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सड़क पर गड्ढों के झटकों से एंबुलेंस में डिलीवरी, जच्चा-बच्चा सुरक्षित
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मुरादाबाद। डिलारी-भोजपुर सड़क के गड्ढों से रविवार तड़के एक गर्भवती की जान पर बन आई। इमरजेंसी 102 एंबुलेंस गर्भवती को प्रसव के लिए भोजपुर ला रही थी। खस्ताहाल सड़क और ऊपर से जगह-जगह पानी भरा होने से एंबुलेंस स्पीड नहीं पकड़ पा रही थी। 23 किमी के गड्ढों के सफर में एंबुलेंस के झटकों से गर्भवती दर्द से कराहने लगी। अस्पताल से दो किमी पहले ही महिला की सांस उखड़ने लगी। उसकी जान बचाने के लिए एंबुलेंस चालक और सहयोगी ने इमरजेंसी में डिलीवरी कराई। अब जच्चा-बच्चा सुरक्षित हैं। दोनों को भोजपुर अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं।
डिलारी के बढेरा मुस्तफापुर निवासी 30 साल की फरजाना बेगम पत्नी असगर अली गर्भवती थी। रविवार रात उसे प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने रात 2.42 बजे 102 एंबुलेंस के लिए फोन किया। डिलारी से एंबुलेंस गर्भवती के घर पहुंची और उसे भोजपुर अस्पताल के लिए लाने लगी। चालक रजत कुमार ने बताया कि इस्लाम नगर और दूसरे संपर्क मार्गों की हालत बेहद खराब थी। सड़क पर अनगिनत गड्ढों के साथ बारिश का पानी भरा हुआ था। इससे एंबुलेंस स्पीड नहीं पकड़ पा रही थी। गर्भवती के साथ उसकी जेठानी, सास और पति थे। गड्ढों के झटकों से गर्भवती दर्द से तड़प रही थी। 23 किमी एंबुलेंस चलने पर गर्भवती की सांस उखड़ने लगी। झटकों से ब्लडिंग होने लगी। एंबुलेंस के ईएमटी महिपाल ने बताया कि परिजनों के भी हाथ पैर फूलने लगे। भोजपुर अस्पताल दो किमी दूर था, लेकिन गर्भवती की जान बचाने उसे चालक के साथ प्रसव कराना पड़ा। सुबह 3.55 बजे सुरक्षित प्रसव कराया गया और जच्चा-बच्चा को भोजपुर में भर्ती कराया है। महिपाल ने बताया कि महिला का बेटा हुआ। इससे पहले महिला की दो बेटियां और एक बेटा है। पति मजदूरी करता है। एंबुलेंस संघ के मीडिया प्रभारी जितेंद्र सिसौदिया ने एंबुलेंस चालक और ईएमटी को महिला की जान बचाने बधाई दी है।
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डिलारी के बढेरा मुस्तफापुर निवासी 30 साल की फरजाना बेगम पत्नी असगर अली गर्भवती थी। रविवार रात उसे प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने रात 2.42 बजे 102 एंबुलेंस के लिए फोन किया। डिलारी से एंबुलेंस गर्भवती के घर पहुंची और उसे भोजपुर अस्पताल के लिए लाने लगी। चालक रजत कुमार ने बताया कि इस्लाम नगर और दूसरे संपर्क मार्गों की हालत बेहद खराब थी। सड़क पर अनगिनत गड्ढों के साथ बारिश का पानी भरा हुआ था। इससे एंबुलेंस स्पीड नहीं पकड़ पा रही थी। गर्भवती के साथ उसकी जेठानी, सास और पति थे। गड्ढों के झटकों से गर्भवती दर्द से तड़प रही थी। 23 किमी एंबुलेंस चलने पर गर्भवती की सांस उखड़ने लगी। झटकों से ब्लडिंग होने लगी। एंबुलेंस के ईएमटी महिपाल ने बताया कि परिजनों के भी हाथ पैर फूलने लगे। भोजपुर अस्पताल दो किमी दूर था, लेकिन गर्भवती की जान बचाने उसे चालक के साथ प्रसव कराना पड़ा। सुबह 3.55 बजे सुरक्षित प्रसव कराया गया और जच्चा-बच्चा को भोजपुर में भर्ती कराया है। महिपाल ने बताया कि महिला का बेटा हुआ। इससे पहले महिला की दो बेटियां और एक बेटा है। पति मजदूरी करता है। एंबुलेंस संघ के मीडिया प्रभारी जितेंद्र सिसौदिया ने एंबुलेंस चालक और ईएमटी को महिला की जान बचाने बधाई दी है।
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