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जनता को खूब भाया थे तरुण सागर के कडुवे प्रवचन
Updated Sun, 02 Sep 2018 12:33 AM IST
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जनता को खूब भाए थे तरुण सागर के कडुवे प्रवचन
मुजफ्फरनगर। जैन मुनि तरुण सागर की असामयिक मृत्यु से जैन समाज के लोग आहत हैं। वह ऐसे संत थे जिनके प्रवचन यहां अन्य हिंदू संतों की तरह टाउन हाल के मैदान में हुए। उनके कडुवे प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग आए। एक सप्ताह तक चले उनके प्रवचन माइक पर भी जो जहां सुनता वहीं उसका ध्यान महाराज श्री की आवाज पर ही हो जाता था। जीवन की कड़वी सच्चाई वह बड़े ही सरल तरीके से लोगों के सामने रखते थे।
जैन समाज के राष्ट्रीय संत तरुण सागर जी महाराज जून 2015 को वहलना के जैन मंदिर में आए थे। वहलना चौक पर ही समाज ने उनका भव्य स्वागत किया। उन्होंने जैन मंदिर में प्रवचन किए। उनकी वाणी में जो सच्चाई बरसती थी वह सबको भाई। सात जून 2015 से उन्होंने टाउन हाल के मैदान में प्रवचन किए। एक सप्ताह तक चले उनके प्रवचन सुनने के लिए लोगों में अधिक उत्साह रहा। टाउन हाल का मैदान उनकी वाणी सुनने को खचाखच भरा रहता था। उनके प्रवचन सुनने के लिए जैन समाज से अधिक हिंदू धर्म के दूसरे लोग आते थे। लोगों पर उनके प्रवचन और आवाज का जादू ऐसा छा जाता था कि जो एक बार प्रवचन सुनने आया वह रोज पहुंचा। उनके द्वारा कड़ुवे प्रवचन में जीवन की जो सच्चाई बताई जाती वह आम आदमी को अच्छी लगती थी। वहलना मंदिर प्रबंध समिति के मंत्री राजकुमार जैन का कहना है कि जैन मुनि के इस तरह चले जाने से सभी लोग आहत हैं। उनका वहलना में आना हमेशा यादगार बना रहेगा। उनके प्रवचन हमेशा लोगों को राह दिखाते रहेंगे।
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मुजफ्फरनगर। जैन मुनि तरुण सागर की असामयिक मृत्यु से जैन समाज के लोग आहत हैं। वह ऐसे संत थे जिनके प्रवचन यहां अन्य हिंदू संतों की तरह टाउन हाल के मैदान में हुए। उनके कडुवे प्रवचन सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग आए। एक सप्ताह तक चले उनके प्रवचन माइक पर भी जो जहां सुनता वहीं उसका ध्यान महाराज श्री की आवाज पर ही हो जाता था। जीवन की कड़वी सच्चाई वह बड़े ही सरल तरीके से लोगों के सामने रखते थे।
जैन समाज के राष्ट्रीय संत तरुण सागर जी महाराज जून 2015 को वहलना के जैन मंदिर में आए थे। वहलना चौक पर ही समाज ने उनका भव्य स्वागत किया। उन्होंने जैन मंदिर में प्रवचन किए। उनकी वाणी में जो सच्चाई बरसती थी वह सबको भाई। सात जून 2015 से उन्होंने टाउन हाल के मैदान में प्रवचन किए। एक सप्ताह तक चले उनके प्रवचन सुनने के लिए लोगों में अधिक उत्साह रहा। टाउन हाल का मैदान उनकी वाणी सुनने को खचाखच भरा रहता था। उनके प्रवचन सुनने के लिए जैन समाज से अधिक हिंदू धर्म के दूसरे लोग आते थे। लोगों पर उनके प्रवचन और आवाज का जादू ऐसा छा जाता था कि जो एक बार प्रवचन सुनने आया वह रोज पहुंचा। उनके द्वारा कड़ुवे प्रवचन में जीवन की जो सच्चाई बताई जाती वह आम आदमी को अच्छी लगती थी। वहलना मंदिर प्रबंध समिति के मंत्री राजकुमार जैन का कहना है कि जैन मुनि के इस तरह चले जाने से सभी लोग आहत हैं। उनका वहलना में आना हमेशा यादगार बना रहेगा। उनके प्रवचन हमेशा लोगों को राह दिखाते रहेंगे।
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