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जिले के 18 पुराने वृक्ष ‘हेरिटेज वृक्ष’ घोषित, होगा संरक्षण
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शुकतीर्थ में स्थित महाभारात कालीन वट वृक्ष।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
जिले के 18 पुराने वृक्ष ‘हेरिटेज वृक्ष’ घोषित, होगा संरक्षण
मुजफ्फरनगर। शासन ने प्राकृतिक संपदा को संरक्षित करने के लिए कदम बढ़ाए हैं। 100 वर्ष और इससे भी पुराने पेड़ों को चिह्नित कर उनका धरोहर के रूप में संरक्षण होगा। जनपद के 18 वृक्षों का चयन कर लिया गया है। इसकी सूची तैयार कर शासन को भेजी जा रही है।
मुजफ्फरनगर प्राकृतिक रूप से समृद्ध जिला है। हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण्य का हिस्सा भी जनपद में है। पूर्व दिशा में गंगा का क्षेत्र है। शताब्दियों पुराने वृक्ष अपनी भव्यता से लोगों को आकर्षित करते हैं। शासन के निर्देश पर वन विभाग ने जनपद में 100 वर्ष से पुराने 18 पेड़ों को चिह्नित किया है। इन्हें हेरिटेज (धरोहर) वृक्ष घोषित किया गया है। इन्हें संरक्षित करने के लिए वन विभाग काम करेगा।
इन वृक्षों को मिला हेरिटेज का दर्जा
महर्षि शुकदेव आश्रम स्थित बरगद (वट वृक्ष), नीलकंठ मंदिर फिरोजपुर में पीपल, खिचड़ी वाले बाबा आश्रम, खरपौड़ झील, खरपौड़ सतिया, ग्राम किथौड़ा, भुम्मा नहर पुल, देवल मंदिर, डेरा मस्जिद ग्राम जौला, शिव काली मंदिर ग्राम कुरालसी, कुष्ठ आश्रम मुजफ्फरनगर, कलक्ट्रेट परिसर, बिलासपुर चौक के पास जौली रोड पर खड़े बरगद, मुकल्लमपुरा, जमालपुर बांगर, दाहखेड़ी पुल मुख्य गंग नहर बांयी पटरी पर खड़ेे पिलखन तथा कुटबा-कुटबी, तथा मुख्य गंग नहर धमात पुल के पास खड़े पीपल के पेड़ को हेरिटेज का दर्जा दिया गया है। ये सभी पेड़ 100 वर्ष या उससे ज्यादा पुराने हैं।
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5100 वर्ष पुराना है शुकदेव आश्रम का वट वृक्ष
शुकतीर्थ स्थित शुकदेव आश्रम के अक्षय वट के नीचे बैठकर लगभग 5000 साल पहले शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत की कथा सुनाई थी। इसी वट वृक्ष के नीचे महर्षि शुकदेव मंदिर की स्थापना की गई। वृक्ष की शाखाएं 150 फुट तक ऊंची हैं और सभी दिशाओं में फैली हैं। एक शाखा तो देखने में भगवान गणेश के समान लगती है। इस वृक्ष की आयु लगभग 5100 वर्ष मानी जाती है।
जिले में 100 वर्ष या उससे ज्यादा पुराने वृक्षों को चिह्नित किया गया है। इन्हें हेरिटेज वृक्ष का दर्जा देकर इनके संरक्षण के लिए काम किया जाएगा। - सूरज, डीएफओ।
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मुजफ्फरनगर। शासन ने प्राकृतिक संपदा को संरक्षित करने के लिए कदम बढ़ाए हैं। 100 वर्ष और इससे भी पुराने पेड़ों को चिह्नित कर उनका धरोहर के रूप में संरक्षण होगा। जनपद के 18 वृक्षों का चयन कर लिया गया है। इसकी सूची तैयार कर शासन को भेजी जा रही है।
मुजफ्फरनगर प्राकृतिक रूप से समृद्ध जिला है। हस्तिनापुर वन्य जीव अभ्यारण्य का हिस्सा भी जनपद में है। पूर्व दिशा में गंगा का क्षेत्र है। शताब्दियों पुराने वृक्ष अपनी भव्यता से लोगों को आकर्षित करते हैं। शासन के निर्देश पर वन विभाग ने जनपद में 100 वर्ष से पुराने 18 पेड़ों को चिह्नित किया है। इन्हें हेरिटेज (धरोहर) वृक्ष घोषित किया गया है। इन्हें संरक्षित करने के लिए वन विभाग काम करेगा।
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इन वृक्षों को मिला हेरिटेज का दर्जा
महर्षि शुकदेव आश्रम स्थित बरगद (वट वृक्ष), नीलकंठ मंदिर फिरोजपुर में पीपल, खिचड़ी वाले बाबा आश्रम, खरपौड़ झील, खरपौड़ सतिया, ग्राम किथौड़ा, भुम्मा नहर पुल, देवल मंदिर, डेरा मस्जिद ग्राम जौला, शिव काली मंदिर ग्राम कुरालसी, कुष्ठ आश्रम मुजफ्फरनगर, कलक्ट्रेट परिसर, बिलासपुर चौक के पास जौली रोड पर खड़े बरगद, मुकल्लमपुरा, जमालपुर बांगर, दाहखेड़ी पुल मुख्य गंग नहर बांयी पटरी पर खड़ेे पिलखन तथा कुटबा-कुटबी, तथा मुख्य गंग नहर धमात पुल के पास खड़े पीपल के पेड़ को हेरिटेज का दर्जा दिया गया है। ये सभी पेड़ 100 वर्ष या उससे ज्यादा पुराने हैं।
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5100 वर्ष पुराना है शुकदेव आश्रम का वट वृक्ष
शुकतीर्थ स्थित शुकदेव आश्रम के अक्षय वट के नीचे बैठकर लगभग 5000 साल पहले शुकदेव महाराज ने राजा परीक्षित को श्रीमद्भागवत की कथा सुनाई थी। इसी वट वृक्ष के नीचे महर्षि शुकदेव मंदिर की स्थापना की गई। वृक्ष की शाखाएं 150 फुट तक ऊंची हैं और सभी दिशाओं में फैली हैं। एक शाखा तो देखने में भगवान गणेश के समान लगती है। इस वृक्ष की आयु लगभग 5100 वर्ष मानी जाती है।
जिले में 100 वर्ष या उससे ज्यादा पुराने वृक्षों को चिह्नित किया गया है। इन्हें हेरिटेज वृक्ष का दर्जा देकर इनके संरक्षण के लिए काम किया जाएगा। - सूरज, डीएफओ।