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खूनी सड़कों पर 24 घंटे में आठ, 21 दिन में 17 की मौत

अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Mon, 22 May 2017 12:44 AM IST
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सड़क दुर्घटना चिन्ह।
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जिले में नेशनल हो या स्टेट हाईवे या फिर लिंक मार्ग शायद ही ऐसी कोई जगह हो, जहां दुर्घटनाएं न होती हो। इस माह 21 दिनों में 17 लोगों की जान दुर्घटनाओं में जा चुकी है। पिछले 24 घंटे के भीतर महिला सहित आठ लोग मौत का शिकार हो चुके हैं। यातायात हो या फिर एआरटीओ विभाग दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कोई तैयार नहीं है। फिलहाल दुर्घटनाओं का सिलसिला लगातार जारी है और लोग मौत का शिकार हो रहे है।       
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दिल्ली-देहरादून, पानीपत-खटीमा मार्ग और शहर को जोड़ने वाले अन्य हाईवे और लिंक मार्ग जनपद में दुर्घटनाओं का स्थल बनते जा रहे हैं। रोजाना सभी जगहों पर सड़क हादसों में लोगों की जानें जा रही है। इस माह ही अभी तक 17 लोगों सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गवां चुके हैं। एक मई को रामराज में ट्रैक्टर को बचाने के चक्कर में पलटी स्कूली बस में सवार दर्जन भर मासूम घायल हो गए थे।


तीन मई को रतनपुरी के बडसू निवासी श्याम सिंह की बाइकों की आमने-सामने की भिडंत में मौत हो गई थी। पांच मई को मीरापुर के कन्हेड़ा निवासी पति के साथ जा रही रूकैया की बाइक भिड़ंत में मौत हो गई थी। सात मई को नई मंडी कोतवाली के बाईपास पर सड़क किनारे खडे़ भोपा निवासी योगेंद्र की मौत हो गई। आठ मई को बुढ़ाना के गढी सखावत चौक के पास ट्रक की टक्कर से शामली निवासी विजय की मौत हो गई। इसी दिन तितावी के लालूखड़ी मार्ग पर दूध की गाड़ी की टक्कर से साइकिल सवार खेड़ा मस्तान निवासी अमित की मौत हो गई थी। 

दस मई को बुढ़ाना निवासी वसीम की  खेड़ा मस्तान के पास टाटा मैजिक से हुई टक्कर से मौत हो गई थी। 14/15 मई की रात भोपा के सीकरी में ट्रैक्टर के नीचे दबने से रविश की मौत। 17 मई को सरनावली निवासी रमेश्वर की बुढ़ाना जाने के दौरान करनाल हाईवे पर ट्रक द्वारा कुचले जाने से मौके पर ही मौत हो गई थी। 20 मई की सुबह नेशनल हाईवे पर छपार क्षेत्र में डिवाइडर से कार टकराने पर सिपाही सरिता और कमांडो पति रोहित की मौत हो गई थी।

रात में सिविल लाइन के सरकुलर रोड पर स्कूटी सवार  कमल जैन और दीपा जैन की मौत हो गई थी। रात में छपार क्षेत्र में फलौदा निवासी अभिनव की सड़क हादसे में मौत हो गई थी। शनिवार देर रात पानीपत-खटीमा मार्ग पर हरियाणा के पानीपत निवासी युवकों की कार पलट जाने से दो भाइयों अंशुल और राहुल के अलावा हिमांशु की मौत हो गई। लगातार हो रही मौतों के बाद कोई भी विभाग इनकी जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। यातायात पुलिस और एआरटीओ दोनों ही एनएचएआई का मामला बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते है।       
क्या है कारण      
मुजफ्फरनगर। सड़क दुर्घटनाओं में लोगों की जान जाने का मुख्य कारण कारण लापरवाही भी है। यातायात विभाग की माने तो हाईवे पर नशे की हालत में तेज गति से वाहन चलाना, आगे की गाड़ी से सही दूरी न रखना, अपनी लेन में न चलना और खतरनाक तरीके से ओवरटेक करना दुर्घटनाओं का मुख्य कारण है। 

कैसे रोकी जा सकती है दुर्घटनाएं      
मुजफ्फरनगर। जनपद से गुजरने वाले हाईवों पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सबसे पहले बाइक सवार को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करना चाहिए। हाईवे के डिवाइडर पर लाइटें लगे, सिग्नल के बोर्ड, सड़कों पर आदेशात्मक , सूचनात्मक और चेतावनी चिह्नों के बोर्ड लगने चाहिए जो कि कहीं भी नहीं लगे है। रात में वाहनों चलाने वाले चालकों की शराब तो नहीं पी रखी है, इस बात की चेकिंग होनी चाहिए।       

जनपद में करीब 50 जगह ऐसी चिह्नित की गई है, जहां अक्सर दुर्घटनाएं होती है। रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी गई है। एआरटीओ विभाग के साथ मिलकर लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा ---अरविंद कुमार वर्मा, सीओ ट्रैफिक      

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