांता लग गया। मेरठ जिले की तहसील सरधना के गांव सलावा में वर्ष 1935 में शेर सिंह धीमान के घर उनका जन्म हुआ। उन्हें वास्तु शास्त्र का ज्ञान अपने पिता से मिला। जिले के बड़सू गांव में पंडित नकली राम का दो साल मार्गदर्शन लिया और मन को गुरु एवं गाय की सेवा में अर्पित किया। 15 वर्ष की आयु तक वह ज्योतिष और वास्तु विधा पारंगत हो गए। शिक्षा ऋषि पद्म भूषण वीतराग स्वामी कल्याणदेव, हरिद्धार के स्वामी निजानंद और शुकतीर्थ शुकदेव आश्रम पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने ज्योतिष एवं वास्तु शास्त्र संवर्धन को उन्हें सम्मानित किया। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य, श्री विश्वकर्मा धीमान सेवा संघ के अध्यक्ष निर्मल सिंह, नरेश विश्वकर्मा, सरदार बलविंद्र सिंह, ओम प्रकाश धीमान, पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य जगदीश पांचाल आदि ने उनके निधन पर शोक जताया है।
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