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किशोरी के अपहरणकर्ता को पांच साल की सजा
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मुजफ्फरनगर। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने नाबालिग किशोरी को बहला-फुसला कर ले जाने वाले एक अभियुक्त को पांच वर्ष का कारावास और सात हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। दो आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है जबकि मुख्य अभियुक्त के नाबालिग होने के कारण उसका मुकदमा किशोर न्यायालय में लंबित है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार शामली के थाना आर्दश मंडी पर एक कालोनी निवासी ने 2 दिसम्बर 2012 को दर्ज मुकदमे में बताया था कि 28 नवंबर 2012 को जब उसकी नाबालिग बेटी घर पर अकेली थी। तब मोनू उर्फ अंता पुत्र ओमवीर निवासी रेलपार कालोनी, अंजू पुत्री ओमवीर, इंद्रपाल पुत्र साधूराम, विजय पुत्र प्रदीप उसके घर आए और उसकी बेटी को बहला-फुसला कर कार में बैठा कर ले गए । पुलिस ने किशोरी की बरामदगी 16 मई 2013 को की और उसका मेडिकल परीक्षण कराकर 21 मई को कोर्ट में पेश कर उसका ब्यान कराया। अदालत ने किशोरी को नाबालिग मानते हुए उसे माता-पिता के हवाले कर दिया। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराज सिंह की अदालत फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-2 में हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फिरोज अली ने कोर्ट में सात गवाह पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त विजय पुत्र प्रदीप को दोषी करार देते हुए धारा 366 में पांच वर्ष का कारावास व पांच हजार रुपये का जुर्माना, धारा 346 में एक वर्ष का कारावास, धारा 354 ए में दो वर्ष का कारावास व दो हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मुकदमे का मुख्य आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसका मुकदमा किशोर न्यायालय में लंबित है। सह अभियुक्त अंजू और इंद्रपाल पुत्र साधूराम को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार शामली के थाना आर्दश मंडी पर एक कालोनी निवासी ने 2 दिसम्बर 2012 को दर्ज मुकदमे में बताया था कि 28 नवंबर 2012 को जब उसकी नाबालिग बेटी घर पर अकेली थी। तब मोनू उर्फ अंता पुत्र ओमवीर निवासी रेलपार कालोनी, अंजू पुत्री ओमवीर, इंद्रपाल पुत्र साधूराम, विजय पुत्र प्रदीप उसके घर आए और उसकी बेटी को बहला-फुसला कर कार में बैठा कर ले गए । पुलिस ने किशोरी की बरामदगी 16 मई 2013 को की और उसका मेडिकल परीक्षण कराकर 21 मई को कोर्ट में पेश कर उसका ब्यान कराया। अदालत ने किशोरी को नाबालिग मानते हुए उसे माता-पिता के हवाले कर दिया। इस मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश बलराज सिंह की अदालत फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-2 में हुई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता फिरोज अली ने कोर्ट में सात गवाह पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त विजय पुत्र प्रदीप को दोषी करार देते हुए धारा 366 में पांच वर्ष का कारावास व पांच हजार रुपये का जुर्माना, धारा 346 में एक वर्ष का कारावास, धारा 354 ए में दो वर्ष का कारावास व दो हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मुकदमे का मुख्य आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसका मुकदमा किशोर न्यायालय में लंबित है। सह अभियुक्त अंजू और इंद्रपाल पुत्र साधूराम को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया।
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