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पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह का स्मृति दिवस

Mon, 25 Dec 2017 12:39 AM IST
Updated Mon, 25 Dec 2017 12:39 AM IST
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पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह का स्मृति दिवस
भेंट में बकरी पाकर अचरज में पड़ गए थे राष्ट्रपति
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मुजफ्फरनगर। देश के सातवें राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह 33 वर्ष पहले भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम शुक्रताल में आए थे। सभा में मंच के नीचे एक सजी धजी बकरी को देख महामहिम अचरज में पड़ गए। वीतराग स्वामी कल्याणदेव ने दूध पीने के लिए ज्ञानी जी को यह बकरी भेंट की थी। संत के संग्रहालय में पूर्व राष्ट्रपति से जुड़ी स्मृतियां संजोईं गईं हैं।

पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह की सोमवार को 23 वीं पुण्यतिथि है। कर्मयोगी संत स्वामी कल्याण देव के निमंत्रण पर आए तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने 15 जनवरी, 1984 को शुकतीर्थ में संत विनोवा भावे गऊ सदन का भूमि पूजन किया था। वे सभा के मंच पर पहुंचे तो नीचे एक सजी धजी बकरी देख कर अचरज में पड़ गए। ज्ञानी जी ने शिक्षा ऋषि की ओर देखा। वीतराग संत ने कहा कि बकरी का दूध स्वास्थ्यवर्द्धक और रोगनाशक होता है। बकरी का उपहार आपको भेंट किया गया है। ज्ञानी जी बोले, स्वामी कल्याणदेव नेक और परोपकारी संत है, जिन्होंने भारत की संस्कृति को जीवित रखा है। उनकी भेंट की गई बकरी राष्ट्रपति भवन में पलेगी। सूबे के तत्कालीन काबीना मंत्री विद्याभूषण और राज्यसभा सांसद रामचंद्र विकल भी संत की भेंट को देख मंत्रमुग्ध हो गए थे। संत के परम शिष्य स्वामी ओमानंद सरस्वती बताते हैं कि ज्ञानी जैल सिंह की गुरुदेव के प्रति अगाध श्रद्धा थी। एक बार शिक्षा ऋषि अस्वस्थ हो गए, उन्हें दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया। 24 जून, 1986 को राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह उन्हें देखने के लिए अस्पताल पहुंचे थे। पूर्व राष्ट्रपति की शुकतीर्थ के संत से जुड़ी अनेक स्मृतियां संग्रहालय की धरोहर है। उस समय राष्ट्रपति के ओएसडी मुजफ्फरनगर निवासी डॉ परमानंद पांचाल थे। पांचाल बताते है कि ज्ञानी जैल सिंह शिक्षा ऋषि की सादगी के कायल थे। शुक्रताल से बस द्वारा स्वामी कल्याणदेव दिल्ली के आईएसबीटी पहुंचे और पैदल ही राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे। जब ये बात ज्ञानी जी को पता चली तो वे संत के परम भक्त हो गए थे।
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