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डीजे-बैंडवालों की समस्या सुलझाएगा प्रशासन
Updated Wed, 31 Jan 2018 12:56 AM IST
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मुजफ्फरनगर। शादी-विवाह में डीजे की धुन पर थिरकना देर रात तक नहीं चलेगा। इससे डीजे और बैंडवालों को समस्याएं खड़ी हो गई है। अधिकांश शादी, पार्टी में रात्रि में ही जश्न मनाया जाता है, जिसमें देर रात गीत-संगीत चलता है। डीजे की अनुमति लेने में आ रही अड़चनों को दूर करने पर मंथन हो रहा है। प्रशासन डीजे संचालक और बैंडवालों की समस्याओं का निपटारा करेगा।
जिन घरों में शहनाई गूंजनी हैं वह डीजे, बैंड-बाजे की अनुुमति के लिए थानों, अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं। शहर क्षेत्र में अनुमति आसान है, लेकिन गांवों के स्तर पर राह टेढ़ी हो गई है। डीजे संचालकों ने बुकिंग तो कर ली, मगर अनुमति के लिए घराती-बराती पर जिम्मेदारी छोड़ दी है। ऐसे में परिवार वाले शादी कार्ड लेकर चक्कर लगा रहे हैं। बढ़ती समस्या को लेकर अफसर भी परेशान है। अनुमति के आवेदन पहले तहसील, प्रशासन के पास पहुंच रहे हैं। यहां से आवेदन पत्रों को जांच के लिए थानों में भेजा जा रहा है। इससे पुलिस की भी टेंशन बढ़ गई है। वर्कलोड बढ़ने से कार्य प्रभावित हो गए हैं। इससे निजात दिलाने के लिए प्रशासन फरवरी माह में बैठक कर सकता है। जिसमें डीजे संचालकों, बैंडबाजों स्वामियों को भी बुलाया जाएगा। उनकी समस्या का निपटारा करने के बाद स्पष्ट किया जाएगा कि अनुमति की कमान किस विभाग और अधिकारी के हाथों में रहेगी।
क्षेत्र और रात-दिन पैमाना अलग
मुजफ्फरनगर। फिलहाल जो अनुमति जारी की जा रही है। उसमें ध्वनि प्रदूषण का डेसिबल क्षेत्रवार और दिन-रात का पैमाना अलग रखा गया है। औद्योगिक क्षेत्र में ध्वनि की डेसिबल सीमा दिन में 75 और रात में 70 तक, व्यवसायिक क्षेत्र में दिन में 65 और रात्रि में 55 तक, आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 तक, शांति क्षेत्र में दिन में 50 तथा रात में 40 डेसिबल पर संगीत बजाया जा सकता है।
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उल्लंघन पर जेल और जुर्माना
मुजफ्फरनगर। अनुमति पत्र में साफ किया गया है कि निर्धारित समय तक डीजे, बैंड बजाया जा सकता है। नियमों का उल्लंघन मिला तो पांच वर्ष की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माने की सजा हो सकती है।
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जिन घरों में शहनाई गूंजनी हैं वह डीजे, बैंड-बाजे की अनुुमति के लिए थानों, अफसरों के चक्कर लगा रहे हैं। शहर क्षेत्र में अनुमति आसान है, लेकिन गांवों के स्तर पर राह टेढ़ी हो गई है। डीजे संचालकों ने बुकिंग तो कर ली, मगर अनुमति के लिए घराती-बराती पर जिम्मेदारी छोड़ दी है। ऐसे में परिवार वाले शादी कार्ड लेकर चक्कर लगा रहे हैं। बढ़ती समस्या को लेकर अफसर भी परेशान है। अनुमति के आवेदन पहले तहसील, प्रशासन के पास पहुंच रहे हैं। यहां से आवेदन पत्रों को जांच के लिए थानों में भेजा जा रहा है। इससे पुलिस की भी टेंशन बढ़ गई है। वर्कलोड बढ़ने से कार्य प्रभावित हो गए हैं। इससे निजात दिलाने के लिए प्रशासन फरवरी माह में बैठक कर सकता है। जिसमें डीजे संचालकों, बैंडबाजों स्वामियों को भी बुलाया जाएगा। उनकी समस्या का निपटारा करने के बाद स्पष्ट किया जाएगा कि अनुमति की कमान किस विभाग और अधिकारी के हाथों में रहेगी।
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क्षेत्र और रात-दिन पैमाना अलग
मुजफ्फरनगर। फिलहाल जो अनुमति जारी की जा रही है। उसमें ध्वनि प्रदूषण का डेसिबल क्षेत्रवार और दिन-रात का पैमाना अलग रखा गया है। औद्योगिक क्षेत्र में ध्वनि की डेसिबल सीमा दिन में 75 और रात में 70 तक, व्यवसायिक क्षेत्र में दिन में 65 और रात्रि में 55 तक, आवासीय क्षेत्र में दिन में 55 और रात में 45 तक, शांति क्षेत्र में दिन में 50 तथा रात में 40 डेसिबल पर संगीत बजाया जा सकता है।
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उल्लंघन पर जेल और जुर्माना
मुजफ्फरनगर। अनुमति पत्र में साफ किया गया है कि निर्धारित समय तक डीजे, बैंड बजाया जा सकता है। नियमों का उल्लंघन मिला तो पांच वर्ष की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माने की सजा हो सकती है।