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कारगिल स्मारक पर लिखी शहीदों की शौर्य गाथा
Updated Thu, 26 Jul 2018 01:04 AM IST
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कारगिल स्मारक पर लिखी शहीदों की शौर्य गाथा
मोरना। पौराणिक तीर्थ शुक्रताल के गंगा तट पर स्थापित कारगिल शहीद स्मारक देश भक्ति और बलिदान का प्रतीक है। स्मारक में शीलापट्ट 527 वीर सैनिकों के नाम और बटालियन का विवरण अंकित है। वीतराग स्वामी कल्याण देव की प्रेरणा से बनाए गए स्मारक का लोकार्पण नौ मार्च 2003 को तत्कालीन डीजी एनसीसी बीके बोपन्ना ने किया था।
शुकतीर्थ में कारगिल युद्ध के शहीदों की स्मृति में बना भव्य स्मारक देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को देश प्रेम का संदेश दे रहा है। ऑपरेशन विजय के दौरान मातृभूमि की रक्षा को शहीद सैनिकों के शौर्य की गाथा स्मारक के शीलापट्ट पर लिखी गई है। टाइगर हिल्स से आए पत्थर यहां रखे गए है। शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव ने स्मारक के लोकार्पण पर शहीदों के परिजनों को शुक्रताल आमंत्रित कर सम्मानित किया था। पूर्व उप थल सेना अध्यक्ष निरंजन सिंह मलिक के निर्देशन में बनी समिति ने जिम्मेदारी संभाली थी। परमवीर चक्र विजेता मनोज पांडे की मां मोहिनी पांडे और पिता गोपीचंद पांडे का वीतराग संत ने विशेष सम्मान किया था। वर्ष 2004 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत ने इस स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर विजयंत टैंक की स्थापना कराई थी। स्वामी ओमानंद सरस्वती बताते हैं कि गुरुदेव ने तीर्थ धाम में देश प्रेम की भावना जाग्रत करने के उद्देश्य से कारगिल शहीद स्मारक की स्थापना कराई थी।
स्मारक पर होगा समारोह
शुक्रताल। कारगिल विजय दिवस बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। सैनिक संगठन के पदाधिकारियों के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में शुकदेव संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थी वेदपाठ करेंगे। साधु-संतों और पूर्व सैनिकों के द्वारा शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी।
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मोरना। पौराणिक तीर्थ शुक्रताल के गंगा तट पर स्थापित कारगिल शहीद स्मारक देश भक्ति और बलिदान का प्रतीक है। स्मारक में शीलापट्ट 527 वीर सैनिकों के नाम और बटालियन का विवरण अंकित है। वीतराग स्वामी कल्याण देव की प्रेरणा से बनाए गए स्मारक का लोकार्पण नौ मार्च 2003 को तत्कालीन डीजी एनसीसी बीके बोपन्ना ने किया था।
शुकतीर्थ में कारगिल युद्ध के शहीदों की स्मृति में बना भव्य स्मारक देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को देश प्रेम का संदेश दे रहा है। ऑपरेशन विजय के दौरान मातृभूमि की रक्षा को शहीद सैनिकों के शौर्य की गाथा स्मारक के शीलापट्ट पर लिखी गई है। टाइगर हिल्स से आए पत्थर यहां रखे गए है। शिक्षा ऋषि स्वामी कल्याण देव ने स्मारक के लोकार्पण पर शहीदों के परिजनों को शुक्रताल आमंत्रित कर सम्मानित किया था। पूर्व उप थल सेना अध्यक्ष निरंजन सिंह मलिक के निर्देशन में बनी समिति ने जिम्मेदारी संभाली थी। परमवीर चक्र विजेता मनोज पांडे की मां मोहिनी पांडे और पिता गोपीचंद पांडे का वीतराग संत ने विशेष सम्मान किया था। वर्ष 2004 में तत्कालीन उपराष्ट्रपति भैरोसिंह शेखावत ने इस स्मारक पर शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित कर विजयंत टैंक की स्थापना कराई थी। स्वामी ओमानंद सरस्वती बताते हैं कि गुरुदेव ने तीर्थ धाम में देश प्रेम की भावना जाग्रत करने के उद्देश्य से कारगिल शहीद स्मारक की स्थापना कराई थी।
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स्मारक पर होगा समारोह
शुक्रताल। कारगिल विजय दिवस बृहस्पतिवार को मनाया जाएगा। सैनिक संगठन के पदाधिकारियों के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में शुकदेव संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थी वेदपाठ करेंगे। साधु-संतों और पूर्व सैनिकों के द्वारा शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की जाएगी।
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