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अयोध्या मसले पर पीएम मोदी का बयान कुछ हद तक दुरुस्त: दारुल उलूम
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देवबंद (सहारनपुर)। अयोध्या मामले में पीएम नरेंद्र मोदी के अध्यादेश न लाए जाने तथा अदालत के फैसले का इंतजार करने वाले बयान को दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कुछ हद तक दुरुस्त बताया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर मुल्क का एक बड़ा तबका सुप्रीम कोर्ट के फैसले को तरजीह दे रहा है।
बुधवार को टीवी चैनलों पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साक्षात्कार को लेकर मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि अयोध्या मसले को लेकर पीएम मोदी ने जो बयान दिया है उसे कुछ हद तक दुरुस्त कहा जा सकता है। क्योंकि मुल्क का एक बड़ा तबका अदालत के फैसले को तरजीह दे रहा है। इसलिए हम सबको भी इस फैसला की प्रतीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद से संबंधित तमाम फरीक (पक्षकार) भी अदालत के फैसले को मानने के लिए जहनी तौर पर तैयार हैं और इस बात को वह अपने बयानों में अनेकों बार दोहरा भी चुके हैं। उधर, दारुल उलूम फारुकिया के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी ने पीएम मोदी के इंटरव्यू को पूरी तरह फिक्स बताते हुए कहा कि जितने भी सवाल पीएम से किए गए वो उनके कार्यालय की ओर से दिए गए थे। जिसकी बुनियादी वजह यह है कि जब वह जवाब दे रहे थे तो उनसे कोई क्रास सवाल नहीं किए जा रहे थे। इतना ही नहीं उन्होंने स्पष्ट रूप से यह भी नहीं कहा कि अयोध्या मसले पर वह सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानेंगे। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर भी पीएम मोदी ने खुलकर कोई जवाब नहीं दिया।
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बुधवार को टीवी चैनलों पर आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साक्षात्कार को लेकर मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने कहा कि अयोध्या मसले को लेकर पीएम मोदी ने जो बयान दिया है उसे कुछ हद तक दुरुस्त कहा जा सकता है। क्योंकि मुल्क का एक बड़ा तबका अदालत के फैसले को तरजीह दे रहा है। इसलिए हम सबको भी इस फैसला की प्रतीक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद से संबंधित तमाम फरीक (पक्षकार) भी अदालत के फैसले को मानने के लिए जहनी तौर पर तैयार हैं और इस बात को वह अपने बयानों में अनेकों बार दोहरा भी चुके हैं। उधर, दारुल उलूम फारुकिया के मोहतमिम मौलाना नूरुलहुदा कासमी ने पीएम मोदी के इंटरव्यू को पूरी तरह फिक्स बताते हुए कहा कि जितने भी सवाल पीएम से किए गए वो उनके कार्यालय की ओर से दिए गए थे। जिसकी बुनियादी वजह यह है कि जब वह जवाब दे रहे थे तो उनसे कोई क्रास सवाल नहीं किए जा रहे थे। इतना ही नहीं उन्होंने स्पष्ट रूप से यह भी नहीं कहा कि अयोध्या मसले पर वह सुप्रीम कोर्ट का फैसला मानेंगे। उन्होंने कहा कि मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर भी पीएम मोदी ने खुलकर कोई जवाब नहीं दिया।
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