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महामिलन का नाम ही महाकुंभ: दीदी
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महामिलन का नाम ही महाकुंभ : दीदी
मुजफ्फरनगर। प्रजापिता ब्रह्मकुमारीय ईश्वरीय विश्वविद्यालय गांधीनगर में महाशिवरात्रि पर्व मनाया गया। इस अवसर पर दिल्ली से आई राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी विजय दीदी ने कहा कि महामिलन का नाम ही महाकुंभ है।
उन्होंने कहा कि आत्मा का परमात्मा से पूरे सृष्टि चक्र में केवल एक बार मिलन होता है। चारो युगों में यह घटनाक्रम सिर्फ कलियुग के अंत और सतयुग के आदि में होता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान गंगा से आत्मा का मैल साफ हो जाता है और फिर नर से श्री नारायण और नारी से श्रीलक्ष्मी बन जाता है। यह समय परमात्मा के मिलन का युग है, जो कलियुग के अंत में हो रहा है। पारिवारिक ढांचा आपसी प्यार सब निम्नकाल में जा रहे हैं। दुनिया दुख देने वाली हो गई है। हर जगह स्वार्थ और नफरत की धूल भरी हुई है। अंधकार के बाद प्रकाश और रात के बाद दिन आना प्रकृति का नियम है। मनुष्य खुद को बदले या न बदले, लेकिन समय जरूर बदलता है। विशिष्ट अतिथि लवी अग्रवाल, आशीष चौधरी ने ब्रहमाकुमारीज की प्रसंशा की। संचालन रविंद्र मलिक ने किया। पूनम दीदी, सोनम, विशाखा, राधा, बबली, रमेश, महेश, प्रवीण, विनोद, दीपक, नितिन, सोमपाल आदि मौजूद रहे।
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मुजफ्फरनगर। प्रजापिता ब्रह्मकुमारीय ईश्वरीय विश्वविद्यालय गांधीनगर में महाशिवरात्रि पर्व मनाया गया। इस अवसर पर दिल्ली से आई राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी विजय दीदी ने कहा कि महामिलन का नाम ही महाकुंभ है।
उन्होंने कहा कि आत्मा का परमात्मा से पूरे सृष्टि चक्र में केवल एक बार मिलन होता है। चारो युगों में यह घटनाक्रम सिर्फ कलियुग के अंत और सतयुग के आदि में होता है। उन्होंने कहा कि ज्ञान गंगा से आत्मा का मैल साफ हो जाता है और फिर नर से श्री नारायण और नारी से श्रीलक्ष्मी बन जाता है। यह समय परमात्मा के मिलन का युग है, जो कलियुग के अंत में हो रहा है। पारिवारिक ढांचा आपसी प्यार सब निम्नकाल में जा रहे हैं। दुनिया दुख देने वाली हो गई है। हर जगह स्वार्थ और नफरत की धूल भरी हुई है। अंधकार के बाद प्रकाश और रात के बाद दिन आना प्रकृति का नियम है। मनुष्य खुद को बदले या न बदले, लेकिन समय जरूर बदलता है। विशिष्ट अतिथि लवी अग्रवाल, आशीष चौधरी ने ब्रहमाकुमारीज की प्रसंशा की। संचालन रविंद्र मलिक ने किया। पूनम दीदी, सोनम, विशाखा, राधा, बबली, रमेश, महेश, प्रवीण, विनोद, दीपक, नितिन, सोमपाल आदि मौजूद रहे।
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