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पुण्य कर्म से सफल बनेगा मानव जीवन
Updated Fri, 02 Feb 2018 01:33 AM IST
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पुण्य कर्म से सफल बनेगा मानव जीवन
तितावी (मुजफ्फरनगर)।
महर्षि दयानंद आश्रम लालूखेड़ी में यज्ञ में आहुतियां देकर वैदिक प्रचार का शुभारंभ किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि पुण्य कर्म से जीवन सफल बनता है।
लालूखेड़ी में आयोजित वैदिक प्रचार कार्यक्रम में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि आचरण के बिना ज्ञान व्यर्थ है। जीवन में शांति, उन्नति के लिए पुण्य कर्म करें। मनुष्य जीवन की महानता सत्य, नैतिक और श्रेष्ठ आचरण में होती है। सत्य को ग्रहण करना, सदाचार, ईमानदारी, पवित्र मन, देशभक्ति, इंद्रियों पर संयम करना आदि सद्गुणों से ही आचरण की श्रेष्ठता कायम होती है। श्रीराम, योगीराज कृष्ण, माता सीता, माता रुक्मिणी, माता गार्गी का जीवन पवित्र था, इसीलिए वे भारतीय संस्कृति का गौरव बने। सत्य आचरण से समाज को प्रेरणा मिलती है। गुरुकुल वृंदावन से पधारे हरिप्रकाश ने कहा कि माता-पिता सच्चे देवता हैं। शिक्षक और अतिथि भी देवता हैं। परिवारों में इनका भी सम्मान होना चाहिए। घर में यज्ञ करें, विद्वानों का सत्कार करें। बच्चे संस्कारित बनेंगे। संतोष और कुलदीप विद्यार्थी ने आर्य समाज के नियमों की व्याख्या की। न्यास अध्यक्ष पीके निर्वाल ने कहा कि महर्षि दयानंद की शिक्षाएं युवाओं को चरित्रवान बनाती है। इस मौके पर देवपाल आर्य, नरेंद्र आर्य, सोमपाल आर्य, विकास आर्य, आनंद मुनि, योगेंद्र आर्य, आनंद आर्य, नेमचंद आर्य आदि मौजूद रहे। संचालन हरपाल सिंह आर्य ने किया।
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तितावी (मुजफ्फरनगर)।
महर्षि दयानंद आश्रम लालूखेड़ी में यज्ञ में आहुतियां देकर वैदिक प्रचार का शुभारंभ किया गया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि पुण्य कर्म से जीवन सफल बनता है।
लालूखेड़ी में आयोजित वैदिक प्रचार कार्यक्रम में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि आचरण के बिना ज्ञान व्यर्थ है। जीवन में शांति, उन्नति के लिए पुण्य कर्म करें। मनुष्य जीवन की महानता सत्य, नैतिक और श्रेष्ठ आचरण में होती है। सत्य को ग्रहण करना, सदाचार, ईमानदारी, पवित्र मन, देशभक्ति, इंद्रियों पर संयम करना आदि सद्गुणों से ही आचरण की श्रेष्ठता कायम होती है। श्रीराम, योगीराज कृष्ण, माता सीता, माता रुक्मिणी, माता गार्गी का जीवन पवित्र था, इसीलिए वे भारतीय संस्कृति का गौरव बने। सत्य आचरण से समाज को प्रेरणा मिलती है। गुरुकुल वृंदावन से पधारे हरिप्रकाश ने कहा कि माता-पिता सच्चे देवता हैं। शिक्षक और अतिथि भी देवता हैं। परिवारों में इनका भी सम्मान होना चाहिए। घर में यज्ञ करें, विद्वानों का सत्कार करें। बच्चे संस्कारित बनेंगे। संतोष और कुलदीप विद्यार्थी ने आर्य समाज के नियमों की व्याख्या की। न्यास अध्यक्ष पीके निर्वाल ने कहा कि महर्षि दयानंद की शिक्षाएं युवाओं को चरित्रवान बनाती है। इस मौके पर देवपाल आर्य, नरेंद्र आर्य, सोमपाल आर्य, विकास आर्य, आनंद मुनि, योगेंद्र आर्य, आनंद आर्य, नेमचंद आर्य आदि मौजूद रहे। संचालन हरपाल सिंह आर्य ने किया।
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