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हरियाणा से आ रही साल, सागौन की लकड़ी 50 हजार लेकर छोड़ने का आरोप
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हरियाणा से साल और सागौन की लकड़ी लाद कर ला रही डीसीएम को वाणिज्य कर विभाग के सचल दल और पुलिस कर्मियों ने पकड़ लिया। डीसीएम को छोड़ने के डेढ़ लाख रुपये मांगे। 50 हजार रुपये लेकर डीसीएम छोड़ने का आरोप है। 40 हजार रुपये सचल दल और दस हजार पुलिसकर्मियों ने लिए।
नौगांवा सादात कस्बे के लोग हरियाणा और पंजाब से छतों से निकली कड़ियों (लकड़ी) को लाने का काम करते हैं। छतों से निकलने वाली साल और सागौन की कड़ियों को लाकर फर्नीचर बनाने वाले दुकानदारों को बेचते हैं। जिनसे विंडो, चौखट बनाई जाती हैं। बुधवार दोपहर बाद डीसीएम में लाद कर गजरौला चौपला पर पहुंचे थे।
बताया जा रहा है कि यहां पर वाणिज्य कर विभाग की सचल दल और कुछ पुलिसकर्मी मिल गए। लकड़ी को अवैध रूप से लाने की बात कहते हुए नवादा रोड पर ले गए। डीसीएम में लदी लकड़ी लाने के अभिवहन पत्र मांगे। मगर चालक व डीसीएम में सवार लोग अभिवहन पास नहीं दिखा सके। उन्होंने तर्क दिया कि लकड़ी नई होती और उसे किसी दुकानदार से लाते तो उसका अभिवहन पास होता। मगर वह तो छतों से निकली पुरानी और जहां तहां से एकत्र करके ला रहे हैं।
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मगर टीम ने अभिवहन पास नहीं होने की बात कहते हुए लकड़ी सहित गाड़ी को सीज करने को कहा। जिस पर चालक और उसके साथी डर गए। पहले तो डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद घटते घटते 60 हजार पर आ गए। आरोप है कि गाड़ी छोड़ने के लिए सचल दल ने 40 हजार रुपये व पुलिस कर्मियों ने दस हजार रुपये की मांग की। 50 हजार रुपये देने के बाद गाड़ी को छोड़ा गया। वाणिज्य कर विभाग के सचल दल प्रभारी जेपी शुक्ला ने बताया कि उनकी टीम ने लकड़ी लदी डीसीएम न तो पकड़ी और न ही छोड़ी। लगाया गया आरोप बेबुनियाद है।
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नौगांवा सादात कस्बे के लोग हरियाणा और पंजाब से छतों से निकली कड़ियों (लकड़ी) को लाने का काम करते हैं। छतों से निकलने वाली साल और सागौन की कड़ियों को लाकर फर्नीचर बनाने वाले दुकानदारों को बेचते हैं। जिनसे विंडो, चौखट बनाई जाती हैं। बुधवार दोपहर बाद डीसीएम में लाद कर गजरौला चौपला पर पहुंचे थे।
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बताया जा रहा है कि यहां पर वाणिज्य कर विभाग की सचल दल और कुछ पुलिसकर्मी मिल गए। लकड़ी को अवैध रूप से लाने की बात कहते हुए नवादा रोड पर ले गए। डीसीएम में लदी लकड़ी लाने के अभिवहन पत्र मांगे। मगर चालक व डीसीएम में सवार लोग अभिवहन पास नहीं दिखा सके। उन्होंने तर्क दिया कि लकड़ी नई होती और उसे किसी दुकानदार से लाते तो उसका अभिवहन पास होता। मगर वह तो छतों से निकली पुरानी और जहां तहां से एकत्र करके ला रहे हैं।
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मगर टीम ने अभिवहन पास नहीं होने की बात कहते हुए लकड़ी सहित गाड़ी को सीज करने को कहा। जिस पर चालक और उसके साथी डर गए। पहले तो डेढ़ लाख रुपये की मांग की गई, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद घटते घटते 60 हजार पर आ गए। आरोप है कि गाड़ी छोड़ने के लिए सचल दल ने 40 हजार रुपये व पुलिस कर्मियों ने दस हजार रुपये की मांग की। 50 हजार रुपये देने के बाद गाड़ी को छोड़ा गया। वाणिज्य कर विभाग के सचल दल प्रभारी जेपी शुक्ला ने बताया कि उनकी टीम ने लकड़ी लदी डीसीएम न तो पकड़ी और न ही छोड़ी। लगाया गया आरोप बेबुनियाद है।