{"_id":"695c252f834bfc35b50b41f5","slug":"yellow-water-is-coming-from-the-taps-of-deendayal-nagar-moradabad-news-c-15-1-mbd1052-806171-2026-01-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: दीनदयाल नगर के नलों से आ रहा पीला पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: दीनदयाल नगर के नलों से आ रहा पीला पानी
विज्ञापन
दीनदयाल नगर में आ रहा गंदा पानी। स्रोत पाठक
मुरादाबाद। शहर में दूषित पानी की समस्या सिर्फ लाइनपार या पुराने शहर के क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है बल्कि पॉश माने जाने वाली कॉलोनियों में भी लोग पेयजल समस्या से जूझ रहे हैं। दीनदयालनगर के फेज-1 और फेज-2 में नलों से साफ पानी की जगह मिट्टी युक्त और पीले रंग का पानी आ रहा है जिससे लोग लंबे समय से परेशान हैं। हालात यह हैं कि लोग अपने कनेक्शन खत्म कराकर सबमर्सिबल लगवाने को मजबूर हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत की जा चुकी है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है।
लवकुश पार्क के पास रहने वाले राजेंद्र सिंह वर्मा का कहना है कि जब से क्षेत्र की नई सड़क बनी है पीले रंग के ही पानी की आपूर्ति हो रही है। कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। मिट्टी के कण पानी के साथ आ रहे हैं। हर दूसरे महीने टंकी की सफाई करानी पड़ रही है। वहीं क्षेत्र के गगन का कहना है कि पानी की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। पेयजल संकट से तंग आकर कई परिवारों ने मजबूरी में अपने घरों में सबमर्सिबल पंप लगवा लिए हैं।
पानी की समस्या के साथ-साथ इलाके के लोग सफाई व्यवस्था से भी जूझ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कॉलोनी के भीतर नालियों की नियमित सफाई नहीं हो रही है। नालों का ढलान सही न होने और ऊंची पुलिया बनाए जाने के कारण पानी की निकासी बाधित रहती है। यही वजह है कि हल्की बारिश में भी पूरा मोहल्ला तालाब बन जाता है। दीनदयालनगर फेज-1 के लवकुश पार्क की हालत भी बदहाल है। हाल ही में पेड़ों की छंटाई के बाद टहनियों को पार्क के बीच ही छोड़ दिया गया जिससे बच्चों के खेलने में भी दिक्कत हो रही है।
विज्ञापन
फेज-2 में भी पार्क की सफाई व्यवस्था न होने की वजह से लोगों ने खुद ही एक माली को नियुक्त कर रखा है जो पार्क की देखरेख कर रहा है। लोगों का कहना है कि दीनदयालनगर जैसी पॉश कॉलोनी में अगर यह हाल है तो शहर के बाकी इलाकों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। लोगों की मांग है कि पेयजल आपूर्ति की जांच कराई जाए और पाइपलाइन की सफाई हो। साथ ही नालों की तकनीकी खामियों को भी जल्द दूर किया जाए।
क्या बोले लोग
- पानी की आपूर्ति को लेकर लंबे समय से परेशानी बनी हुई है। पीला पानी आ रहा है मिट्टी युक्त। हर दो महीने पर टंकी साफ करानी पड़ती है और बड़ी मात्रा में मिट्टी बाहर निकलती है। इसका स्थायी समाधान निकलना चाहिए। जरूरत पड़ने पर पाइपलाइन भी नए सिरे से बिछाई जानी चाहिए। - राजेंद्र सिंह वर्मा, फेज-1
- पाइपलाइन से लंबे समय से गंदा पानी आ रहा है। मिट्टी के कंकड़ युक्त पानी की सप्लाई हो रही है। शुरू में जो पानी आता है वह देखने लायक भी नहीं होता है। शिकायत पर भी कोई सुनवाई नहीं होती है। - दिग्वेश भटनागर, फेज-1
