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कृषि वैज्ञानिकों ने स्प्रे करने की तकनीक बताई
Updated Sat, 12 Aug 2017 12:54 AM IST
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कृषि वैज्ञानिकों ने स्प्रे करने की तकनीक बताई
बुढ़ाना। मेरठ से आए कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने किसानों को खेेतों में लगने वाली बीमारियों पर कीटनाशक दवाइयों का स्प्रे करने की तकनीक किसानों को बताई। किसानों को कीटनाशक दवाइयों की जानकारी दी।
तहसील क्षेत्र के गांव खेड़ीगनी व सागड़ी आदि गांवों में भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान मेरठ से आई कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने किसानों की प्रभावित फसलों का अवलोकन किया। अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. आजाद सिंह पंवार ने बताया कि स्प्रे तकनीक से दवाई का छिड़काव कर बीमारी पर नियंत्रण किया जा सकता है। आमतौर पर किसान उचित स्प्रे तकनीक का प्रयोग नहीं करते हैं, जिससे दवाई का असर नहीं हो पाता है। उन्होंने बाजार में उपलब्ध दवाइयों के बेअसर होने, कीड़ों की पहचान, सही दवाई के प्रयोग का प्रदर्शन किया। उन्होंने फसल की जड़ काटने वाले कीट बाइट क्रब के विषय में जानकारी देते हुए उसके उपचार के विषय में भी बताया।
बताया कि किसान फसलों पर लगातार अपनी नजर रखें। फसलों में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो विशेषज्ञों की सलाह के बाद दवाई का छिड़काव करें। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को नि:शुल्क दवाई का भी वितरण किया। इस मौके पर डॉ. रविशंकर, डॉ. चंद्रभानु, मौसम वैज्ञानिक डॉ. एम शमीम, प्रधान मनोज, लख्मी, संजय समेत सैकड़ों किसान लाभान्वित हुए।
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बुढ़ाना। मेरठ से आए कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने किसानों को खेेतों में लगने वाली बीमारियों पर कीटनाशक दवाइयों का स्प्रे करने की तकनीक किसानों को बताई। किसानों को कीटनाशक दवाइयों की जानकारी दी।
तहसील क्षेत्र के गांव खेड़ीगनी व सागड़ी आदि गांवों में भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान मेरठ से आई कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने किसानों की प्रभावित फसलों का अवलोकन किया। अनुसंधान केन्द्र के निदेशक डॉ. आजाद सिंह पंवार ने बताया कि स्प्रे तकनीक से दवाई का छिड़काव कर बीमारी पर नियंत्रण किया जा सकता है। आमतौर पर किसान उचित स्प्रे तकनीक का प्रयोग नहीं करते हैं, जिससे दवाई का असर नहीं हो पाता है। उन्होंने बाजार में उपलब्ध दवाइयों के बेअसर होने, कीड़ों की पहचान, सही दवाई के प्रयोग का प्रदर्शन किया। उन्होंने फसल की जड़ काटने वाले कीट बाइट क्रब के विषय में जानकारी देते हुए उसके उपचार के विषय में भी बताया।
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बताया कि किसान फसलों पर लगातार अपनी नजर रखें। फसलों में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो विशेषज्ञों की सलाह के बाद दवाई का छिड़काव करें। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को नि:शुल्क दवाई का भी वितरण किया। इस मौके पर डॉ. रविशंकर, डॉ. चंद्रभानु, मौसम वैज्ञानिक डॉ. एम शमीम, प्रधान मनोज, लख्मी, संजय समेत सैकड़ों किसान लाभान्वित हुए।
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