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इंसाफ मिलने के बाद पीड़िता को घर का इंतजार
Updated Tue, 13 Mar 2018 11:24 PM IST
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पुरकाजी (मुजफ्फरनगर)।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्नेहलता को इंसाफ तो दिला दिया है, लेकिन पीड़िता को आशियाना मिलने का इंतजार है। कानूनी लड़ाई लड़ने में जिस घर को गिरवी रखा था, उस वक्त मकान का मूल्य कई लाख था। मजबूरी में पीड़िता ने उसे सवा तीन लाख रुपये में गिरवी रखा। हालांकि बच्चों को लेकर जो सपने देखे थे, वह स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने चकनाचूर कर दिए। बेटों की पढ़ाई छूटने से ज्यादा उनके मजदूर बनने का गम है। परिवार उस मनहूस घड़ी को कोसते नहीं थकता है।
पुरकाजी में डिलीवरी के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से एक महिला की जिंदगी तबाह हो गई। इसी क़ड़ी में जिंदगी के साथ जुस्तजू कर पाई-पाई जोड़ी और बच्चों के सिर पर छत का इंतजाम किया। भट्ठे पर मजदूरी कर खुद को कड़ी धूप में तपाया, लेकिन परिवार के लिए घर बनाया। वक्त को कुछ और मंजूर था, जिस आशियाने को बनाने में पसीना बहाया, वह खुद का होकर भी दूर है। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों की लापरवाही और अमानवीयता ने कवल सिंह और स्नेहलता की खुशियों को निगल लिया। कानूनी लड़ाई लड़ने में लाखों का मकान पीड़ितों ने सवा तीन लाख रुपये में गिरवी रखा। गिरवी रखे मकान को आठ साल बीतने को हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के आगे वह कर्जा नहीं उतार सके हैं। स्नेहलता कहती हैं कि कानूनी जंग लड़ने में उसके पुत्र ललित, विपुल की पढ़ाई छूट गई, जो आज तक स्कूल का मुंह नहीं देख सके हैं। दोनों जगह-जगह पिता की तरह मजदूरी करते हैं। हालांकि बड़ी बेटी राखी किसी तरह 10वीं पास कर चुकी है। छोटी बेटी आकांक्षा अभी कक्षा चार में है। पीड़ित परिवार आज भी उस वक्त को कोसता है, जिसकी बदौलत वह दुश्वारियों में जिंदगी जीये हैं। कवल सिंह बताते हैं कि परिवार के भरण-पोषण के साथ किसी तरह गिरवी रखे मकान को छुड़ाने के लिए आधी रकम चुकता हो पाई है, जबकि आधी बाकी है। फिलहाल वह खुद का घर होते हुए भी बेघर की तरह जीवन गुजार रहे हैं।
दोषियों को मिले सजा
पुरकाजी। पीड़ित दंपति कहता है कि उनके साथ जो हुआ, वह वक्त के साथ धुंधला होगा। स्वास्थ्य विभाग अपने कर्तव्य को पूरी तरह से निभाए। हालांकि प्रकरण में दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, तभी उनकी कानूनी लड़ाई लडऩा सफल होगा।
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विभाग में हड़कंप, दिनभर चर्चा
पुरकाजी। स्नेहलता की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की खंडपीठ के निर्णय को लेकर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा रहा है। खबर छपने के बाद विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों में खलबली मची रही। हालांकि विभागीय अफसरों ने मामले में हुई जांच को दबा लिया है। दोषी कौन था, यह कृत्य क्यों अंजाम दिया गया। इसकी जांच की गई, लेकिन वह फाइलों में कैद है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्नेहलता को इंसाफ तो दिला दिया है, लेकिन पीड़िता को आशियाना मिलने का इंतजार है। कानूनी लड़ाई लड़ने में जिस घर को गिरवी रखा था, उस वक्त मकान का मूल्य कई लाख था। मजबूरी में पीड़िता ने उसे सवा तीन लाख रुपये में गिरवी रखा। हालांकि बच्चों को लेकर जो सपने देखे थे, वह स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही ने चकनाचूर कर दिए। बेटों की पढ़ाई छूटने से ज्यादा उनके मजदूर बनने का गम है। परिवार उस मनहूस घड़ी को कोसते नहीं थकता है।
पुरकाजी में डिलीवरी के दौरान डॉक्टर की लापरवाही से एक महिला की जिंदगी तबाह हो गई। इसी क़ड़ी में जिंदगी के साथ जुस्तजू कर पाई-पाई जोड़ी और बच्चों के सिर पर छत का इंतजाम किया। भट्ठे पर मजदूरी कर खुद को कड़ी धूप में तपाया, लेकिन परिवार के लिए घर बनाया। वक्त को कुछ और मंजूर था, जिस आशियाने को बनाने में पसीना बहाया, वह खुद का होकर भी दूर है। स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों की लापरवाही और अमानवीयता ने कवल सिंह और स्नेहलता की खुशियों को निगल लिया। कानूनी लड़ाई लड़ने में लाखों का मकान पीड़ितों ने सवा तीन लाख रुपये में गिरवी रखा। गिरवी रखे मकान को आठ साल बीतने को हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के आगे वह कर्जा नहीं उतार सके हैं। स्नेहलता कहती हैं कि कानूनी जंग लड़ने में उसके पुत्र ललित, विपुल की पढ़ाई छूट गई, जो आज तक स्कूल का मुंह नहीं देख सके हैं। दोनों जगह-जगह पिता की तरह मजदूरी करते हैं। हालांकि बड़ी बेटी राखी किसी तरह 10वीं पास कर चुकी है। छोटी बेटी आकांक्षा अभी कक्षा चार में है। पीड़ित परिवार आज भी उस वक्त को कोसता है, जिसकी बदौलत वह दुश्वारियों में जिंदगी जीये हैं। कवल सिंह बताते हैं कि परिवार के भरण-पोषण के साथ किसी तरह गिरवी रखे मकान को छुड़ाने के लिए आधी रकम चुकता हो पाई है, जबकि आधी बाकी है। फिलहाल वह खुद का घर होते हुए भी बेघर की तरह जीवन गुजार रहे हैं।
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दोषियों को मिले सजा
पुरकाजी। पीड़ित दंपति कहता है कि उनके साथ जो हुआ, वह वक्त के साथ धुंधला होगा। स्वास्थ्य विभाग अपने कर्तव्य को पूरी तरह से निभाए। हालांकि प्रकरण में दोषियों को सजा मिलनी चाहिए, तभी उनकी कानूनी लड़ाई लडऩा सफल होगा।
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विभाग में हड़कंप, दिनभर चर्चा
पुरकाजी। स्नेहलता की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की खंडपीठ के निर्णय को लेकर स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा रहा है। खबर छपने के बाद विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों में खलबली मची रही। हालांकि विभागीय अफसरों ने मामले में हुई जांच को दबा लिया है। दोषी कौन था, यह कृत्य क्यों अंजाम दिया गया। इसकी जांच की गई, लेकिन वह फाइलों में कैद है।