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संस्कारों को आचरण में लाए: गुरुदत आर्य
Updated Tue, 19 Dec 2017 12:45 AM IST
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जानसठ। आर्य समाज जंधेड़ी के वृहत यज्ञ में राष्ट्रीय संस्कृति, एकता, सद्भावना और जन कल्याण के लिए ग्रामीणों ने आहुतियां अर्पित की। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि संस्कृति और संस्कारों को जीवन आचरण में लाएं।
जंधेड़ी गांव में आयोजित यज्ञ में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति सत्य, नैतिक, आज्ञापालन, अनुशासन, आचरण, चरित्र और मूल्यों की पवित्रता का संदेश देती है। सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन के लिए महर्षि दयानंद ने समाज और देश को जागृत किया। यज्ञ और योग भारतीय संस्कृति का मूल है। अभिभावक बेटे-बेटियों को उच्च शिक्षा के साथ संस्कारों से जोड़े। प्रधान सत्यपाल आर्य ने कहा कि नशीले पदार्थों का त्याग करें और शाकाहारी जीवन अपनाए। जगमोहन आर्य ने परिवार में यज्ञ करने का महत्व बताया। महाशय भगत सिंह ने भजन प्रस्तुत किए। यजमान सौरभ एवं शिवानी चौधरी रहे। ब्रह्मा का दायित्व जयविंद्र आर्य ने निभाया। मौके पर धर्म मुनि, अरविंद आर्य, प्रदीप, जगजीत आर्य, अनुज, शुभम, विनीत, कपिल, धर्मेंद्र आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता तिलक सिंह और संचालन रविंद्र आर्य ने किया।
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जंधेड़ी गांव में आयोजित यज्ञ में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति सत्य, नैतिक, आज्ञापालन, अनुशासन, आचरण, चरित्र और मूल्यों की पवित्रता का संदेश देती है। सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन के लिए महर्षि दयानंद ने समाज और देश को जागृत किया। यज्ञ और योग भारतीय संस्कृति का मूल है। अभिभावक बेटे-बेटियों को उच्च शिक्षा के साथ संस्कारों से जोड़े। प्रधान सत्यपाल आर्य ने कहा कि नशीले पदार्थों का त्याग करें और शाकाहारी जीवन अपनाए। जगमोहन आर्य ने परिवार में यज्ञ करने का महत्व बताया। महाशय भगत सिंह ने भजन प्रस्तुत किए। यजमान सौरभ एवं शिवानी चौधरी रहे। ब्रह्मा का दायित्व जयविंद्र आर्य ने निभाया। मौके पर धर्म मुनि, अरविंद आर्य, प्रदीप, जगजीत आर्य, अनुज, शुभम, विनीत, कपिल, धर्मेंद्र आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता तिलक सिंह और संचालन रविंद्र आर्य ने किया।
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