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पैसा जारी नहीं हुआ, ओडीएफ की जांच शुरू
Updated Sun, 31 Dec 2017 12:09 AM IST
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मुजफ्फरनगर। शौचालय बना नहीं और पैसा जारी हुए बिना ही जांच के लिए 255 अधिकारियों की ड्यूटी लगा दी गई। जिला प्रशासन को पत्र लिखकर जिले के 329 ग्राम प्रधानों ने अपने गांव के ओडीएफ में होने का दावा किया था। इन अधिकारियों को जिले में बनाए गए 53 हजार शौचालयों की जांच करनी है। जांच में पता चला कि 22 हजार शौचालयों का पैसा ही जारी नहीं हो पाया है।
प्रदेश सरकार ने 31 दिसंबर तक जिले के सभी गांवों को ओडीएफ करने का जिला प्रशासन को समय दिया था। जिला प्रशासन ने भी इसके लिए ग्राम प्रधानों पर दबाव बनाया और शौचालय बनाने के अभियान को गति दी। जिले में 53 हजार नए शौचालय बनाए जा रहे हैं। ओडीएम के अभियान में अफसरों की वाहवाही लेने के लिए 329 ग्राम प्रधानों ने यह लिखकर दे दिया कि उनका गांव ओडीएफ में आ गया है। ग्राम प्रधानों के दावे पर और सरकार के दबाव को देखते हुए डीएम जीएस प्रियदर्शी ने 255 अधिकारियों की ड्यूटी शौचालयों की जांच के लिए लगाई। इन अधिकारियों को जांच करनी थी कि गांव में कोई भी व्यक्ति खुले में शौच न कर रहा हो। गांव में कोई ऐसा परिवार तो नहीं है, जिसमें शौचालय नहीं है। इन अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट 26 दिसंबर तक देनी थी। जांच के लिए जिनकी ड्यूटी लगाई गई, उनमें सभी जिला स्तरीय, तहसील स्तरीय अधिकारी शामिल हैं। जांच में सामने आया कि गांवों में जो शौचालय बन रहे हैं, उनकी दूसरी किश्त ही जारी नहीं हुई। जब लाभार्थी को पैसा ही नहीं मिला तो शौचालय कैसे बनाएगा। जिले में 53 हजार शौचालय में से केवल 31 हजार का ही पैसा जारी हुआ। 22 हजार की दूसरी किश्त जारी नहीं हुई। शौचालय की जांच कर रहे जिला विकास अधिकारी मोती लाल व्यास ने बताया कि उनके पास चार गांव जांच के लिए हैं। लाभार्थियों को दूसरी किश्त ही नहीं मिली। जब शौचालय बने नहीं गांव ओडीएफ में कैसे आ जाएगा। व्यास ने बताया कि जो सच्चाई है, उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिख दिया।
एकाउंट सेक्शन लापरवाह
मुजफ्फरनगर। जिले में संपूर्ण स्वच्छता अभियान के लिए सरकार ने शौचालय निर्माण और प्रचार-प्रसार के लिए सरकार ने भरपूर पैसा दिया है। एकाउंट सेक्शन की लापरवाही के कारण लाभार्थियों तक पैसा समय पर नहीं पहुंच पा रहा है, इस कारण अभियान में देरी हो रही है।
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जांच रिपोर्ट देंगे अधिकारी: अग्रवाल
मुजफ्फरनगर। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने कहा कि कुछ शौचालयों की दूसरी किश्त जारी नहीं हो पाई है, जिसे जल्द ही जारी करा दिया जाएगा। जिन अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह अपनी रिपोर्ट में यह बताएंगे कि शौचालय का निर्माण अधूरा है या पूर्ण है। कोई व्यक्ति ऐसा तो नहीं है जिसके घर में शौचालय नहीं है और वह सूची में आने से बच गया है। ऐसे व्यक्ति को भी पैसा जारी किया जाएगा। जल्द ही जिले के समस्त गांव ओडीएफ में शामिल हो जाएंगे।
शौचालय बनने का बाद देंगे पूरा पैसा
