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संपूर्ण भारत में गुड़ से हमारी पहचान:टिकैत
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संपूर्ण भारत में गुड़ से हमारी पहचान: टिकैत
मुजफ्फरनगर। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि देश के हर कोने में मुजफ्फरनगर की पहचान गुड़ से है। मुंबई में हम जाते हैं तो लोग गुड़ के बारे में पूछते हैं। गुड़ बनाने वाले कोल्हू मालिकों का बिजली विभाग सबसे अधिक शोषण करता है। कोल्हुओं पर सरकार को फिक्स चार्ज करना चाहिए। इसी से भ्रष्टाचार रुकेगा।
श्रीराम कॉलेज में गुड़ महोत्सव में टिकैत ने कहा कि गुड़ से हमारी पहचान है। भारत के हर राज्य में हम गुड़ से ही जाने जाते हैं। यहां के गुड़ की मिठास पूरे हिंदुस्तान में जाती है। गुड़ महोत्सव यदि जनवरी के आखिर और फरवरी के शुरू में होता तो यहां गुड़ बेचने वाले और खरीदने वालों की लाइन लगी होती। प्रदेश सरकारों की गलत नीतियों से कोल्हू संचालकों का बिजली विभाग शोषण करता रहा है। सही शब्दों में विभाग के लोग कोल्हू मालिकों को लूटते हैं। एक फिक्स चार्ज हो जाए तो यह लूट बंद हो जाए। हाल ये है कि जेई ही 50 हजार तक की रिश्वत इन कोल्हू वालों से ले लेता है। ढाई लाख तक की रसीद अलग से काट कर दे देता है। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव पूरी दुनिया में जिस गुड़ की ब्रांडिंग कर रहे है, यह भी मुजफ्फरनगर में ही कई स्थानों पर बन रहा है। गुड़ का लाभ किसानों को मिलना चाहिए।
गुड़ का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित हो
मुजफ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अशोक बालियान ने कहा कि जिस तरह चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित हुआ है, इसी तरह गुड़ का समर्थन मूल्य भी घोषित होना चाहिए। इसी से कोल्हू मालिकों को घाटे से उबारा जा सकता है और व्यापारी को भी नुकसान नहीं होगा।
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कोल्हू प्रदर्शनी में रखे
मुजफ्फरनगर। गुड़ महोत्सव की प्रदर्शनी में लाल किले पर कई दिन तक चला कोल्हू भी रखा गया। भाकियू के आंदोलन के दौरान 1995 में यह कोल्हू लाल किले पर भाकियू के लोगों ने रस निकालने के लिए रखा था। इसे यहां प्रदर्शनी में रखा गया।
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मुजफ्फरनगर। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि देश के हर कोने में मुजफ्फरनगर की पहचान गुड़ से है। मुंबई में हम जाते हैं तो लोग गुड़ के बारे में पूछते हैं। गुड़ बनाने वाले कोल्हू मालिकों का बिजली विभाग सबसे अधिक शोषण करता है। कोल्हुओं पर सरकार को फिक्स चार्ज करना चाहिए। इसी से भ्रष्टाचार रुकेगा।
श्रीराम कॉलेज में गुड़ महोत्सव में टिकैत ने कहा कि गुड़ से हमारी पहचान है। भारत के हर राज्य में हम गुड़ से ही जाने जाते हैं। यहां के गुड़ की मिठास पूरे हिंदुस्तान में जाती है। गुड़ महोत्सव यदि जनवरी के आखिर और फरवरी के शुरू में होता तो यहां गुड़ बेचने वाले और खरीदने वालों की लाइन लगी होती। प्रदेश सरकारों की गलत नीतियों से कोल्हू संचालकों का बिजली विभाग शोषण करता रहा है। सही शब्दों में विभाग के लोग कोल्हू मालिकों को लूटते हैं। एक फिक्स चार्ज हो जाए तो यह लूट बंद हो जाए। हाल ये है कि जेई ही 50 हजार तक की रिश्वत इन कोल्हू वालों से ले लेता है। ढाई लाख तक की रसीद अलग से काट कर दे देता है। उन्होंने कहा कि बाबा रामदेव पूरी दुनिया में जिस गुड़ की ब्रांडिंग कर रहे है, यह भी मुजफ्फरनगर में ही कई स्थानों पर बन रहा है। गुड़ का लाभ किसानों को मिलना चाहिए।
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गुड़ का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित हो
मुजफ्फरनगर। पीजेंट वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष अशोक बालियान ने कहा कि जिस तरह चीनी का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित हुआ है, इसी तरह गुड़ का समर्थन मूल्य भी घोषित होना चाहिए। इसी से कोल्हू मालिकों को घाटे से उबारा जा सकता है और व्यापारी को भी नुकसान नहीं होगा।
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कोल्हू प्रदर्शनी में रखे
मुजफ्फरनगर। गुड़ महोत्सव की प्रदर्शनी में लाल किले पर कई दिन तक चला कोल्हू भी रखा गया। भाकियू के आंदोलन के दौरान 1995 में यह कोल्हू लाल किले पर भाकियू के लोगों ने रस निकालने के लिए रखा था। इसे यहां प्रदर्शनी में रखा गया।