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दिव्यांगों के लिए मिसाल है रामवीर और शिवनाथ
Updated Mon, 30 Oct 2017 01:31 AM IST
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दिव्यांगों के लिए मिसाल हैं रामवीर और शिवनाथ
खतौली (मुजफ्फरनगर)। जन्म से ही नेत्रहीन के होने के बावजूद कामयाबी की डगर पर चलने के लिए कड़ी मेहनत कर दिव्यांग रामवीर और शिवनाथ अपनों के लिए मिसाल बन गए हैं। किसी शायर ने ठीक ही कहा था कि प्यास की शिद्दत में भी दरियाओं की मिन्नत न की, हमने ठोकर से निकाला पानी रेगिस्तान से, ये पंक्ति दोनों दिव्यांग लोगों के लिए चरितार्थ हो गई। दोनों दिव्यांग कलक्ट्रेट में सरकारी कर्मचारी पद पर तैनात हैं।
खतौली तहसील में दिव्यांग रामवीर तथा शिवनाथ को अफसरों के बैठने की लकड़ी की कुर्सी प्लास्टिक की बेंत से बुनते हुए देखकर लोग आश्चर्यचकित रह गए। मेरठ के गांव जानी खुर्द निवासी दिव्यांग रामवीर ने बताया कि वह आत्मनिर्भर बनना चाहता है, जिसको लेकर उसने पढ़ाई की तथा यूपी बोर्ड से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण की। परीक्षा की तैयारी के लिए ट्यूशन पढ़ा और शिक्षक द्वारा पढ़ाए गए विषयों की रिकॉर्डिंग कर उसे याद किया। राइटर के लिए अनुमति लेकर परीक्षा दी, जिसमें उसे सफलता मिली। इसके बाद एनआईबीएच देहरादून से 1992 में डिग्री हासिल कर गोरखपुर में 2006 तक अपरेंटिस की। वर्ष 2007 में बदायूं कलक्ट्रेट में बतौर टेक्नीशियन के पद पर कुर्सी बुनकर के लिए तैनाती मिल गई। वह फिलहाल मुजफ्फरनगर कलक्ट्रेट में तैनात है। इनके साथी बस्ती के गांव विधोरा निवासी दिव्यांग शिवनाथ ने भी इसी प्रकार हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की तथा 1996 में एनआईबीएच से डिग्री हासिल कर वर्ष 1998 से सरकारी कर्मचारी पद पर हैं। दोनों दिव्यांग ने बताया कि लगन, मेहनत तथा प्रयास ही मनुष्य की सफलता की कुंजी है, जिससे एक दिव्यांग भी आत्मनिर्भर बन सकता है।
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खतौली (मुजफ्फरनगर)। जन्म से ही नेत्रहीन के होने के बावजूद कामयाबी की डगर पर चलने के लिए कड़ी मेहनत कर दिव्यांग रामवीर और शिवनाथ अपनों के लिए मिसाल बन गए हैं। किसी शायर ने ठीक ही कहा था कि प्यास की शिद्दत में भी दरियाओं की मिन्नत न की, हमने ठोकर से निकाला पानी रेगिस्तान से, ये पंक्ति दोनों दिव्यांग लोगों के लिए चरितार्थ हो गई। दोनों दिव्यांग कलक्ट्रेट में सरकारी कर्मचारी पद पर तैनात हैं।
खतौली तहसील में दिव्यांग रामवीर तथा शिवनाथ को अफसरों के बैठने की लकड़ी की कुर्सी प्लास्टिक की बेंत से बुनते हुए देखकर लोग आश्चर्यचकित रह गए। मेरठ के गांव जानी खुर्द निवासी दिव्यांग रामवीर ने बताया कि वह आत्मनिर्भर बनना चाहता है, जिसको लेकर उसने पढ़ाई की तथा यूपी बोर्ड से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण की। परीक्षा की तैयारी के लिए ट्यूशन पढ़ा और शिक्षक द्वारा पढ़ाए गए विषयों की रिकॉर्डिंग कर उसे याद किया। राइटर के लिए अनुमति लेकर परीक्षा दी, जिसमें उसे सफलता मिली। इसके बाद एनआईबीएच देहरादून से 1992 में डिग्री हासिल कर गोरखपुर में 2006 तक अपरेंटिस की। वर्ष 2007 में बदायूं कलक्ट्रेट में बतौर टेक्नीशियन के पद पर कुर्सी बुनकर के लिए तैनाती मिल गई। वह फिलहाल मुजफ्फरनगर कलक्ट्रेट में तैनात है। इनके साथी बस्ती के गांव विधोरा निवासी दिव्यांग शिवनाथ ने भी इसी प्रकार हाईस्कूल तथा इंटरमीडिएट की परीक्षा पास की तथा 1996 में एनआईबीएच से डिग्री हासिल कर वर्ष 1998 से सरकारी कर्मचारी पद पर हैं। दोनों दिव्यांग ने बताया कि लगन, मेहनत तथा प्रयास ही मनुष्य की सफलता की कुंजी है, जिससे एक दिव्यांग भी आत्मनिर्भर बन सकता है।
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