सर! दादा, दादी और पापा ने मम्मी को पीटकर मार डाला
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‘सर! मेरी मम्मी को दादा, दादी और पापा ने सुबह से मारना शुरू किया और दूसरे दिन तक बेल्ट, लोढ़ा व रॉड से मारा। उसके बाद जब वह मर गई तो आत्महत्या का रूप देने के लिए लोहे के चुल्ले से टांग दिया।’ अदालत में यह बयान था कक्षा एक में पढ़ने वाली सात वर्षीय मासूम रिया उर्फ सिम्मी का, जिसके आधार पर अदालत ने दहेज हत्या के आरोपी पति व सास-ससुर को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। प्रत्येक पर नौ हजार रुपये जुर्माना भी हुआ। आरोपी देवर को अदालत ने संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। फैसला अपर जिला जज दयाराम की अदालत से बुधवार को हुआ। मामला कुमारगंज थाना क्षेत्र के गांव पिठला का है।
एडीजीसी लव सिंह ने बताया कि बस्ती जिले के छावनी थाना क्षेत्र के गांव छितौनी निवासी बलवंतदेव सिंह ने अपनी बहन गुड़िया की शादी पिठला गांव के रंजीत सिंह के साथ की थी। शादी में हैसियत के मुताबिक दान-दहेज भी दिया, लेकिन ससुराल जाने के बाद विवाहिता से दहेज में 50 हजार रुपये व बाइक की मांग की जाने लगी। मांग न पूरी होने पर उसे इसके लिए प्रताड़ित किया गया। यह बातें वह मायके वालों को वहां जाने पर बताती थी।
इसके बाद 24 अप्रैल 2008 को बेल्ट, लोढ़ा व रॉड से पीट-पीटकर विवाहिता की हत्या कर दी गई। इसे आत्महत्या का रूप देने के लिए मृतका की साड़ी का फंदा बनाकर उसे छत के चुल्ले से लटका दिया गया। दो बच्चों में से बड़ी बच्ची रिया उर्फ सिम्मी ने इस घटना को अपनी आंखों से देखा और अदालत में पहुंचकर जो देखा उसे बताया भी। इसकी रिपोर्ट बलवंतदेव ने पति रंजीत सिंह, ससुर रामअजोर सिंह, सास गीता व देवर अमरजीत सिंह के खिलाफ दहेज के लिए प्रताड़ित करने, दहेज हत्या व दहेज प्रतिषेध अधिनियम में लिखाई थी। घटना के बाद से देवर को छोड़ बाकी सब जेल में ही हैं।