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सत्संग से जीवन में परमानंद की होती है प्राप्ति: ओमानंद
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सत्संग से जीवन में परमानंद की होती है प्राप्ति: ओमानंद
मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम शुकतीर्थ में अक्षय वट की छांव में संचालित सात अलग-अलग कथाओं में जीवन कल्याण का उपदेश ग्रहण करने को श्रद्धालु प्रभु भक्ति में मगन है। कर्नाटक से आए भागवत भक्तों की कलश यात्रा का शुभारंभ शुकदेव मंदिर पर दर्शन पूजन से किया गया। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद ने कहा कि संत, सत्संग से जीवन में परमानंद की प्राप्ति होती है।
भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में आयोजित सात कथाओं में देश के अलग-अलग प्रांतों से आए श्रद्धालुओं का अनूठा संगम लगा है। महामुनि शुकदेव की तपोभूमि में प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा कर भागवत भक्त प्रभु भक्ति में मगन हो रहे हैं। कर्नाटक के बेलगाम से पधारे यज्ञमान राजीव जोशी द्वारा रखी गई कथा की कलश यात्रा का शुभारंभ पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने किया। वृंदावन के कथा वाचक सिद्धार्थ शुक्ला को व्यास पीठ पर स्वामी ने सम्मानित किया। यज्ञमान गोपाल राम गुप्ता, जयपुर ने विधि विधान से पूजन किया। आशीर्वचन में स्वामी ओमानंद ने कहा कि जीवन को मंगलमय बनाने को सच्चे संत की कृपा जरूरी है। सत्संग से ही जीवन का कल्याण संभव है। भागवत कथा सत्संग प्रभु भक्ति और लोक कल्याण की शिक्षा देती है। ईश्वर, जीव, प्रकृति क्या है, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य क्या है , समाज धर्म, आपद धर्म तथा राज धर्म क्या है, यह सब शिक्षा भागवत से मिलती है। भागवत का ज्ञान मानव जीवन के उत्थान की पराकाष्ठा है। भागवत का दर्शन कल्याणकारी है। गीता भवन में गुना मध्य प्रदेश से आए यज्ञमान गजेंद्र सिंह की ओर से प्रारंभ हुई कथा में महामंडलेश्वर रामचरण दास की अमृत वाणी सुनने को श्रद्धालु उमड़े हैं। दास ने कहा कि जीवन में ईश्वर प्राप्ति की मार्ग महापुरुषों की वाणी से मिलता है। इसके अलावा कथा वाचक महामंडलेश्वर कृष्ण चैतन्य स्वामी, सुश्री राधा देव, गोविंद महाराज , भगवान बाबा और महामंडलेश्वर विश्वेश्वरानंद महाराज की भागवत कथाएं चल रही हैं। राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों के श्रद्धालु कथा श्रवण को शुकतीर्थ पधारे हैं। व्यवस्था में सुमन शास्त्री, हर्षमणि, आचार्य जीसी उप्रेती, आशीष माधव शास्त्री, विजय शर्मा आदि का सहयोग रहा।
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मोरना। भागवत पीठ शुकदेव आश्रम शुकतीर्थ में अक्षय वट की छांव में संचालित सात अलग-अलग कथाओं में जीवन कल्याण का उपदेश ग्रहण करने को श्रद्धालु प्रभु भक्ति में मगन है। कर्नाटक से आए भागवत भक्तों की कलश यात्रा का शुभारंभ शुकदेव मंदिर पर दर्शन पूजन से किया गया। पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद ने कहा कि संत, सत्संग से जीवन में परमानंद की प्राप्ति होती है।
भागवत पीठ शुकदेव आश्रम में आयोजित सात कथाओं में देश के अलग-अलग प्रांतों से आए श्रद्धालुओं का अनूठा संगम लगा है। महामुनि शुकदेव की तपोभूमि में प्राचीन वट वृक्ष की परिक्रमा कर भागवत भक्त प्रभु भक्ति में मगन हो रहे हैं। कर्नाटक के बेलगाम से पधारे यज्ञमान राजीव जोशी द्वारा रखी गई कथा की कलश यात्रा का शुभारंभ पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने किया। वृंदावन के कथा वाचक सिद्धार्थ शुक्ला को व्यास पीठ पर स्वामी ने सम्मानित किया। यज्ञमान गोपाल राम गुप्ता, जयपुर ने विधि विधान से पूजन किया। आशीर्वचन में स्वामी ओमानंद ने कहा कि जीवन को मंगलमय बनाने को सच्चे संत की कृपा जरूरी है। सत्संग से ही जीवन का कल्याण संभव है। भागवत कथा सत्संग प्रभु भक्ति और लोक कल्याण की शिक्षा देती है। ईश्वर, जीव, प्रकृति क्या है, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य क्या है , समाज धर्म, आपद धर्म तथा राज धर्म क्या है, यह सब शिक्षा भागवत से मिलती है। भागवत का ज्ञान मानव जीवन के उत्थान की पराकाष्ठा है। भागवत का दर्शन कल्याणकारी है। गीता भवन में गुना मध्य प्रदेश से आए यज्ञमान गजेंद्र सिंह की ओर से प्रारंभ हुई कथा में महामंडलेश्वर रामचरण दास की अमृत वाणी सुनने को श्रद्धालु उमड़े हैं। दास ने कहा कि जीवन में ईश्वर प्राप्ति की मार्ग महापुरुषों की वाणी से मिलता है। इसके अलावा कथा वाचक महामंडलेश्वर कृष्ण चैतन्य स्वामी, सुश्री राधा देव, गोविंद महाराज , भगवान बाबा और महामंडलेश्वर विश्वेश्वरानंद महाराज की भागवत कथाएं चल रही हैं। राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों के श्रद्धालु कथा श्रवण को शुकतीर्थ पधारे हैं। व्यवस्था में सुमन शास्त्री, हर्षमणि, आचार्य जीसी उप्रेती, आशीष माधव शास्त्री, विजय शर्मा आदि का सहयोग रहा।
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