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चीनी मिलों ने पेराई में तोड़ा रिकार्ड
Updated Wed, 02 May 2018 12:12 AM IST
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चीनी मिलों ने पेराई में तोड़ा रिकार्ड
मुजफ्फरनगर। चीनी मिलों के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि अक्तूबर में पेराई शुरू करने के बाद भी सभी चीनी मिलें मई माह में भी पेराई कर रही है। अब से पहले मई में यदि चीनी मिल चलती थी तो एक या दो में ही पेराई बाकी रह जाती थी। इस बार मई में जिले की आठों चीनी मिलों में पेराई हो रही है। जिले में गन्ने का रिकार्ड उत्पादन होने के कारण चीनी मिलें पेराई सत्र बढ़ाने को विवश हो गई है।
जिले की चीनी मिलें इस बार पेराई के सभी पुराने रिकार्ड तोड़ देगी। मिलों के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि अक्तूबर से पेराई शुरू करने वाली चीनी मिल मई माह तक चलेगी। यदि हम चीनी मिलों के पुराने इतिहास पर जाए तो वह दिसंबर तक चलती थी और मई तक पहुंच जाती थी। बीते कुछ वर्षों से मिलों में पेराई सत्र नवंबर में प्रारंभ हो रहा था। नवंबर से पेराई शुरू करने के बाद पेराई अप्रैल के अंत तक पूरी हो जाती थी। बीते वर्ष केवल मोरना चीनी मिल ही मई तक चली, बाकी सभी चीनी मिलों में पेराई सत्र अप्रैल के अंत तक पूरा हो गया था। गन्ने के रिकार्ड उत्पादन ने जिले की समस्त चीनी मिलों को मई में भी पेराई करने के लिए विवश कर दिया है। गत वर्ष जिले में 779 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई थी। इस बार अब तक बीते वर्ष से 100 लाख क्विंटल अधिक गन्ने की पेराई हो चुकी है।
एक नजर इधर भी
मुजफ्फरनगर। जिले की चीनी मिलों का बीते पांच साल का रिकार्ड देखे तो कभी भी सभी चीनी मिल न तो
अक्तूबर में शुरू हुई और न ही समय पर पेराई सत्र की समाप्ति। 2012-13 में चीनी मिलों की पेराई देखे तो रोहाना में 12 दिसंबर से, टिकौला में 24 नवंबर से, भैंसाना में 22 नवंबर, खाईखेड़ी में 28 नवंबर, मंसूरपुर में 24 नवंबर, तितावी, खतौली में 21 नवंबर, मोरना में 16 नवंबर से पेराई प्रारंभ हुई। पेराई सत्र की समाप्ति सभी चीनी मिलों की 17 अप्रैल से 28 अप्रैल के बीच हो गई। केवल मोरना एक मई तक चली। वर्ष 13-14 में मोरना 21 नवंबर में चली बाकी सभी मिलों में पेराई दिसंबर से हुई। पेराई सत्र की समाप्ति भी सभी की अप्रैल के मध्य में हो गई। वर्ष 14-15 में सभी चीनी मिलें नवंबर के अंत और दिसंबर के प्रथम सप्ताह में चली। सत्र का समापन अप्रैल में हो गया। केवल मोरना पांच मई तक और मंसूरपुर एक मई तक चली। वर्ष 2016-17 में पेराई नवंबर के अंत और दिसंबर के प्रथम सप्ताह में प्रारंभ हुई। सत्र का समापन पूरी तरह अप्रैल के मध्य में हो गया। वर्ष 2016-17 में मिलों में पेराई नवंबर के दूसरे सप्ताह से प्रारंभ हुई। सत्र का समापन अप्रैल में हो गया। केवल मोरना चार मई तक चली। वर्ष 2017-18 में हम देखे तो भैसाना, मंसूरपुर और खतौली में अक्तूबर से और बाकी में नवंबर के पहले सप्ताह से पेराई प्रारंभ हुई। इस समय सभी में पेराई चल रही है।
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मेरी नौकरी में पहली बार हुआ: यादव
मुजफ्फरनगर। जिला गन्ना अधिकारी ओमप्रकाश यादव का कहना है कि मेरी अपनी नौकरी में अब तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि अक्तूबर से मई तक चीनी मिल चली हो। ऐसा पहली बार हुआ है, लेकिन जिस तरह गन्ने का उत्पादन बढ़ा है, आगे भी ऐसा हो सकता है।
-1977 में चली थी जून तक: राठी
फोटो
मुजफ्फरनगर। गन्ना विभाग में 36 साल तक सहायक परियोजना अधिकारी की नौकरी करने वाले दूधाहेडी निवासी सत्यपाल राठी का कहना है कि उन्हें याद है कि 1977 में जून तक चीनी मिलें चली थी, लेकिन पेराई सत्र नवंबर से प्रारंभ हुआ था। ऐसा कभी नहीं हुआ कि अक्तूबर से मई तक चली हो। राठी दस साल पूर्व विभाग से रिटायर हो चुके हैं।
