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गठबंधन पर भारी पड़ा बीजेपी और संघ का प्रबंधन
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गठबंधन पर भारी पड़ा बीजेपी और संघ का प्रबंधन
मुजफ्फरनगर। कांटे के संघर्ष में भाजपा ने बूथ स्तर तक कारगर मैनेजमेंट के दम पर लगातार दूसरी बार यह लोकसभा सीट जीतने का लक्ष्य पूरा किया। गठबंधन की वजह से दलित, मुस्लिम और जाट वोटों का गणित बेहद मजबूत दिख रहा था, मगर, भाजपा ने फुल प्रूफ प्लानिंग से अपने वोट समीकरण को तरीके से साधे रखा। मतदान के वक्त भाजपा का अपना वोट प्रतिशत बढ़ाने का कदम गठबंधन पर भारी पड़ा। बेहद कम अंतर से चौधरी अजित सिंह को डॉ संजीव बालियान से पराजय मिली।
गहरी रणनीति और प्रबंधन से भाजपा ने मुजफ्फरनगर सीट जीती है। वोट गणित की दृष्टि से रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं गठबंधन प्रत्याशी चौधरी अजित सिंह चुनावी रण में मजबूत नजर आ रहे थे। सपा, बसपा और रालोद के परंपरागत मुस्लिम, दलित और जाट मतों की संख्या का आंकड़ा भाजपा के लिए चुनौती था। छोटे चौधरी को कांग्रेस का भी समर्थन मिलने से चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया। ऐसे में भाजपा का बूथ स्तर तक असरदार मैनेजमेंट काम आया। चुनाव से तीन माह पहले ही आरएसएस के निर्देशन में रणनीति बना ली गई थी। शहर में तीन दिन आरएसएस के सर कार्यवाह सुरेश जोशी भैय्या जी ने प्रवास किया। संघ के पुराने पदाधिकारियों और भाजपाइयों को गुरुमंत्र दिया।
वेस्ट यूपी के 14 जिलों की आरएसएस की टीम यहां जुटी थी। उसी प्लानिंग के तहत गठबंधन के वोट गणित से बाजी जीतने को भाजपा ने चुनाव में अपने परंपरागत मतों का वोट प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया। खतौली विधानसभा सीट में 72 प्रतिशत मतदान होने का फायदा भाजपा को ही मिला। इसके अलावा पार्टी कैडर ने राजपूत, सैनी, गुर्जर, कश्यप, पाल, त्यागी आदि जाति बहुल गांवों पर फोकस किया। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जिम्मा सौंपा। मतदान को घर से वोटरों को बूथ तक लाने की व्यवस्था बनाई। यूथ में उत्साह भी जीत में काम आया। दूरदराज बिजनेस और जॉब से छुट्टी लेकर युवा वोटिंग करने आए।
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सोशल मीडिया पर प्रदेश संगठन ने कार्यकर्ताओं को जोड़े रखा। लोकल स्तर पर लोकसभा और विधानसभा समिति के पदाधिकारियों का व्हाट्सअप ग्रुप बना कर मॉनिटरिंग की गई। केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को अधिक शेयर किया गया। मेरठ के सिवाया में हुई पीएम नरेंद्र मोदी की पहली रैली ने मतदाताओं में भाजपा का शंखनाद बजा दिया। टाउन हाल के मैदान में उमा भारती और रतनपुरी में सीएम योगी आदित्यनाथ की जनसभा भी जोश जगाने में कामयाब हुई। शहर आए चुनाव समिति के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जिला संगठन और वरिष्ठ भाजपाइयों से अधिकाधिक मतदान पर वर्क करने की नीति तय की। भाजपा के सफल मैनेजमेंट के आगे चुनाव को लेकर गठबंधन की रणनीति चूक गई। सपा, बसपा और रालोद के नेताओं में समन्वय की कमी शिकस्त की वजह बनी। मंचों पर गठबंधन की पार्टियों के नेता दिखाई जरूर दिए, मगर बूथ स्तर पर वैसा असर नहीं था। कमजोर संगठन का नुकसान भी रालोद का हुआ। गठबंधन की ओर से सिर्फ देवबंद में बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की एक चुनावी सभा हुई। गठबंधन के प्रचार का जिम्मा चौधरी अजित सिंह, जयंत चौधरी और चारु चौधरी ने ही संभाला था। छोटे चौधरी ने विकास का कोई विजन प्रचार में नहीं रखा। पीएम मोदी पर किए गए तंज भी मतदाताओं को नहीं लुभा पाए।
बुढ़ाना और चरथावल में मिली रालोद को बढ़त
मुजफ्फरनगर। संसदीय क्षेत्र के तीन विधानसभा क्षेत्रों खतौली, सरधना और मुजफ्फरनगर शहर में भाजपा की जीत ने ही डॉ संजीव बालियान को दुबारा सांसद बनने का श्रेय दिलाया। खतौली में 15428, सरधना में 7127, शहर में 14197 मतों से भाजपा ने गठबंधन पर लीड बनाई। चरथावल और बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र में गठबंधन का जादू चला। चौधरी अजित सिंह की बुढ़ाना में 18271 तथा चरथावल में 16430 मतों की भाजपा पर बढ़त रही।
