{"_id":"5cb76919bdec22142e74bf45","slug":"101555523865-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"आसान नहीं इल्म-ए-हदीस को हासिल करना: लतीफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आसान नहीं इल्म-ए-हदीस को हासिल करना: लतीफ
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देवबंद (सहारनपुर)। दारुल उलूम निस्वां में खत्म बुखारी शरीफ का आयोजन हुआ। जिसमें संस्था के मोहतमिम मौलाना अब्दुल लतीफ कासमी ने छात्राओं को बुखारी शरीफ का अंतिम पाठ पढ़ाया।
करंजाली मार्ग स्थित मदरसे में खत्म बुखारी शरीफ व तालीम-ए-निस्वां कांफ्रेंस का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना शारिक की तिलावत-ए-कलाम पाक व मुफ्ती नाजिम की नात-ए-पाक से हुई। अध्यक्षता कर रहे अब्दुल लतीफ कासमी ने कहा कि इल्म-ए-हदीस अहम फन है। इसको हासिल करना आसान नहीं और न ही हर किसी को अल्लाह इसकी तौफीक फरमाता है। मौलाना कारी निसार मेरठी ने कहा कि हम जिस दौर से गुजर रहे हैं वो मुसलमानों के खिलाफ साजिशों का दौर है। ऐसे हालात में मुसलमानों को होशियार रहना जरूरी है। हमें कुरआन व सुन्नत की रस्सी को हाथों से छूटने नहीं देना है। महासचिव मौलाना नजीफ कासमी ने कहा कि मुल्क में जो बुराईयां आम हो रही हैं उनकी सबसे अहम वजह हुकूमत का को-एजुकेशन का सिस्टम है। इस्लामिक यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के चेयरमैन मौलाना जैनुद्दीन कासमी ने भी विचार रखे। संचालन बाग-ए-जहां इमरान ने किया। इस मौके पर प्रधानाचार्य बरीरा लतीफ, नर्गिस हशमत, असमा ताहिर, माहेनूर, हाजी यूनुस, कारी अब्दुल रहमान, असद जमाल फैजी, हाफिज अब्दुल्ला जमील, मौलाना नसीम कासमी, कारी फुरकान, गुफरान कासमी, मौलाना असजद, डा. वसीम, डा. शुऐब रऊफ, महताब कासमी, महमूद कासमी, यासिर बाराबंकी, मौैलाना सलमान देहलवी, कारी सईद, मास्टर जावेद, शाजिया, फरहा अशरफ, सबीहा इफ्तेखार, अंजुम आरा, राबिया तबस्सुम, जोहरा तरन्नुम आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
करंजाली मार्ग स्थित मदरसे में खत्म बुखारी शरीफ व तालीम-ए-निस्वां कांफ्रेंस का आयोजन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मौलाना शारिक की तिलावत-ए-कलाम पाक व मुफ्ती नाजिम की नात-ए-पाक से हुई। अध्यक्षता कर रहे अब्दुल लतीफ कासमी ने कहा कि इल्म-ए-हदीस अहम फन है। इसको हासिल करना आसान नहीं और न ही हर किसी को अल्लाह इसकी तौफीक फरमाता है। मौलाना कारी निसार मेरठी ने कहा कि हम जिस दौर से गुजर रहे हैं वो मुसलमानों के खिलाफ साजिशों का दौर है। ऐसे हालात में मुसलमानों को होशियार रहना जरूरी है। हमें कुरआन व सुन्नत की रस्सी को हाथों से छूटने नहीं देना है। महासचिव मौलाना नजीफ कासमी ने कहा कि मुल्क में जो बुराईयां आम हो रही हैं उनकी सबसे अहम वजह हुकूमत का को-एजुकेशन का सिस्टम है। इस्लामिक यूनिवर्सिटी ट्रस्ट के चेयरमैन मौलाना जैनुद्दीन कासमी ने भी विचार रखे। संचालन बाग-ए-जहां इमरान ने किया। इस मौके पर प्रधानाचार्य बरीरा लतीफ, नर्गिस हशमत, असमा ताहिर, माहेनूर, हाजी यूनुस, कारी अब्दुल रहमान, असद जमाल फैजी, हाफिज अब्दुल्ला जमील, मौलाना नसीम कासमी, कारी फुरकान, गुफरान कासमी, मौलाना असजद, डा. वसीम, डा. शुऐब रऊफ, महताब कासमी, महमूद कासमी, यासिर बाराबंकी, मौैलाना सलमान देहलवी, कारी सईद, मास्टर जावेद, शाजिया, फरहा अशरफ, सबीहा इफ्तेखार, अंजुम आरा, राबिया तबस्सुम, जोहरा तरन्नुम आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन