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पेपर मिलों के लिए रियायतों की मांग
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पेपर मिलों के लिए रियायतों की मांग
मुजफ्फरनगर। सहारनपुर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पेपर मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन से जुड़े उद्यमियों ने ज्ञापन सौंपकर न केवल पेपर मिलों की समस्याओं से अवगत कराया, वहीं पेपर मिलों के लिए रियायतों की भी मांग की गई।
शहर के प्रमुख उद्यमी भीमसेन कंसल, राकेश बिंदल व पूर्व चेयरमैन पंकज अग्रवाल के नेतृत्व में पेपर मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के पदाधिकारी शनिवार को सहारनपुर में जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले। पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर बताया कि सूबे में कुल 85 पेपर मिल हैं, जो हर साल 45 लाख टन पेपर उत्पादित करती हैं। इसमें से मुजफ्फरनगर की पेपर मिलें अकेले 17 लाख टन पेपर का उत्पादन करती हैं। उद्यमियों ने बताया कि देश की अधिकांश पेपर मिलें उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में हैं। उत्तराखंड में बिजली सस्ती होने से सूबे की पेपर मिलों को कड़ी प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए उत्तर प्रदेश में बिजली सस्ती किए जाने की जरूरत है। उद्यमियों के अनुसार पेपर बनाने के लिए अधिकांश रद्दी विदेशों से आयात होती है, जिसका भाड़ा यहां तक लाने में 4500 रुपये प्रति टन पड़ता है। इसलिए यूपी में ड्राई पोर्ट बनाए जाने के साथ ही भाड़े पर सब्सिडी दिए जाने के साथ ही नए उद्योगों की तरह पेपर मिलों को भी इंसेंटिव दिए जाने, नए उद्योग लगाने के लिए जमीन के सर्किल रेट कम किए जाने और विदेशी कागज पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाए जाने की भी मांग की गई। स्टील उद्योग से जुड़े सतीश गोयल, सचिन गोयल, सौरभ स्वरुप आदि ने भी सीएम योगी को ज्ञापन दिया।
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मुजफ्फरनगर। सहारनपुर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पेपर मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन से जुड़े उद्यमियों ने ज्ञापन सौंपकर न केवल पेपर मिलों की समस्याओं से अवगत कराया, वहीं पेपर मिलों के लिए रियायतों की भी मांग की गई।
शहर के प्रमुख उद्यमी भीमसेन कंसल, राकेश बिंदल व पूर्व चेयरमैन पंकज अग्रवाल के नेतृत्व में पेपर मैन्यूफैक्चरिंग एसोसिएशन के पदाधिकारी शनिवार को सहारनपुर में जाकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले। पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर बताया कि सूबे में कुल 85 पेपर मिल हैं, जो हर साल 45 लाख टन पेपर उत्पादित करती हैं। इसमें से मुजफ्फरनगर की पेपर मिलें अकेले 17 लाख टन पेपर का उत्पादन करती हैं। उद्यमियों ने बताया कि देश की अधिकांश पेपर मिलें उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड में हैं। उत्तराखंड में बिजली सस्ती होने से सूबे की पेपर मिलों को कड़ी प्रतिस्पर्द्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए उत्तर प्रदेश में बिजली सस्ती किए जाने की जरूरत है। उद्यमियों के अनुसार पेपर बनाने के लिए अधिकांश रद्दी विदेशों से आयात होती है, जिसका भाड़ा यहां तक लाने में 4500 रुपये प्रति टन पड़ता है। इसलिए यूपी में ड्राई पोर्ट बनाए जाने के साथ ही भाड़े पर सब्सिडी दिए जाने के साथ ही नए उद्योगों की तरह पेपर मिलों को भी इंसेंटिव दिए जाने, नए उद्योग लगाने के लिए जमीन के सर्किल रेट कम किए जाने और विदेशी कागज पर एंटी डंपिंग ड्यूटी लगाए जाने की भी मांग की गई। स्टील उद्योग से जुड़े सतीश गोयल, सचिन गोयल, सौरभ स्वरुप आदि ने भी सीएम योगी को ज्ञापन दिया।
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