- पहले भी गंदा पानी आता था और जबसे यह सड़क बनी है तबसे और भी गंदा पानी आने लगा है। बिना प्यूरीफायर लगवाए पानी का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। मोहल्ले में हर परिवार की मजबूरी है कि उन्हें प्यूरीफायर लगवाना पड़ता है। पाइपलाइन 20-25 साल पुरानी है इन्हें बदला जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिकायत करने पर हमेशा कहा जाता है कि कहीं से लीकेज हो गया होगा। इसका स्थाई समाधान नहीं हो पा रहा है। - प्रदीप सक्सेना, फेज-1
- पेयजल की समस्या तो है ही नालियों की भी सफाई नहीं हो रही है। नाले का पानी सड़क पर बहता है जिससे मच्छर पनपते हैं और यह बीमारी का जड़ बनते हैं। नियमित रूप से कभी भी सफाई नहीं होती है। - राजश्री, फेज-1
- पार्क में गंदगी और अव्यवस्था है। सफाई थोड़े-थोड़े हिस्से में खुद से ही लोग करते हैं। नियमित सफाई नहीं होती। शिकायत करने पर कर्मचारी आते हैं तो भी खानापूर्ति करके चले जाते हैं। दरवाजे के हैंडल खराब हैं जिससे आवारा कुत्ते भी पार्क में घुस आते हैं जो बच्चों के लिए खतरा बन जाते हैं। - एमके रस्तोगी, लवकुश पार्क
- पार्क में कुंडी न होने की वजह से कुत्ते पार्क के अंदर आते हैं और गंदगी फैलाते हैं। कुत्तों की वजह से बच्चों को भी खेलने में परेशानी होती है। सफाईकर्मी भी कोने में सफाई करके वापस लौट जाते हैं। पार्क में कई जगह गंदगी फैली हुई है। - मधु विश्नोई, लवकुश पार्क
- नालियां चोक हैं जिसकी वजह से मंदिर के सामने भी जलभराव होता है। सड़कों पर पानी बह रहा है जिससे कीड़े-मकोड़ों का भी आतंक है। सफाईकर्मी भी महीनों में आते हैं और फोटो खींचकर वापस लौट जाते हैं। - आशा सक्सेना, फेज-1
- हाल ही में पानी का कनेक्शन लिया है। पहले एकदम काला पानी आता था बहुत ही गंदा लेकिन पिछले एक सप्ताह से पानी ही नहीं आ रहा है। मोटर लगाने के बावजूद पानी नलों में नहीं आ रहा है। इसी से परेशान होकर सबमर्सिबल लगवा लिया है। - पूनम सक्सेना, फेज-2
- कॉलोनी में कई तरह की समस्याएं हैं। अकसर नल से काला पानी आता है। लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है। शिकायत भी की गई है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। - दीपक, फेज-2
विज्ञापन
लवकुश पार्क के पास रहने वाले राजेंद्र सिंह वर्मा का कहना है कि जब से क्षेत्र की नई सड़क बनी है पीले रंग के ही पानी की आपूर्ति हो रही है। कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ है। मिट्टी के कण पानी के साथ आ रहे हैं। हर दूसरे महीने टंकी की सफाई करानी पड़ रही है। वहीं क्षेत्र के गगन का कहना है कि पानी की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। पेयजल संकट से तंग आकर कई परिवारों ने मजबूरी में अपने घरों में सबमर्सिबल पंप लगवा लिए हैं।
विज्ञापन
पानी की समस्या के साथ-साथ इलाके के लोग सफाई व्यवस्था से भी जूझ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कॉलोनी के भीतर नालियों की नियमित सफाई नहीं हो रही है। नालों का ढलान सही न होने और ऊंची पुलिया बनाए जाने के कारण पानी की निकासी बाधित रहती है। यही वजह है कि हल्की बारिश में भी पूरा मोहल्ला तालाब बन जाता है। दीनदयालनगर फेज-1 के लवकुश पार्क की हालत भी बदहाल है। हाल ही में पेड़ों की छंटाई के बाद टहनियों को पार्क के बीच ही छोड़ दिया गया जिससे बच्चों के खेलने में भी दिक्कत हो रही है।