मुजफ्फरनगर। डीपीआरओ पवन कुमार ने बताया कि हम लोग 31 हजार लाभार्थियों को दोनों किश्त दे चुके हैं। दूसरी किश्त शौचालय के पूर्ण निर्माण के बाद जारी हो रही है। यदि ग्राम पंचायत सचिव यह संस्तुति करते हैं कि लाभार्थी के पास पैसा नहीं है तो शौचालय की दूसरी किश्त पहले ही जारी हो जाती है। मंडल स्तर पर ओडीएफ की जांच के लिए उन्हीं गांवों के नाम जाएंगे जिले स्तर के अधिकारी जिन गांवों को अपनी रिपोर्ट में हरी झंडी देंगे।
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प्रदेश सरकार ने 31 दिसंबर तक जिले के सभी गांवों को ओडीएफ करने का जिला प्रशासन को समय दिया था। जिला प्रशासन ने भी इसके लिए ग्राम प्रधानों पर दबाव बनाया और शौचालय बनाने के अभियान को गति दी। जिले में 53 हजार नए शौचालय बनाए जा रहे हैं। ओडीएम के अभियान में अफसरों की वाहवाही लेने के लिए 329 ग्राम प्रधानों ने यह लिखकर दे दिया कि उनका गांव ओडीएफ में आ गया है। ग्राम प्रधानों के दावे पर और सरकार के दबाव को देखते हुए डीएम जीएस प्रियदर्शी ने 255 अधिकारियों की ड्यूटी शौचालयों की जांच के लिए लगाई। इन अधिकारियों को जांच करनी थी कि गांव में कोई भी व्यक्ति खुले में शौच न कर रहा हो। गांव में कोई ऐसा परिवार तो नहीं है, जिसमें शौचालय नहीं है। इन अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट 26 दिसंबर तक देनी थी। जांच के लिए जिनकी ड्यूटी लगाई गई, उनमें सभी जिला स्तरीय, तहसील स्तरीय अधिकारी शामिल हैं। जांच में सामने आया कि गांवों में जो शौचालय बन रहे हैं, उनकी दूसरी किश्त ही जारी नहीं हुई। जब लाभार्थी को पैसा ही नहीं मिला तो शौचालय कैसे बनाएगा। जिले में 53 हजार शौचालय में से केवल 31 हजार का ही पैसा जारी हुआ। 22 हजार की दूसरी किश्त जारी नहीं हुई। शौचालय की जांच कर रहे जिला विकास अधिकारी मोती लाल व्यास ने बताया कि उनके पास चार गांव जांच के लिए हैं। लाभार्थियों को दूसरी किश्त ही नहीं मिली। जब शौचालय बने नहीं गांव ओडीएफ में कैसे आ जाएगा। व्यास ने बताया कि जो सच्चाई है, उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिख दिया।
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एकाउंट सेक्शन लापरवाह
मुजफ्फरनगर। जिले में संपूर्ण स्वच्छता अभियान के लिए सरकार ने शौचालय निर्माण और प्रचार-प्रसार के लिए सरकार ने भरपूर पैसा दिया है। एकाउंट सेक्शन की लापरवाही के कारण लाभार्थियों तक पैसा समय पर नहीं पहुंच पा रहा है, इस कारण अभियान में देरी हो रही है।
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जांच रिपोर्ट देंगे अधिकारी: अग्रवाल
मुजफ्फरनगर। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने कहा कि कुछ शौचालयों की दूसरी किश्त जारी नहीं हो पाई है, जिसे जल्द ही जारी करा दिया जाएगा। जिन अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह अपनी रिपोर्ट में यह बताएंगे कि शौचालय का निर्माण अधूरा है या पूर्ण है। कोई व्यक्ति ऐसा तो नहीं है जिसके घर में शौचालय नहीं है और वह सूची में आने से बच गया है। ऐसे व्यक्ति को भी पैसा जारी किया जाएगा। जल्द ही जिले के समस्त गांव ओडीएफ में शामिल हो जाएंगे।
शौचालय बनने का बाद देंगे पूरा पैसा
मुजफ्फरनगर। डीपीआरओ पवन कुमार ने बताया कि हम लोग 31 हजार लाभार्थियों को दोनों किश्त दे चुके हैं। दूसरी किश्त शौचालय के पूर्ण निर्माण के बाद जारी हो रही है। यदि ग्राम पंचायत सचिव यह संस्तुति करते हैं कि लाभार्थी के पास पैसा नहीं है तो शौचालय की दूसरी किश्त पहले ही जारी हो जाती है। मंडल स्तर पर ओडीएफ की जांच के लिए उन्हीं गांवों के नाम जाएंगे जिले स्तर के अधिकारी जिन गांवों को अपनी रिपोर्ट में हरी झंडी देंगे।