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सांझक के शिव पार्वती मंदिर में जुटते है कांवडिय़े
Updated Wed, 08 Aug 2018 12:34 AM IST
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सांझक के शिव पार्वती मंदिर में जुटते है कांवड़िये
शाहपुर। सांझक गांव के शिव-पार्वती मंदिर की कांवड़ियों में अगाध आस्था है। प्राचीन मंदिर में हजारों शिव भक्त गोमुख और हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर कांवड़ यात्रा के बाद यहां भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करते हैं।
मुजफ्फरनगर-शाहपुर मार्ग पर गांव सांझक में अति प्राचीन शिव पार्वती मंदिर स्थित है। ग्रामीणों के मुताबिक बरवाला गांव के कुछ लोग यहां आकर बसे और खेती करने लगे। उनकी आराध्य संजो देवी थी, जिसकी वो पूजा करते थे। संजो देवी के नाम पर ही सांझक गांव नाम पड़ा। मंदिर जीर्णोद्धार की खुदाई के वक्त यहां दो पिंडियां दिखाई दी। एक पिंडी को माता पार्वती और दूसरी को भगवान भोलेनाथ का स्वरूप मान कर ग्रामीण पूजा करने लगे। वर्ष 1965 में मंदिर निर्माण का निर्णय लिया गया और बरवाला एवं सांझक के हर घर से एक सदस्य ने कार सेवा की। खुदाई में पिंडिंयों का धरती में समाया सिरा नहीं दिखाई दिया। उसी पवित्र भूमि पर यह शिव-पार्वती मंदिर स्थापित किया गया, जो शिव भक्तों की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि 16 सोमवार बेल पत्र के पास पंचामृत से अभिषेक करने पर मनोकामना पूर्ण होती है।
हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है मंदिर
शाहपुर। मंदिर समिति अध्यक्ष बरवाला के जवाहर सिंह कहते हैं कि श्रावण माह में मंदिर में हजारों शिव भक्त जलाभिषेक करते है। ग्राम प्रधान लुकमान अली ने बताया कि यह मंदिर हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। कांवड़ यात्रा के वक्त दोनों समुदाय के लोग शिव भक्तों की सेवा करते है। एतिहासिक मंदिर से सांझक का गौरव बढ़ा है।
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कांवड़ियों पर की गई पुष्प वर्षा
मीरापुर। गंगनहर पुल पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। भाजपा नेता डॉ वीरपाल निर्वाल, आचार्य अजय कृष्ण शास्त्री, सुधीर प्रजापति, पंकज माहेश्वरी, यशवंत सैनी, बीडीओ ब्रह्मपाल सिंह, इंस्पेक्टर बृजेश प्रताप सिंह, इंस्पेक्टर यतेंद्र सिंह व सेवार्थ क्लव भोपा के सदस्य मौजूद रहे।
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शाहपुर। सांझक गांव के शिव-पार्वती मंदिर की कांवड़ियों में अगाध आस्था है। प्राचीन मंदिर में हजारों शिव भक्त गोमुख और हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर कांवड़ यात्रा के बाद यहां भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करते हैं।
मुजफ्फरनगर-शाहपुर मार्ग पर गांव सांझक में अति प्राचीन शिव पार्वती मंदिर स्थित है। ग्रामीणों के मुताबिक बरवाला गांव के कुछ लोग यहां आकर बसे और खेती करने लगे। उनकी आराध्य संजो देवी थी, जिसकी वो पूजा करते थे। संजो देवी के नाम पर ही सांझक गांव नाम पड़ा। मंदिर जीर्णोद्धार की खुदाई के वक्त यहां दो पिंडियां दिखाई दी। एक पिंडी को माता पार्वती और दूसरी को भगवान भोलेनाथ का स्वरूप मान कर ग्रामीण पूजा करने लगे। वर्ष 1965 में मंदिर निर्माण का निर्णय लिया गया और बरवाला एवं सांझक के हर घर से एक सदस्य ने कार सेवा की। खुदाई में पिंडिंयों का धरती में समाया सिरा नहीं दिखाई दिया। उसी पवित्र भूमि पर यह शिव-पार्वती मंदिर स्थापित किया गया, जो शिव भक्तों की श्रद्धा और आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि 16 सोमवार बेल पत्र के पास पंचामृत से अभिषेक करने पर मनोकामना पूर्ण होती है।
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हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है मंदिर
शाहपुर। मंदिर समिति अध्यक्ष बरवाला के जवाहर सिंह कहते हैं कि श्रावण माह में मंदिर में हजारों शिव भक्त जलाभिषेक करते है। ग्राम प्रधान लुकमान अली ने बताया कि यह मंदिर हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। कांवड़ यात्रा के वक्त दोनों समुदाय के लोग शिव भक्तों की सेवा करते है। एतिहासिक मंदिर से सांझक का गौरव बढ़ा है।
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कांवड़ियों पर की गई पुष्प वर्षा
मीरापुर। गंगनहर पुल पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को कांवड़ियों पर पुष्प वर्षा कर उनका स्वागत किया। भाजपा नेता डॉ वीरपाल निर्वाल, आचार्य अजय कृष्ण शास्त्री, सुधीर प्रजापति, पंकज माहेश्वरी, यशवंत सैनी, बीडीओ ब्रह्मपाल सिंह, इंस्पेक्टर बृजेश प्रताप सिंह, इंस्पेक्टर यतेंद्र सिंह व सेवार्थ क्लव भोपा के सदस्य मौजूद रहे।