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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   muslim women got right to divorce almost 80 years ago

78 साल पहले मिला था मुस्लिम महिलाओं को तलाक का अधिकार

Thu, 24 Aug 2017 05:34 PM IST
Updated Thu, 24 Aug 2017 05:34 PM IST
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muslim women got right to divorce almost 80 years ago
तील तलाक
सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक बार में तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिये जाने एवं छह महीने में इससे संबंधित कानून बनाने का फैसला आने के बाद मुस्लिम स्कालर एक बार फिर इतिहास के पन्ने पलट रहे हैं।
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आज से करीब 78 साल पहले देश की मुस्लिम महिलाओं को अपने पति से तलाक लेने का अधिकार ‘मुस्लिम विवाह-विच्छेद कानून 1939’ के माध्यम से हासिल हुआ था। दिलचस्प पहलू यह है कि उस समय महिलाओं के पक्ष में स्वयं मुस्लिम स्कालर खड़े हुए थे। 
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1939 तक नहीं था तलाक लेने का अधिकार

muslim women got right to divorce almost 80 years ago
teen talaq
1939 के पहले मुस्लिम महिलाओं को पति से तलाक लेने का अधिकार हासिल नहीं था। चाहे शौहर कितना भी बदचलन या अक्षम क्यों न हो। औरतों के समक्ष अन्य कई समस्याएं भी थीं, लेकिन उसका समाधान नहीं हो रहा था। एएमयू विधि संकाय के पूर्व डीन एवं मुस्लिम पर्सनल लॉ एक्सपर्ट प्रो. एम शब्बीर का कहना है कि इसकी वजह से मुस्लिम औरतें ईसाई धर्म अपनाने लगीं।

इस समस्या को तत्कालीन इस्लामिक स्कालरों ने समझा और चुनौती के रूप में लिया। उस समय के नामी इस्लामिक स्कालर मौलाना अशरफ अली थानवी को प्रबुद्ध धार्मिक नेताओं ने प्रस्ताव तैयार करने के लिए अधिकृत किया। 

महिला कब-कब दे सकती है तलाक

muslim women got right to divorce almost 80 years ago
triple talaq
शिया-सुन्नी एवं तमाम स्कूलों के अध्ययन के बाद मौलाना थानवी ने प्रस्ताव तैयार किया। सुन्नियों के मालिकी स्कूल ने उन्हें रास्ता दिखाया, जिसमें औरतों को तलाक लेने का हक दिया गया है। उनके प्रस्ताव को मुस्लिम विद्वानों ने स्वीकार कर लिया और ब्रिटिश पार्लियामेंट में भेजा। उसी के आधार पर मुस्लिम विवाह-विच्छेद कानून 1939 तैयार हुआ।

प्रो. शब्बीर कहते हैं कि मुसलमानों की पहल पर ही शरीयत एप्लीकेशन एक्ट 1937 बना। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने हालिया फैसले में मुसलमान लीडरशिप की साझेदारी को नकारा नहीं है। छह महीने का वक्त दिया है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड तलाक पर प्रगतिशील मसौदा तैयार कर संसद के सामने पेश करे, क्योंकि भारत में कानून बनाने का अधिकार उसी के पास है। वर्तमान समय में 56 इस्लामिक देशों में से 22 में तीन तलाक पर कानून बन चुके हैं। पर्सनल लॉ बोर्ड के स्कालर उसका अध्ययन कर सकते हैं। 

इस आधार पर महिला दे सकती है तलाक
शौहर का गैर जिम्मेदार होना, बीवी का आर्थिक निर्वाह न कर पाना, नपुंसक होना, जेल में होना, मानसिक रूप से अस्थिर होना, मारपीट करना आदि।
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