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भगवान का स्मरण करने से फल मिलता है तुरंत : स्वामी प्रखर
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शुकतीर्थ दंडी आश्रम में भागवत कथा का दीप प्रज्जवलन कर स्वागत करते महाराजगण।
- फोटो : KHATAULI
भगवान का स्मरण करने से फल मिलता है तुरंत : स्वामी प्रखर
मोरना। शुकतीर्थ के दंडी आश्रम में अन्नत विभूषित स्वामी विष्णु आश्रम महाराज की 16वीं पुण्यतिथि पर आयोजित साप्ताहिक भागवत कथा के शुभारंभ पर शिवधाम अधिष्ठाता विशिष्ट अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज ने कहा कि पाप और पुण्य कालांतर में फल देते हैं। आज कोई झूठ बोलता है, तो आज दुखी नहीं होगा। पाप का फल तत्काल नहीं मिलता। भगवान का स्मरण करता है, उसका फल तत्काल मिलता है। ध्यान करने से, स्मरण करने से, मन की शुद्धि होती है। भगवान सत्य और श्रेष्ठ है। इससे पूर्व श्रद्धालुओं ने आयोजित कलश यात्रा में भक्ति भाग लिया।
भागवत कथा के शुभारंभ मौके पर मुख्य अतिथि हनुमानधाम महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कहा कि भोग भक्ति का फल नहीं है। भक्ति का फल संसार का सुख नहीं, भक्ति का फल भगवान की कृपा है। भगवान जीव को ज्यादा सुख और पैसा देता है, जो जीव को कम लगता है। मांगने से प्रेम कम होता है, देने से प्रेम में बढ़ोतरी होती है। इससे पूर्व, भागवत कथा भवन में भागवत पीठ के समक्ष का मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ करते हुए भागवत कथा व्यास वृंदावन मथुरा से पधारे डा. श्याम सुंदर पाराशर शास्त्री का तिलक कर व पटका पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दंडी संयासी गुरुदेवेश्रम आश्रम महाराज ने की तथा संचालन आश्रम प्रबंधक मनोहर शर्मा ने किया। इस मौके पर स्वामी गीतानंद गिरि महाराज, स्वामी प्रबोधश्रम महाराज बिहारघाट बुलंदशहर आदि ने अपने विचार रखें। कथा के आयोजन में राजकुमार राज, पूनम राज, गंगादत, बनवारी, रामप्रकाश, दिनेश, गोपाल, गोविंद आदि मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
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मोरना। शुकतीर्थ के दंडी आश्रम में अन्नत विभूषित स्वामी विष्णु आश्रम महाराज की 16वीं पुण्यतिथि पर आयोजित साप्ताहिक भागवत कथा के शुभारंभ पर शिवधाम अधिष्ठाता विशिष्ट अतिथि महामंडलेश्वर स्वामी प्रखर जी महाराज ने कहा कि पाप और पुण्य कालांतर में फल देते हैं। आज कोई झूठ बोलता है, तो आज दुखी नहीं होगा। पाप का फल तत्काल नहीं मिलता। भगवान का स्मरण करता है, उसका फल तत्काल मिलता है। ध्यान करने से, स्मरण करने से, मन की शुद्धि होती है। भगवान सत्य और श्रेष्ठ है। इससे पूर्व श्रद्धालुओं ने आयोजित कलश यात्रा में भक्ति भाग लिया।
भागवत कथा के शुभारंभ मौके पर मुख्य अतिथि हनुमानधाम महामंडलेश्वर स्वामी केशवानंद महाराज ने कहा कि भोग भक्ति का फल नहीं है। भक्ति का फल संसार का सुख नहीं, भक्ति का फल भगवान की कृपा है। भगवान जीव को ज्यादा सुख और पैसा देता है, जो जीव को कम लगता है। मांगने से प्रेम कम होता है, देने से प्रेम में बढ़ोतरी होती है। इससे पूर्व, भागवत कथा भवन में भागवत पीठ के समक्ष का मुख्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ करते हुए भागवत कथा व्यास वृंदावन मथुरा से पधारे डा. श्याम सुंदर पाराशर शास्त्री का तिलक कर व पटका पहनाकर सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता दंडी संयासी गुरुदेवेश्रम आश्रम महाराज ने की तथा संचालन आश्रम प्रबंधक मनोहर शर्मा ने किया। इस मौके पर स्वामी गीतानंद गिरि महाराज, स्वामी प्रबोधश्रम महाराज बिहारघाट बुलंदशहर आदि ने अपने विचार रखें। कथा के आयोजन में राजकुमार राज, पूनम राज, गंगादत, बनवारी, रामप्रकाश, दिनेश, गोपाल, गोविंद आदि मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
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