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विश्व पर्यावरण दिवस:::पेड़ उगाओ, जिदंगी बचाओ
Updated Mon, 05 Jun 2017 01:25 AM IST
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जिले में हरियाली की तस्वीर धुंधली
मुजफ्फरनगर। पेड़-पौधों को धरती का श्रृंगार कहे जाने के साथ ही जीव-जंतुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। पर्यावरण के लिए भी पेड़-पौधों की अहम भूमिका है। दुनियाभर में मचे पर्यावरण संरक्षण पर हल्ले की असल तस्वीर धुंधली है। जनपद में पिछले साल पांच लाख से अधिक पौधे लगाए गए, लेकिन तीस प्रतिशत भी जीवंत नहीं है। वहीं, विश्व पर्यावरण को लेकर वन विभाग ने तैयारी कर ली है। रेंजरों में गोष्ठी कराकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण की कल्पना बिना हरियाली के नहीं की जा सकती है। पर्यावरण के साथ ही स्वच्छ वातावरण की नींव पेड़-पौधों पर निर्भर है। मगर, जनपद स्तर पर लगातार घट रहे वन्य क्षेत्र के कारण पर्यावरण प्रदूषण खतरा अधिक बढ़ रहा है। भारतीय वन्य विहार की रिपोर्ट के आधार पर पहाड़ी क्षेत्रों में 66 तथा मैदानी क्षेत्रों में 33 फीसदी वन्य क्षेत्र होना जरूरी है। पर्यावरण के साथ वातावरण में मिलने वाली जहरीली गैसों के प्रभाव को कम किया जा सकता है। क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने के पीछे एसी का प्रयोग, बढ़ते वाहनों का दबाव भी है। इसके चलते लगातार वायु जहरीली हो रही है। वायु के साथ वातावरण और पर्यावरण डिस्टर्ब होने से जलवायु पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहे हैं। डीएफओ सूरज ने बताया कि पर्यावरण दिवस को लेकर तैयारियां की गई है। सभी रेंज में गोष्ठी कराने के साथ ही लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसमें गांवों के प्रधानों, मुख्य लोगों को साथ लेकर अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
पिछली बार लगे थे पांच लाख पौधे
मुजफ्फरनगर। वन विभाग ने पर्यावरण और वन संरक्षण को लेकर गत वर्ष पांच लाख से अधिक पौधे लगाए थे, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी प्रत्येक रेंज ऑफिसर को दी गई। इस साल भी बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान की तैयारी की जा रही है, जिसमें स्कूल, सामाजिक संस्थाओं के साथ सरकारी विभागों को शामिल किया जाएगा।
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पर्यावरण के लिहाज से मुख्य जानकारी
पर्यावरण प्रेमी डॉ यशवंत राय ने बताया कि 1000 हैक्टेयर में लगे 5 लाख वृक्ष 35000 टन डस्ट (धूल) को प्रति वर्ष वायु में मिलने से रोकते है।
-एक एकड़ में खड़े वृक्ष प्रतिदिन लगभग 18 लोगों के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन छोड़ते है।
-एक बड़ा वृक्ष प्रतिदिन लगभग 350 लीटर जल वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा छोड़ता है।
-2000 पेड़ 5 वर्षों में 4 लाख 90 हजार किग्रा. ऑक्सीजन छोड़ते है जो 2 हजार 692 व्यक्तियों के लिये ऑक्सीजन आपूर्ति करते है।
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मुजफ्फरनगर। पेड़-पौधों को धरती का श्रृंगार कहे जाने के साथ ही जीव-जंतुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है। पर्यावरण के लिए भी पेड़-पौधों की अहम भूमिका है। दुनियाभर में मचे पर्यावरण संरक्षण पर हल्ले की असल तस्वीर धुंधली है। जनपद में पिछले साल पांच लाख से अधिक पौधे लगाए गए, लेकिन तीस प्रतिशत भी जीवंत नहीं है। वहीं, विश्व पर्यावरण को लेकर वन विभाग ने तैयारी कर ली है। रेंजरों में गोष्ठी कराकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण की कल्पना बिना हरियाली के नहीं की जा सकती है। पर्यावरण के साथ ही स्वच्छ वातावरण की नींव पेड़-पौधों पर निर्भर है। मगर, जनपद स्तर पर लगातार घट रहे वन्य क्षेत्र के कारण पर्यावरण प्रदूषण खतरा अधिक बढ़ रहा है। भारतीय वन्य विहार की रिपोर्ट के आधार पर पहाड़ी क्षेत्रों में 66 तथा मैदानी क्षेत्रों में 33 फीसदी वन्य क्षेत्र होना जरूरी है। पर्यावरण के साथ वातावरण में मिलने वाली जहरीली गैसों के प्रभाव को कम किया जा सकता है। क्योंकि पर्यावरण प्रदूषण बढ़ने के पीछे एसी का प्रयोग, बढ़ते वाहनों का दबाव भी है। इसके चलते लगातार वायु जहरीली हो रही है। वायु के साथ वातावरण और पर्यावरण डिस्टर्ब होने से जलवायु पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहे हैं। डीएफओ सूरज ने बताया कि पर्यावरण दिवस को लेकर तैयारियां की गई है। सभी रेंज में गोष्ठी कराने के साथ ही लोगों को जागरूक किया जाएगा। इसमें गांवों के प्रधानों, मुख्य लोगों को साथ लेकर अधिक से अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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पिछली बार लगे थे पांच लाख पौधे
मुजफ्फरनगर। वन विभाग ने पर्यावरण और वन संरक्षण को लेकर गत वर्ष पांच लाख से अधिक पौधे लगाए थे, जिनकी देखभाल की जिम्मेदारी प्रत्येक रेंज ऑफिसर को दी गई। इस साल भी बड़े पैमाने पर पौधरोपण अभियान की तैयारी की जा रही है, जिसमें स्कूल, सामाजिक संस्थाओं के साथ सरकारी विभागों को शामिल किया जाएगा।
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पर्यावरण के लिहाज से मुख्य जानकारी
पर्यावरण प्रेमी डॉ यशवंत राय ने बताया कि 1000 हैक्टेयर में लगे 5 लाख वृक्ष 35000 टन डस्ट (धूल) को प्रति वर्ष वायु में मिलने से रोकते है।
-एक एकड़ में खड़े वृक्ष प्रतिदिन लगभग 18 लोगों के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन छोड़ते है।
-एक बड़ा वृक्ष प्रतिदिन लगभग 350 लीटर जल वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा छोड़ता है।
-2000 पेड़ 5 वर्षों में 4 लाख 90 हजार किग्रा. ऑक्सीजन छोड़ते है जो 2 हजार 692 व्यक्तियों के लिये ऑक्सीजन आपूर्ति करते है।