{"_id":"597b89eb4f1c1b5c4f8b4864","slug":"101501268459-muzaffarnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षामित्रों के बगैर बंद हुए 12 विद्यालय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षामित्रों के बगैर बंद हुए 12 विद्यालय
Updated Sat, 29 Jul 2017 12:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मोरना(मुजफ्फरनगर)। समायोजन को रद्द किए जाने से मोरना क्षेत्र के शिक्षामित्रों के घरों में दो दिनों से चूल्हे नहीं जले हैं। परिजनों ने सरकार और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भारी नाराजगी है। वहीं शिक्षामित्रों के स्कूल में न जाने की वजह से 12 स्कूलों को बंद कर दिया गया है। अन्य स्कूलों की भी शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
शिक्षा की राजनीति में नूरा कुश्ती से बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। ब्लाक मोरना क्षेत्र में 85 प्राइमरी स्कूल हैं। जिनमें कक्षा 1 से 5 तक की कक्षा में 8 हजार 839 बच्चे दाखिला करा चुके हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इन स्कूलों के लिए 273 अध्यापकों को तैनात किया हुआ था। इसमें से 89 शिक्षा मित्रों की भी तैनाती की गई थी। इसके अलावा 43 अन्य जिनका समायोजन नहीं हुआ था, उनको भी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए तैनात किया गया। सुप्रीम कोर्ट के आए निर्णय से मानों इन शिक्षामित्रों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। 89 शिक्षा मित्रों का समायोजन रद हो गया है। प्राइमरी विद्यालय करहेड़ा में कुल 148 बच्चे हैं और उनके प्रधानाध्यापक मांगेराम के साथ तीन शिक्षा मित्र ममता देवी, कमर रजा तैनात थे। गांव अलीपुर प्राथमिक विद्यालय में 113 बच्चे हैं, जिनमें प्रधानाध्यापक सुनीता वर्मा के साथ शिक्षामित्र कविता रानी, सतीश सिंह एवं सतीश चौधरी की तैनाती है। गांव निवादा में 135 बच्चों के लिए चार शिक्षा मित्रों शालू, जोगेंद्र, बबली, शबनम को तैनात किया गया था। दौलतपुर गांव में 120 बच्चों पर प्रधानाध्यापक इमराम के साथ शिक्षा मित्र देवेंद्र और धनप्रकाश को रखा गया था। वहीं गांव भेड़ाहेड़ी में प्रधानाध्यापक संदीप राठी के साथ 126 बच्चों पर शिक्षा मित्र संगीता देवी, कोमल, गयूर अली तैनात थे। समायोजन के रद्द होने से गांव नंहेड़ा, नवादा, मीरावाला, रसुलपुर, वजीराबाद, तौफीर, भोकरहेड़ी देहात, शुक्रताल, सिकंदरपुर, तेवड़ा, खुशीपुरा, रुड़कली आदि विद्यालयों में शिक्षा मित्रों के नहीं आने से इनको बंद कर दिया गया है। गांव के खाईखेड़ी, छछरौली, नवादा, भुवापुर, भेड़ाहेड़ी, मज्जलिसपुर, सीकरी, महाराजनगर, केड़ी, गादला, खेड़ी फिरोजाबाद, मलपुरा आदि दर्जनों गांव के स्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। जो खुले उनमें शिक्षकों कमी साफ दिखाई देने लगी है। एक शिक्षक सैकड़ों बच्चों को कैसे शिक्षित करने का काम करें, इसका जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है।
विज्ञापन
शिक्षा की राजनीति में नूरा कुश्ती से बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। ब्लाक मोरना क्षेत्र में 85 प्राइमरी स्कूल हैं। जिनमें कक्षा 1 से 5 तक की कक्षा में 8 हजार 839 बच्चे दाखिला करा चुके हैं। उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इन स्कूलों के लिए 273 अध्यापकों को तैनात किया हुआ था। इसमें से 89 शिक्षा मित्रों की भी तैनाती की गई थी। इसके अलावा 43 अन्य जिनका समायोजन नहीं हुआ था, उनको भी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने के लिए तैनात किया गया। सुप्रीम कोर्ट के आए निर्णय से मानों इन शिक्षामित्रों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा हो। 89 शिक्षा मित्रों का समायोजन रद हो गया है। प्राइमरी विद्यालय करहेड़ा में कुल 148 बच्चे हैं और उनके प्रधानाध्यापक मांगेराम के साथ तीन शिक्षा मित्र ममता देवी, कमर रजा तैनात थे। गांव अलीपुर प्राथमिक विद्यालय में 113 बच्चे हैं, जिनमें प्रधानाध्यापक सुनीता वर्मा के साथ शिक्षामित्र कविता रानी, सतीश सिंह एवं सतीश चौधरी की तैनाती है। गांव निवादा में 135 बच्चों के लिए चार शिक्षा मित्रों शालू, जोगेंद्र, बबली, शबनम को तैनात किया गया था। दौलतपुर गांव में 120 बच्चों पर प्रधानाध्यापक इमराम के साथ शिक्षा मित्र देवेंद्र और धनप्रकाश को रखा गया था। वहीं गांव भेड़ाहेड़ी में प्रधानाध्यापक संदीप राठी के साथ 126 बच्चों पर शिक्षा मित्र संगीता देवी, कोमल, गयूर अली तैनात थे। समायोजन के रद्द होने से गांव नंहेड़ा, नवादा, मीरावाला, रसुलपुर, वजीराबाद, तौफीर, भोकरहेड़ी देहात, शुक्रताल, सिकंदरपुर, तेवड़ा, खुशीपुरा, रुड़कली आदि विद्यालयों में शिक्षा मित्रों के नहीं आने से इनको बंद कर दिया गया है। गांव के खाईखेड़ी, छछरौली, नवादा, भुवापुर, भेड़ाहेड़ी, मज्जलिसपुर, सीकरी, महाराजनगर, केड़ी, गादला, खेड़ी फिरोजाबाद, मलपुरा आदि दर्जनों गांव के स्कूल बंद होने के कगार पर पहुंच चुके हैं। जो खुले उनमें शिक्षकों कमी साफ दिखाई देने लगी है। एक शिक्षक सैकड़ों बच्चों को कैसे शिक्षित करने का काम करें, इसका जवाब किसी अधिकारी के पास नहीं है।
विज्ञापन