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मुजफ्फरनगर। कांटे के संघर्ष में भाजपा ने बूथ स्तर तक कारगर मैनेजमेंट के दम पर लगातार दूसरी बार यह लोकसभा सीट जीतने का लक्ष्य पूरा किया। गठबंधन की वजह से दलित, मुस्लिम और जाट वोटों का गणित बेहद मजबूत दिख रहा था, मगर, भाजपा ने फुल प्रूफ प्लानिंग से अपने वोट समीकरण को तरीके से साधे रखा। मतदान के वक्त भाजपा का अपना वोट प्रतिशत बढ़ाने का कदम गठबंधन पर भारी पड़ा। बेहद कम अंतर से चौधरी अजित सिंह को डॉ संजीव बालियान से पराजय मिली।
गहरी रणनीति और प्रबंधन से भाजपा ने मुजफ्फरनगर सीट जीती है। वोट गणित की दृष्टि से रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं गठबंधन प्रत्याशी चौधरी अजित सिंह चुनावी रण में मजबूत नजर आ रहे थे। सपा, बसपा और रालोद के परंपरागत मुस्लिम, दलित और जाट मतों की संख्या का आंकड़ा भाजपा के लिए चुनौती था। छोटे चौधरी को कांग्रेस का भी समर्थन मिलने से चुनावी मुकाबला दिलचस्प हो गया। ऐसे में भाजपा का बूथ स्तर तक असरदार मैनेजमेंट काम आया। चुनाव से तीन माह पहले ही आरएसएस के निर्देशन में रणनीति बना ली गई थी। शहर में तीन दिन आरएसएस के सर कार्यवाह सुरेश जोशी भैय्या जी ने प्रवास किया। संघ के पुराने पदाधिकारियों और भाजपाइयों को गुरुमंत्र दिया।
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वेस्ट यूपी के 14 जिलों की आरएसएस की टीम यहां जुटी थी। उसी प्लानिंग के तहत गठबंधन के वोट गणित से बाजी जीतने को भाजपा ने चुनाव में अपने परंपरागत मतों का वोट प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया। खतौली विधानसभा सीट में 72 प्रतिशत मतदान होने का फायदा भाजपा को ही मिला। इसके अलावा पार्टी कैडर ने राजपूत, सैनी, गुर्जर, कश्यप, पाल, त्यागी आदि जाति बहुल गांवों पर फोकस किया। बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जिम्मा सौंपा। मतदान को घर से वोटरों को बूथ तक लाने की व्यवस्था बनाई। यूथ में उत्साह भी जीत में काम आया। दूरदराज बिजनेस और जॉब से छुट्टी लेकर युवा वोटिंग करने आए।
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सोशल मीडिया पर प्रदेश संगठन ने कार्यकर्ताओं को जोड़े रखा। लोकल स्तर पर लोकसभा और विधानसभा समिति के पदाधिकारियों का व्हाट्सअप ग्रुप बना कर मॉनिटरिंग की गई। केंद्र और प्रदेश सरकार की उपलब्धियों को अधिक शेयर किया गया। मेरठ के सिवाया में हुई पीएम नरेंद्र मोदी की पहली रैली ने मतदाताओं में भाजपा का शंखनाद बजा दिया। टाउन हाल के मैदान में उमा भारती और रतनपुरी में सीएम योगी आदित्यनाथ की जनसभा भी जोश जगाने में कामयाब हुई। शहर आए चुनाव समिति के प्रदेश अध्यक्ष एवं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने जिला संगठन और वरिष्ठ भाजपाइयों से अधिकाधिक मतदान पर वर्क करने की नीति तय की। भाजपा के सफल मैनेजमेंट के आगे चुनाव को लेकर गठबंधन की रणनीति चूक गई। सपा, बसपा और रालोद के नेताओं में समन्वय की कमी शिकस्त की वजह बनी। मंचों पर गठबंधन की पार्टियों के नेता दिखाई जरूर दिए, मगर बूथ स्तर पर वैसा असर नहीं था। कमजोर संगठन का नुकसान भी रालोद का हुआ। गठबंधन की ओर से सिर्फ देवबंद में बसपा सुप्रीमो मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की एक चुनावी सभा हुई। गठबंधन के प्रचार का जिम्मा चौधरी अजित सिंह, जयंत चौधरी और चारु चौधरी ने ही संभाला था। छोटे चौधरी ने विकास का कोई विजन प्रचार में नहीं रखा। पीएम मोदी पर किए गए तंज भी मतदाताओं को नहीं लुभा पाए।
बुढ़ाना और चरथावल में मिली रालोद को बढ़त
मुजफ्फरनगर। संसदीय क्षेत्र के तीन विधानसभा क्षेत्रों खतौली, सरधना और मुजफ्फरनगर शहर में भाजपा की जीत ने ही डॉ संजीव बालियान को दुबारा सांसद बनने का श्रेय दिलाया। खतौली में 15428, सरधना में 7127, शहर में 14197 मतों से भाजपा ने गठबंधन पर लीड बनाई। चरथावल और बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र में गठबंधन का जादू चला। चौधरी अजित सिंह की बुढ़ाना में 18271 तथा चरथावल में 16430 मतों की भाजपा पर बढ़त रही।