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बाल समिति के सदस्यों ने किशोरी का विवाह रुकवाया
Updated Sat, 28 Apr 2018 12:08 AM IST
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जानसठ।
गांव मंतौड़ी में बाल विवाह की सूचना पर बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने पुलिस की मदद से किशोरी के विवाह को रुकवाया। मेडिकल परीक्षण कराने पर किशोरी नाबालिग ही निकली। परिजनों को दोबारा विवाह करने पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई।
शुक्रवार को गांव मंतौड़ी निवासी व्यक्ति की पुत्री की बरात बृहस्पतिवार को आई थी। किशोरी के ताऊ ने इसकी शिकायत बाल कल्याण अधिकारी मुजफ्फरनगर सहित उच्च अधिकारियों से करते हुए बताया कि लड़की मां की 10 साल पूर्व मौत हो गई थी। मां की मौत होने पर उसका दादा उसे अपने साथ हस्तिनापुर ले गया था। लड़की के नाम डेढ़ बीघा जमीन है। एक वर्ष पूर्व ही उसके पिता व चाचा उसे अपने साथ गांव ले आए थे। उन्होंने उसका रिश्ता हरिद्वार क्षेत्र के गांव हरचंद निवासी के साथ किया था। बुधवार को किशोरी के ताऊ द्वारा शिकायत करने पर बाल कल्याण समिति के टीम ने किशोरी के पिता से उसका बालिग होने का प्रमाण पत्र मांगा तो उन्होंने उसको अनपढ़ बताते हुए बालिग होना बताया। बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने मामले को उच्च अधिकारियों को अवगत कराया। किशोरी के ताऊ ने डीएम से उसका मेडिकल परीक्षण कराने की मांग की थी।
डीएम के आदेश पर सीएमओ द्वारा उसका बृहस्पतिवार को मेडिकल परीक्षण कराया गया। जिसमें लड़की नाबालिग निकली। समिति के सदस्यों की टीम जानसठ पुलिस को साथ लेकर गांव पहुंची और शादी रोकनी चाही तो परिजनों ने हंगामा कर दिया। पुलिस द्वारा समझाने और सख्ती दिखाने पर परिजन शादी रोकने के लिए राजी हो गए। दूल्हा बरात लेकर वापस चला गया। एसएसआई मनोज कुमार यादव ने बताया कि बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने परिजनों से एक साल बाद उसकी शादी करने का लिखित में ले लिया है। इसके बाद यदि परिजनों ने शादी करने की कोशिश की तो उनके खिलाफ बालकल्याण की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
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सीओ एसकेएस प्रताप ने बताया कि किशोरी के ताऊ की सूचना पर बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने पुलिस से संपर्क कर किशोरी की शादी रुकवाने के लिए सहयोग मांगा था। जिस पर जानसठ थाने के एएसआई मनोज यादव, सीमा त्यागी ने समिति के सदस्यों के साथ गांव में पहुंचे। किशोरी के पिता को समझाया गया कि बाल विवाह कानूनी जुर्म है। यदि उन्होंने पुत्री के बालिग होने से पूर्व विवाह करने का प्रयास किया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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गांव मंतौड़ी में बाल विवाह की सूचना पर बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने पुलिस की मदद से किशोरी के विवाह को रुकवाया। मेडिकल परीक्षण कराने पर किशोरी नाबालिग ही निकली। परिजनों को दोबारा विवाह करने पर कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई।
शुक्रवार को गांव मंतौड़ी निवासी व्यक्ति की पुत्री की बरात बृहस्पतिवार को आई थी। किशोरी के ताऊ ने इसकी शिकायत बाल कल्याण अधिकारी मुजफ्फरनगर सहित उच्च अधिकारियों से करते हुए बताया कि लड़की मां की 10 साल पूर्व मौत हो गई थी। मां की मौत होने पर उसका दादा उसे अपने साथ हस्तिनापुर ले गया था। लड़की के नाम डेढ़ बीघा जमीन है। एक वर्ष पूर्व ही उसके पिता व चाचा उसे अपने साथ गांव ले आए थे। उन्होंने उसका रिश्ता हरिद्वार क्षेत्र के गांव हरचंद निवासी के साथ किया था। बुधवार को किशोरी के ताऊ द्वारा शिकायत करने पर बाल कल्याण समिति के टीम ने किशोरी के पिता से उसका बालिग होने का प्रमाण पत्र मांगा तो उन्होंने उसको अनपढ़ बताते हुए बालिग होना बताया। बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने मामले को उच्च अधिकारियों को अवगत कराया। किशोरी के ताऊ ने डीएम से उसका मेडिकल परीक्षण कराने की मांग की थी।
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डीएम के आदेश पर सीएमओ द्वारा उसका बृहस्पतिवार को मेडिकल परीक्षण कराया गया। जिसमें लड़की नाबालिग निकली। समिति के सदस्यों की टीम जानसठ पुलिस को साथ लेकर गांव पहुंची और शादी रोकनी चाही तो परिजनों ने हंगामा कर दिया। पुलिस द्वारा समझाने और सख्ती दिखाने पर परिजन शादी रोकने के लिए राजी हो गए। दूल्हा बरात लेकर वापस चला गया। एसएसआई मनोज कुमार यादव ने बताया कि बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने परिजनों से एक साल बाद उसकी शादी करने का लिखित में ले लिया है। इसके बाद यदि परिजनों ने शादी करने की कोशिश की तो उनके खिलाफ बालकल्याण की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
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सीओ एसकेएस प्रताप ने बताया कि किशोरी के ताऊ की सूचना पर बाल कल्याण समिति के सदस्यों ने पुलिस से संपर्क कर किशोरी की शादी रुकवाने के लिए सहयोग मांगा था। जिस पर जानसठ थाने के एएसआई मनोज यादव, सीमा त्यागी ने समिति के सदस्यों के साथ गांव में पहुंचे। किशोरी के पिता को समझाया गया कि बाल विवाह कानूनी जुर्म है। यदि उन्होंने पुत्री के बालिग होने से पूर्व विवाह करने का प्रयास किया तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।