{"_id":"5d0fc46c8ebc3e10da447de7","slug":"15613143965-muzaffarnagar-news139","type":"story","status":"publish","title_hn":"माता-पिता की सेवा जीवन का सच्चा तीर्थ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माता-पिता की सेवा जीवन का सच्चा तीर्थ
विज्ञापन
माता-पिता की सेवा ही जीवन का सच्चा तीर्थ
मुजफ्फरनगर। गांव बिजोपुरा में स्वामी जिलानंद के निर्देशन में आयोजित आर्य समाज के वार्षिकोत्सव में ग्रामीणों ने यज्ञ में आहुतियां दी। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि माता-पिता की आज्ञा का पालन और उनकी सेवा सच्चा तीर्थ है।
समापन सम्मेलन में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि असहाय, गरीब और निर्बल की उपेक्षा, शोषण, उत्पीड़न महापाप है। ईश्वर न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अजर और अमर है। पाप का फल अवश्य भोगना पड़ता है। वाणी, व्यवहार से भी किसी को दु:खी करना अनुचित है। जीवन क्रांति को युवा वैदिक साहित्य पढ़े, आर्य समाज से जुड़े। ऋषिवर दयानंद के सिद्धांतों, आदर्शों को अपनाए। वेद मनीषी डॉ धीरज आर्य ने मानव जीवन कैसे उत्कृष्ट बनाए विषय पर व्याख्या की। शुकतीर्थ से पधारे स्वामी सत्यवेश ने कविताओं के माध्यम से शाकाहार अपनाने, नशे का त्याग करने को प्रेरित किया। स्वामी योगानंद ने कहा कि वेद मंत्रोच्चार से किया यज्ञ प्राणिमात्र को श्रेष्ठ कर्म का अनुगामी बनाता है। भजनोपदेशिका अंजलि आर्या ने बेटियों को यज्ञ, योग और गुरुकुल से जोड़ने का आह्वान किया। छात्रा खुशी आर्या ने ऋषि गाथा सुनाई। अर्णव आर्य, रविन आर्य, महाशय बाबूराम ने भी भजन प्रस्तुति दी। स्वामी जिलानंद, दौलतराम, ग्राम प्रधान गीता रानी ने अतिथियों का आभार जताया। डॉ धीरज कुमार आर्य यज्ञ के ब्रह्मा और यज्ञमान डॉ रामकुमार सपत्नीक रहे। आनंद पाल सिंह आर्य, आरपी शर्मा, मंगत सिंह आर्य, गजेंद्र सिंह राणा, सहदेव सिंह आर्य, रविन्द्र कुमार, तेलूराम धीमान आदि मौजूद रहे। संचालन आरपी शर्मा ने किया।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। गांव बिजोपुरा में स्वामी जिलानंद के निर्देशन में आयोजित आर्य समाज के वार्षिकोत्सव में ग्रामीणों ने यज्ञ में आहुतियां दी। वैदिक संस्कार चेतना अभियान संयोजक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि माता-पिता की आज्ञा का पालन और उनकी सेवा सच्चा तीर्थ है।
समापन सम्मेलन में आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि असहाय, गरीब और निर्बल की उपेक्षा, शोषण, उत्पीड़न महापाप है। ईश्वर न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अजर और अमर है। पाप का फल अवश्य भोगना पड़ता है। वाणी, व्यवहार से भी किसी को दु:खी करना अनुचित है। जीवन क्रांति को युवा वैदिक साहित्य पढ़े, आर्य समाज से जुड़े। ऋषिवर दयानंद के सिद्धांतों, आदर्शों को अपनाए। वेद मनीषी डॉ धीरज आर्य ने मानव जीवन कैसे उत्कृष्ट बनाए विषय पर व्याख्या की। शुकतीर्थ से पधारे स्वामी सत्यवेश ने कविताओं के माध्यम से शाकाहार अपनाने, नशे का त्याग करने को प्रेरित किया। स्वामी योगानंद ने कहा कि वेद मंत्रोच्चार से किया यज्ञ प्राणिमात्र को श्रेष्ठ कर्म का अनुगामी बनाता है। भजनोपदेशिका अंजलि आर्या ने बेटियों को यज्ञ, योग और गुरुकुल से जोड़ने का आह्वान किया। छात्रा खुशी आर्या ने ऋषि गाथा सुनाई। अर्णव आर्य, रविन आर्य, महाशय बाबूराम ने भी भजन प्रस्तुति दी। स्वामी जिलानंद, दौलतराम, ग्राम प्रधान गीता रानी ने अतिथियों का आभार जताया। डॉ धीरज कुमार आर्य यज्ञ के ब्रह्मा और यज्ञमान डॉ रामकुमार सपत्नीक रहे। आनंद पाल सिंह आर्य, आरपी शर्मा, मंगत सिंह आर्य, गजेंद्र सिंह राणा, सहदेव सिंह आर्य, रविन्द्र कुमार, तेलूराम धीमान आदि मौजूद रहे। संचालन आरपी शर्मा ने किया।
विज्ञापन