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मुजफ्फरनगर। चीनी मिलों के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि अक्तूबर में पेराई शुरू करने के बाद भी सभी चीनी मिलें मई माह में भी पेराई कर रही है। अब से पहले मई में यदि चीनी मिल चलती थी तो एक या दो में ही पेराई बाकी रह जाती थी। इस बार मई में जिले की आठों चीनी मिलों में पेराई हो रही है। जिले में गन्ने का रिकार्ड उत्पादन होने के कारण चीनी मिलें पेराई सत्र बढ़ाने को विवश हो गई है।
जिले की चीनी मिलें इस बार पेराई के सभी पुराने रिकार्ड तोड़ देगी। मिलों के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि अक्तूबर से पेराई शुरू करने वाली चीनी मिल मई माह तक चलेगी। यदि हम चीनी मिलों के पुराने इतिहास पर जाए तो वह दिसंबर तक चलती थी और मई तक पहुंच जाती थी। बीते कुछ वर्षों से मिलों में पेराई सत्र नवंबर में प्रारंभ हो रहा था। नवंबर से पेराई शुरू करने के बाद पेराई अप्रैल के अंत तक पूरी हो जाती थी। बीते वर्ष केवल मोरना चीनी मिल ही मई तक चली, बाकी सभी चीनी मिलों में पेराई सत्र अप्रैल के अंत तक पूरा हो गया था। गन्ने के रिकार्ड उत्पादन ने जिले की समस्त चीनी मिलों को मई में भी पेराई करने के लिए विवश कर दिया है। गत वर्ष जिले में 779 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई हुई थी। इस बार अब तक बीते वर्ष से 100 लाख क्विंटल अधिक गन्ने की पेराई हो चुकी है।
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एक नजर इधर भी
मुजफ्फरनगर। जिले की चीनी मिलों का बीते पांच साल का रिकार्ड देखे तो कभी भी सभी चीनी मिल न तो
अक्तूबर में शुरू हुई और न ही समय पर पेराई सत्र की समाप्ति। 2012-13 में चीनी मिलों की पेराई देखे तो रोहाना में 12 दिसंबर से, टिकौला में 24 नवंबर से, भैंसाना में 22 नवंबर, खाईखेड़ी में 28 नवंबर, मंसूरपुर में 24 नवंबर, तितावी, खतौली में 21 नवंबर, मोरना में 16 नवंबर से पेराई प्रारंभ हुई। पेराई सत्र की समाप्ति सभी चीनी मिलों की 17 अप्रैल से 28 अप्रैल के बीच हो गई। केवल मोरना एक मई तक चली। वर्ष 13-14 में मोरना 21 नवंबर में चली बाकी सभी मिलों में पेराई दिसंबर से हुई। पेराई सत्र की समाप्ति भी सभी की अप्रैल के मध्य में हो गई। वर्ष 14-15 में सभी चीनी मिलें नवंबर के अंत और दिसंबर के प्रथम सप्ताह में चली। सत्र का समापन अप्रैल में हो गया। केवल मोरना पांच मई तक और मंसूरपुर एक मई तक चली। वर्ष 2016-17 में पेराई नवंबर के अंत और दिसंबर के प्रथम सप्ताह में प्रारंभ हुई। सत्र का समापन पूरी तरह अप्रैल के मध्य में हो गया। वर्ष 2016-17 में मिलों में पेराई नवंबर के दूसरे सप्ताह से प्रारंभ हुई। सत्र का समापन अप्रैल में हो गया। केवल मोरना चार मई तक चली। वर्ष 2017-18 में हम देखे तो भैसाना, मंसूरपुर और खतौली में अक्तूबर से और बाकी में नवंबर के पहले सप्ताह से पेराई प्रारंभ हुई। इस समय सभी में पेराई चल रही है।
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मेरी नौकरी में पहली बार हुआ: यादव
मुजफ्फरनगर। जिला गन्ना अधिकारी ओमप्रकाश यादव का कहना है कि मेरी अपनी नौकरी में अब तक कभी ऐसा नहीं हुआ कि अक्तूबर से मई तक चीनी मिल चली हो। ऐसा पहली बार हुआ है, लेकिन जिस तरह गन्ने का उत्पादन बढ़ा है, आगे भी ऐसा हो सकता है।
-1977 में चली थी जून तक: राठी
फोटो
मुजफ्फरनगर। गन्ना विभाग में 36 साल तक सहायक परियोजना अधिकारी की नौकरी करने वाले दूधाहेडी निवासी सत्यपाल राठी का कहना है कि उन्हें याद है कि 1977 में जून तक चीनी मिलें चली थी, लेकिन पेराई सत्र नवंबर से प्रारंभ हुआ था। ऐसा कभी नहीं हुआ कि अक्तूबर से मई तक चली हो। राठी दस साल पूर्व विभाग से रिटायर हो चुके हैं।
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