विज्ञापन
फेज-2 में भी पार्क की सफाई व्यवस्था न होने की वजह से लोगों ने खुद ही एक माली को नियुक्त कर रखा है जो पार्क की देखरेख कर रहा है। लोगों का कहना है कि दीनदयालनगर जैसी पॉश कॉलोनी में अगर यह हाल है तो शहर के बाकी इलाकों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। लोगों की मांग है कि पेयजल आपूर्ति की जांच कराई जाए और पाइपलाइन की सफाई हो। साथ ही नालों की तकनीकी खामियों को भी जल्द दूर किया जाए।
क्या बोले लोग
- पानी की आपूर्ति को लेकर लंबे समय से परेशानी बनी हुई है। पीला पानी आ रहा है मिट्टी युक्त। हर दो महीने पर टंकी साफ करानी पड़ती है और बड़ी मात्रा में मिट्टी बाहर निकलती है। इसका स्थायी समाधान निकलना चाहिए। जरूरत पड़ने पर पाइपलाइन भी नए सिरे से बिछाई जानी चाहिए। - राजेंद्र सिंह वर्मा, फेज-1
- पाइपलाइन से लंबे समय से गंदा पानी आ रहा है। मिट्टी के कंकड़ युक्त पानी की सप्लाई हो रही है। शुरू में जो पानी आता है वह देखने लायक भी नहीं होता है। शिकायत पर भी कोई सुनवाई नहीं होती है। - दिग्वेश भटनागर, फेज-1
- पहले भी गंदा पानी आता था और जबसे यह सड़क बनी है तबसे और भी गंदा पानी आने लगा है। बिना प्यूरीफायर लगवाए पानी का प्रयोग नहीं किया जा सकता है। मोहल्ले में हर परिवार की मजबूरी है कि उन्हें प्यूरीफायर लगवाना पड़ता है। पाइपलाइन 20-25 साल पुरानी है इन्हें बदला जाना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शिकायत करने पर हमेशा कहा जाता है कि कहीं से लीकेज हो गया होगा। इसका स्थाई समाधान नहीं हो पा रहा है। - प्रदीप सक्सेना, फेज-1
- पेयजल की समस्या तो है ही नालियों की भी सफाई नहीं हो रही है। नाले का पानी सड़क पर बहता है जिससे मच्छर पनपते हैं और यह बीमारी का जड़ बनते हैं। नियमित रूप से कभी भी सफाई नहीं होती है। - राजश्री, फेज-1
- पार्क में गंदगी और अव्यवस्था है। सफाई थोड़े-थोड़े हिस्से में खुद से ही लोग करते हैं। नियमित सफाई नहीं होती। शिकायत करने पर कर्मचारी आते हैं तो भी खानापूर्ति करके चले जाते हैं। दरवाजे के हैंडल खराब हैं जिससे आवारा कुत्ते भी पार्क में घुस आते हैं जो बच्चों के लिए खतरा बन जाते हैं। - एमके रस्तोगी, लवकुश पार्क
- पार्क में कुंडी न होने की वजह से कुत्ते पार्क के अंदर आते हैं और गंदगी फैलाते हैं। कुत्तों की वजह से बच्चों को भी खेलने में परेशानी होती है। सफाईकर्मी भी कोने में सफाई करके वापस लौट जाते हैं। पार्क में कई जगह गंदगी फैली हुई है। - मधु विश्नोई, लवकुश पार्क
- नालियां चोक हैं जिसकी वजह से मंदिर के सामने भी जलभराव होता है। सड़कों पर पानी बह रहा है जिससे कीड़े-मकोड़ों का भी आतंक है। सफाईकर्मी भी महीनों में आते हैं और फोटो खींचकर वापस लौट जाते हैं। - आशा सक्सेना, फेज-1
- हाल ही में पानी का कनेक्शन लिया है। पहले एकदम काला पानी आता था बहुत ही गंदा लेकिन पिछले एक सप्ताह से पानी ही नहीं आ रहा है। मोटर लगाने के बावजूद पानी नलों में नहीं आ रहा है। इसी से परेशान होकर सबमर्सिबल लगवा लिया है। - पूनम सक्सेना, फेज-2
- कॉलोनी में कई तरह की समस्याएं हैं। अकसर नल से काला पानी आता है। लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है। शिकायत भी की गई है लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ। - दीपक, फेज-2