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वैदिक संस्कृति से समाज का नवनिर्माण: आर्यवेश
Updated Sun, 29 Oct 2017 01:07 AM IST
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वैदिक संस्कृति से समाज का नवनिर्माण : आर्यवेश
भौराकलां (मुजफ्फरनगर)। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने कहा कि भारत की संस्कृति और संस्कारों से युवाओं को जोड़ने के लिए आर्य समाज समर्पित है। वैदिक ज्ञान के प्रकाश से समाज में फैला अंधविश्वास, पाखंड का अंधियारा दूर होगा।
वैदिक इंटर कालेज सिसौली में आर्य समाज के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के शुभारंभ समारोह में स्वामी आर्यवेश ने कहा कि आर्य समाज ने देशभक्तों और क्रांतिकारियों को जन्म दिया। महर्षि दयानंद सरस्वती के समाज सुधार आंदोलन ने भारतीय समाज का नव निर्माण किया। वैदिक संस्कृति से ही देश की भावी पीढ़ी संस्कारित बनेगी तथा भारत अखंड रहेगा। महापुरुषों और क्रांतिकारियों के त्याग, बलिदान एवं नैतिक मूल्यों से बेटे-बेटियों को अवगत कराए। अंधविश्वास से बचें, सत्य को माने और नैतिक आचरण अपनाएं। युवाओं को नशा, मांसाहार और पाश्चात्य संस्कृति से बचना चाहिए। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वेद, यज्ञ और योग भारत की संस्कृति हैं। हमारी संस्कृति सत्य, सदाचार, चरित्र, देशभक्ति और मानवता पर टिकी हैं। राष्ट्र की उन्नति और रक्षा वेदानुकूल आचरण से संभव हैं। श्रीराम और श्री कृष्ण यज्ञ और वैदिक शिक्षा ग्रहण करते थे। बच्चों और युवाओं को संस्कारित बनाने का दायित्व निभाना होगा। बेटियों के संस्कारित होने से समाज और राष्ट्र सशक्त रहेगा। प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह ने कहा कि अभिभावक तथा शिक्षक बच्चों को अपने आचरण से प्रेरित करें। यज्ञ में वेदपाठ अंकित आर्य ने किया। यज्ञमान सुधीर शास्त्री रहे। भजनोपदेशक संगीता आर्या और किरण मुनि ने विचार रखे।
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भौराकलां (मुजफ्फरनगर)। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान स्वामी आर्यवेश ने कहा कि भारत की संस्कृति और संस्कारों से युवाओं को जोड़ने के लिए आर्य समाज समर्पित है। वैदिक ज्ञान के प्रकाश से समाज में फैला अंधविश्वास, पाखंड का अंधियारा दूर होगा।
वैदिक इंटर कालेज सिसौली में आर्य समाज के तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव के शुभारंभ समारोह में स्वामी आर्यवेश ने कहा कि आर्य समाज ने देशभक्तों और क्रांतिकारियों को जन्म दिया। महर्षि दयानंद सरस्वती के समाज सुधार आंदोलन ने भारतीय समाज का नव निर्माण किया। वैदिक संस्कृति से ही देश की भावी पीढ़ी संस्कारित बनेगी तथा भारत अखंड रहेगा। महापुरुषों और क्रांतिकारियों के त्याग, बलिदान एवं नैतिक मूल्यों से बेटे-बेटियों को अवगत कराए। अंधविश्वास से बचें, सत्य को माने और नैतिक आचरण अपनाएं। युवाओं को नशा, मांसाहार और पाश्चात्य संस्कृति से बचना चाहिए। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि वेद, यज्ञ और योग भारत की संस्कृति हैं। हमारी संस्कृति सत्य, सदाचार, चरित्र, देशभक्ति और मानवता पर टिकी हैं। राष्ट्र की उन्नति और रक्षा वेदानुकूल आचरण से संभव हैं। श्रीराम और श्री कृष्ण यज्ञ और वैदिक शिक्षा ग्रहण करते थे। बच्चों और युवाओं को संस्कारित बनाने का दायित्व निभाना होगा। बेटियों के संस्कारित होने से समाज और राष्ट्र सशक्त रहेगा। प्रधानाचार्य राजेंद्र सिंह ने कहा कि अभिभावक तथा शिक्षक बच्चों को अपने आचरण से प्रेरित करें। यज्ञ में वेदपाठ अंकित आर्य ने किया। यज्ञमान सुधीर शास्त्री रहे। भजनोपदेशक संगीता आर्या और किरण मुनि ने विचार रखे।
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