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गांव में 20 परिवार, एक घर में भी शौचालय नहीं
Updated Mon, 07 Aug 2017 12:36 AM IST
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गांव के एक घर में नहीं शौचालय
पुरकाजी। ओडीएफ के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार जोर आजमाइश में लगी है। वार्ड से लेकर गांवों तक ओडीएफ करने के लिए योजनाएं बन रही हैं। पुरकाजी क्षेत्र के गांव नार्वेनगर के बांशिदें स्वच्छता के नारों, सरकारी योजनाओं से पूरी तरह अंजान है। गांव की आबादी करीब 200 है, जबकि परिवार भी 20 से अधिक हैं। अफसोस गांव के एक भी मकान में शौचालय नहीं बना है।
पुरकाजी क्षेत्र के गांव भोजाहेड़ी का मजरा नार्वेनगर कस्बे से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मजरे पर आज तक न तो ग्रामप्रधान ने कोई ध्यान दिया है और न ही कोई अधिकारी हालत जानने पहुंचा है। गांव में महिला-पुरुषों के साथ बच्चों को मिलाकर करीब 200 से अधिक जनसंख्या है। गांव में 20 से अधिक परिवार निवास करते हैं। इन परिवारों को ओडीएफ के बारे में जानकारी तक नहीं है। ग्रामीणों के अलावा महिलाओं को भी दिशा-शौच के लिए जंगल जाना पड़ता है।
अब सवाल है कि बड़े-बड़े दावे करने करने हाकिमों ने इस गांव की सुध तक नहीं ली है। अधिकारियों की लापरवाही के शिकार ग्रामीण विवशपूर्ण जंगल में दिशा शौच के लिए जाने को मजबूर है। ग्राम प्रधान मुबारिक अहमद ने बताया कि सभी परिवारों के लिए शौचालय बनवाने के फार्म भरवाए गए हैं। जल्द ही शौचालय बनवाने का काम शुरू करा दिया जाएगा। पुरकाजी बीडीओ प्रभू दयाल ने बताया कि नार्वेनगर के परिवारों द्वारा भरे गए फार्मों की जाचं-पड़ताल कराई जा रही है। उसके बाद ही निर्माण की अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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कहां गई शौचालय निर्माण योजना
पुरकाजी। गांव में एक भी शौचालय न होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात में अधिक मुसीबत होती है। वहीं, प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को शौचालय उपलब्ध कराने के लिए योजना चलाई गई है। जिसके चलते निर्धन परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए धनराशि दी जा रही है, लेकिन इस गांव में एक भी ग्रामीण को योजना लाभ तक नहीं मिल सका है।
मेहमानों ने भी मुंह मोड़ा
पुरकाजी। गांव निवासी सुरेश कुमार, सुरेंद्र कुमार और संसार सिंह, महिला रेशमा, कमला, शर्मिला और शीला ने बताया कि अक्टूबर माह में गांव में मेला लगता है। अब मेहमानों ने भी गांव से मुंह मोड़ लिया है। शौचालयों के लिए कई बार ग्राम प्रधान व ब्लाक स्तर पर मांग उठाई गई, लेकिन कोई लाभ नहीं मिल सका है।
पैसा नहीं आया, 20 हजार पात्र बाकी
मुजफ्फरनगर। इस संबंध में सीडीओ अंकित कुमार अग्रवाल ने बताया कि शासन से अभी पैसा नहीं आया है। करीब 20 हजार पात्रों को शौचालय बनाने के लिए पैसा मिलना बाकी है। नार्वेनगर में शौचालय नहीं बने हैं, इसकी जानकारी नहीं है। अधिकारियों को भेजकर मामला दिखवाया जाएगा।
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पुरकाजी। ओडीएफ के लिए केंद्र और प्रदेश सरकार जोर आजमाइश में लगी है। वार्ड से लेकर गांवों तक ओडीएफ करने के लिए योजनाएं बन रही हैं। पुरकाजी क्षेत्र के गांव नार्वेनगर के बांशिदें स्वच्छता के नारों, सरकारी योजनाओं से पूरी तरह अंजान है। गांव की आबादी करीब 200 है, जबकि परिवार भी 20 से अधिक हैं। अफसोस गांव के एक भी मकान में शौचालय नहीं बना है।
पुरकाजी क्षेत्र के गांव भोजाहेड़ी का मजरा नार्वेनगर कस्बे से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस मजरे पर आज तक न तो ग्रामप्रधान ने कोई ध्यान दिया है और न ही कोई अधिकारी हालत जानने पहुंचा है। गांव में महिला-पुरुषों के साथ बच्चों को मिलाकर करीब 200 से अधिक जनसंख्या है। गांव में 20 से अधिक परिवार निवास करते हैं। इन परिवारों को ओडीएफ के बारे में जानकारी तक नहीं है। ग्रामीणों के अलावा महिलाओं को भी दिशा-शौच के लिए जंगल जाना पड़ता है।
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अब सवाल है कि बड़े-बड़े दावे करने करने हाकिमों ने इस गांव की सुध तक नहीं ली है। अधिकारियों की लापरवाही के शिकार ग्रामीण विवशपूर्ण जंगल में दिशा शौच के लिए जाने को मजबूर है। ग्राम प्रधान मुबारिक अहमद ने बताया कि सभी परिवारों के लिए शौचालय बनवाने के फार्म भरवाए गए हैं। जल्द ही शौचालय बनवाने का काम शुरू करा दिया जाएगा। पुरकाजी बीडीओ प्रभू दयाल ने बताया कि नार्वेनगर के परिवारों द्वारा भरे गए फार्मों की जाचं-पड़ताल कराई जा रही है। उसके बाद ही निर्माण की अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।
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कहां गई शौचालय निर्माण योजना
पुरकाजी। गांव में एक भी शौचालय न होने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बरसात में अधिक मुसीबत होती है। वहीं, प्रशासन द्वारा ग्रामीणों को शौचालय उपलब्ध कराने के लिए योजना चलाई गई है। जिसके चलते निर्धन परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए धनराशि दी जा रही है, लेकिन इस गांव में एक भी ग्रामीण को योजना लाभ तक नहीं मिल सका है।
मेहमानों ने भी मुंह मोड़ा
पुरकाजी। गांव निवासी सुरेश कुमार, सुरेंद्र कुमार और संसार सिंह, महिला रेशमा, कमला, शर्मिला और शीला ने बताया कि अक्टूबर माह में गांव में मेला लगता है। अब मेहमानों ने भी गांव से मुंह मोड़ लिया है। शौचालयों के लिए कई बार ग्राम प्रधान व ब्लाक स्तर पर मांग उठाई गई, लेकिन कोई लाभ नहीं मिल सका है।
पैसा नहीं आया, 20 हजार पात्र बाकी
मुजफ्फरनगर। इस संबंध में सीडीओ अंकित कुमार अग्रवाल ने बताया कि शासन से अभी पैसा नहीं आया है। करीब 20 हजार पात्रों को शौचालय बनाने के लिए पैसा मिलना बाकी है। नार्वेनगर में शौचालय नहीं बने हैं, इसकी जानकारी नहीं है। अधिकारियों को भेजकर मामला दिखवाया जाएगा।