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पथिक के महान कार्यों से प्रेरणा लें: रामपाल
Updated Wed, 28 Feb 2018 11:53 PM IST
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छपार। स्वतंत्रता सेनानी और बिजोलिया आंदोलन के जनक विजय सिंह पथिक के जयंती समारोह में उनकी राष्ट्र सेवाओं का स्मरण किया गया। गांधी पालीटेक्निक के पूर्व प्राचार्य रामपाल सिंह ने कहा कि पथिक उच्च कोटि के साहित्य साधक और क्रांतिकारी थे।
छपार के तेजलहेड़ा गांव में आयोजित जयंती समारोह की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद् रामपाल सिंह ने कहा कि बचपन माता-पिता को खो देने के बाद भी अपने परिश्रम, लगन और देश सेवा के जज्बे से पथिक ने महान कार्य किए। वे नौ भाषाओं के ज्ञानी और अनेकों संस्थाओं के संचालक रहे। संयोजक बिजेंद्र ने बताया कि बिजोलिया आंदोलन में विजय पथिक के नेतृत्व में ब्रिटिश सरकार झुक गई थी। ओमपाल सिंह चौहान ने कहा कि पथिक ने 28 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। युवा उनके विचारों को पढ़ें। अनुज प्रधान ने कहा कि पथिक जातिभेद के विरुद्ध थे। समाज और देश की सेवा सर्वोपरि थी। पुष्पेंद्र कुमार ने कहा कि पथिक ने अपनी चेतना से किसानों को उत्पीडऩ से बचाया। समारोह को इलम सिंह गुर्जर, मास्टर ब्रह्म सिंह, बिट्टू मांडला, डॉ सतीश, हिमांशु तोमर, संदीप गुर्जर, सतीश भड़ाना, हिमांशु गुर्जर, मदनपाल सिंह, अजय सिंह, ओम सिंह, प्रधान नरपत सिंह ने विचार रखे। संचालन बिजेंद्र सिंह ने किया।
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छपार के तेजलहेड़ा गांव में आयोजित जयंती समारोह की अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद् रामपाल सिंह ने कहा कि बचपन माता-पिता को खो देने के बाद भी अपने परिश्रम, लगन और देश सेवा के जज्बे से पथिक ने महान कार्य किए। वे नौ भाषाओं के ज्ञानी और अनेकों संस्थाओं के संचालक रहे। संयोजक बिजेंद्र ने बताया कि बिजोलिया आंदोलन में विजय पथिक के नेतृत्व में ब्रिटिश सरकार झुक गई थी। ओमपाल सिंह चौहान ने कहा कि पथिक ने 28 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। युवा उनके विचारों को पढ़ें। अनुज प्रधान ने कहा कि पथिक जातिभेद के विरुद्ध थे। समाज और देश की सेवा सर्वोपरि थी। पुष्पेंद्र कुमार ने कहा कि पथिक ने अपनी चेतना से किसानों को उत्पीडऩ से बचाया। समारोह को इलम सिंह गुर्जर, मास्टर ब्रह्म सिंह, बिट्टू मांडला, डॉ सतीश, हिमांशु तोमर, संदीप गुर्जर, सतीश भड़ाना, हिमांशु गुर्जर, मदनपाल सिंह, अजय सिंह, ओम सिंह, प्रधान नरपत सिंह ने विचार रखे। संचालन बिजेंद्र सिंह ने किया।
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