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मरीजों की जेब काट रहा डाक्टरों का ब्रांड प्रेम --- संशोधित
Updated Thu, 29 Nov 2018 11:59 PM IST
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अस्पताल में मरीजों को नहीं मिलता जन औषधि केंद्र का लाभ
मुजफ्फरनगर। स्वास्थ्य महकमे की निष्क्रियता की वजह से जन औषधि केंद्र का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। कई मरीजों ने बताया कि चिकित्सकों का ब्रांड प्रेम इन केंद्रों के संचालन में सबसे बड़ा रोड़ा बन रहा है। कई चिकित्सक दवाइयों के साल्ट के स्थान पर ब्रांड का नाम लिखते हैं। अक्सर जन औषधि केंद्र पर ब्रांड की दवा उपलब्ध होती ही नहीं है। मरीजों का यह भी आरोप है कि यदि केंद्र संचालक साल्ट की जानकारी कर जेनरिक दवा दे भी दे, तो कई चिकित्सक इसे वापस करा देते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल जन औषधि केंद्रों पर जेनरिक दवाइयां मिलती हैं। यह ब्रांडेड कंपनियों की दवाइयों से काफी सस्ती होती हैं। स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय में भी जन औषधि केंद्र संचालित है। इस जन औषधि केंद्र में करीब 250 तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं। इनके दाम ब्रांडेड दवाइयों से 50 से 70 प्रतिशत तक कम हैं। आमजन के लिए सस्ती दवा की यह बहुत अच्छी सौगात है। हालांकि चिकित्सकों की मनमानी से इस योजना का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। हालांकि केंद्र संचालक इंटरनेट पर देखकर दवा का साल्ट पता करते हैं और फिर उस साल्ट की जेनरिक दवा मरीजों को देेते हैं। दवाइयां अलग कंपनी की होने के कारण शुरुआत में तो मरीज ही लेने से इंकार कर देते हैं। कुछ मरीज ले भी लेते हैं तो उन्हें चिकित्सक वापस करा देते हैं।
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मुजफ्फरनगर। स्वास्थ्य महकमे की निष्क्रियता की वजह से जन औषधि केंद्र का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। कई मरीजों ने बताया कि चिकित्सकों का ब्रांड प्रेम इन केंद्रों के संचालन में सबसे बड़ा रोड़ा बन रहा है। कई चिकित्सक दवाइयों के साल्ट के स्थान पर ब्रांड का नाम लिखते हैं। अक्सर जन औषधि केंद्र पर ब्रांड की दवा उपलब्ध होती ही नहीं है। मरीजों का यह भी आरोप है कि यदि केंद्र संचालक साल्ट की जानकारी कर जेनरिक दवा दे भी दे, तो कई चिकित्सक इसे वापस करा देते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल जन औषधि केंद्रों पर जेनरिक दवाइयां मिलती हैं। यह ब्रांडेड कंपनियों की दवाइयों से काफी सस्ती होती हैं। स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय में भी जन औषधि केंद्र संचालित है। इस जन औषधि केंद्र में करीब 250 तरह की दवाइयां उपलब्ध हैं। इनके दाम ब्रांडेड दवाइयों से 50 से 70 प्रतिशत तक कम हैं। आमजन के लिए सस्ती दवा की यह बहुत अच्छी सौगात है। हालांकि चिकित्सकों की मनमानी से इस योजना का लाभ जरूरतमंदों को नहीं मिल पा रहा है। हालांकि केंद्र संचालक इंटरनेट पर देखकर दवा का साल्ट पता करते हैं और फिर उस साल्ट की जेनरिक दवा मरीजों को देेते हैं। दवाइयां अलग कंपनी की होने के कारण शुरुआत में तो मरीज ही लेने से इंकार कर देते हैं। कुछ मरीज ले भी लेते हैं तो उन्हें चिकित्सक वापस करा देते हैं।
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